Tuesday, June 30, 2026
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MP : राम-राम से लिखी गई अनोखी रामायण, राम मंदिर में की जाएगी स्थापित

मध्य प्रदेश के देवास जिले के हाटपीपल्या के दिवंगत डॉ. कल्याणमल पांडे ने भगवान श्रीराम के प्रति अपनी अनोखी भक्ति से ऐसा काम किया, जो इतिहास में दर्ज हो गया। उन्होंने राम शब्द से पूरी रामायण लिख दी। यह अनोखी रामायण अब अयोध्या के श्रीराम मंदिर में स्थापित करने की तैयारी हो रही है।

कैसे शुरू हुआ यह दिव्य कार्य

डॉ. कल्याणमल पांडे ने 17 अगस्त, 1961 को साधारण कॉपी में राम-राम लिखना शुरू किया। बाद में उन्होंने ए-4 साइज के पेज पर लिखना शुरू किया। रामायण लिखने का यह कार्य उनकी भक्ति और समर्पण का अद्भुत उदाहरण है।

22 साल की मेहनत और 13,000 पृष्ठ का ग्रंथ

डॉ. पांडे को रामायण पूरी करने में 22 साल लगे। उन्होंने इसमें सिर्फ राम शब्द का प्रयोग किया। इस ग्रंथ में 13,000 पृष्ठ हैं और इसका वजन 90 किलो है। इसके साथ ही उन्होंने गणेश, शिव, राम, दुर्गा और हनुमान की खूबसूरत तस्वीरें भी बनाई।

परिवार ने संभाला काम और विरासत

डॉ. पांडे का 1982 में निधन हो गया। तब तक उन्होंने रामायण के कई कांड पूरे कर लिए थे। उनके पुत्र कुंदन पांडे ने बाकी दो कांड पूरे किए। कुंदन के निधन (1997) के बाद इस रामायण को उनकी पत्नी मंजुला और पौत्र लव पांडे ने संभाल कर रखा।

गिनीज बुक में दर्ज कराने की इच्छा

परिवार की इच्छा है कि इस अनोखी रामायण को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल किया जाए। यह न केवल भारतीय संस्कृति और भक्ति का अद्भुत उदाहरण है, बल्कि दुनिया के लिए प्रेरणादायक भी है।

अयोध्या में श्रीराम मंदिर में होगी स्थापना

लव पांडे ने बताया कि यह रामायण 13 जनवरी को इंदौर में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय को भेंट की जाएगी। इसके बाद इसे अयोध्या ले जाकर श्रीराम मंदिर में स्थापित किया जाएगा।

अनोखी रामायण की खासियत

इस रामायण में राम शब्द के अलावा कोई अन्य शब्द नहीं है।

ग्रंथ का वजन 90 किलो है और इसमें 13,000 पृष्ठ हैं।

इसमें भगवान के विभिन्न स्वरूपों की खूबसूरत तस्वीरें भी बनाई गई हैं।

परिवार की भावना

पौत्र लव पांडे ने कहा कि यह रामायण हमारे परिवार की आस्था और समर्पण का प्रतीक है। इसे श्रीराम मंदिर में स्थापित करना हमारे दादा जी की भक्ति को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

समर्पण और भक्ति का अद्भुत उदाहरण

डॉ. कल्याणमल पांडे की यह अनोखी रामायण भारतीय संस्कृति, भक्ति और समर्पण का जीता-जागता उदाहरण है। यह रामायण न केवल अयोध्या बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व की बात है।

AAP MLA गोगी की मौ’त पर पूर्व दिल्ली CM अरविंद केजरीवाल का ट्वीट, जताया दुख

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लुधियाना पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से आम आदमी पार्टी के विधायक गुरप्रीत गोगी की शुक्रवार देर रात गोली लगने से मौत हो गई। यह खबर मिलते ही शोक की लहर दौड़ गई है। विधायक गुरप्रीत गोगी के निधन पर दिल्ली के पूर्व सी.एम. अरविंद केजरीवाल ने जताया ट्वीट कर दुख जताया है।

अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा कि ”लुधियाना के विधायक श्री गुरप्रीत गोगी बस्सी जी के असामयिक निधन के बारे में जानकर बहुत दुख हुआ। एक ऐसे नेता जिन्होंने अपने लोगों की अटूट निष्ठा और करुणा के साथ सेवा की, उनके न रहने से एक ऐसा खालीपन पैदा होगा जिसे भरना मुश्किल है। उनकी आत्मा को शांति मिले। इस कठिन समय में मेरी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं उनके शोकाकुल परिवार के साथ हैं। उन्हें शक्ति और सांत्वना मिले। हम इस गहरे नुकसान की घड़ी में उनके परिवार और लुधियाना के लोगों के साथ मजबूती से खड़े हैं। सेवा की उनकी विरासत को हमेशा याद रखा जाएगा।”

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आज झारखंड के महान विभूतियों का जन्मदिन, संघर्ष भरा रहा इनका सफर

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आज यानी 11 जनवरी को झारखंड के 2 महान दिग्गजों का जन्मदिन है। आज दिशोम गुरू शिबू सोरेन और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी का जन्मदिन है। आज दिशोम गुरू शिबू सोरेन 81 साल के हो गए हैं तो वहीं, बाबूलाल मरांडी 67 साल के हो गए हैं।

3 बार झारखंड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं शिबू सोरेन
1944 में शिबू सोरेन का जन्म रामगढ़ के नेमरा गांव में हुआ था। शिबू सोरेन से दिशोम गुरू बनने की उनकी कहानी काफी संघर्ष भरी है। शिबू सोरेन ने दसवीं तक की पढ़ाई की है। शिबू सोरेन के पिता सोबरन मांझी की 1957 में हत्या कर दी गई थी। वो महाजनी प्रथा के खिलाफ लगातार आंदोलन कर रहे थे। अपने पिता की हत्या के बाद ही शिबू सोरेन आदिवासी हित में उग्र होकर बोलने लगे। उन्होंने धान काटो आंदोलन चलाया। झारखंड मुक्ति मोर्चा का 1972 में गठन हुआ। शिबू सोरेन ने अलग झारखंड की मांग को लेकर आंदोलन चलाया। आपातकाल में उनके नाम का वारंट निकला, उन्होंने तब सरेंडर कर दिया। दिशोम गुरु झारखंड के 3 बार मुख्यमंत्री बने। वो पहली बार 1977 में चुनाव लड़े, तब वो हार गए। उसके बाद उन्होंने संथाल की ओर अपना रूख किया। 1980 में वो पहली बार दुमका से जीते। वो 8 बार यहां से जीते। शिबू सोरेन दो बार राज्यसभा सांसद भी बने। केंद्र में उन्होंने कोयला मंत्रालय का भार भी संभाला।

शिबू सोरेन के 3 बेटे हैं- दुर्गा सोरेन, हेमंत सोरेन और बसंत सोरेन। शिबू सोरेन के बेटे दुर्गा सोरेन का 40 साल की उम्र में निधन हो गया। आधिकारिक रूप से उनकी मौत के कारणों के बारे में कुछ नहीं बताया गया है। अटकलें लगाई गई कि बाप-बेटे में किसी बात को लेकर नोकझोंक हुई थी जिसके बाद दुर्गा ने अधिक मात्रा में नींद की गोलियां खा ली थीं। दूसरी तरफ ये भी अटकलें लगाई गई कि उन्हें शराब की लत थी, जिससे उनका गुर्दा खराब हो गया था। वहीं, बात करें शिबू सोरेन के दूसरे बेटे हेमंत सोरेन की तो वह झारखंड के वर्तमान मुख्यमंत्री हैं। हेमंत सोरेन ने भारी मतों से लगातार दूसरी बार जीत हासिल की। वहीं, शिबू सोरेन के तीसरे बेटे बसंत सोरेन तो वह वर्तमान में दुमका के विधायक हैं। शिबू सोरेन की बहूएं सीता सोरेन और कल्पना सोरेन दोनों राजनीति में हैं। कल्पना सोरेन वर्तमान में गांडेय की विधायक है।

शिक्षक से मुख्यमंत्री तक का सफर रहा कठिन
वहीं, बाबूलाल मरांडी का भी आज जन्मदिन है। आज वे 67 वें साल में प्रवेश कर गये हैं। उनका जन्म 11 जनवरी 1958 में गिरिडीह के कोदाईबांक गांव में हुआ था। वो किसान परिवार से आते हैं। उन्होंने शिक्षक से मुख्यमंत्री तक का सफर तय किया है। बाबूलाल मरांडी कॉलेज के दिनों से ही आरएसएस से प्रभावित होकर संघ से जुड़ गये थे। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह गांव के ही एक प्राथमिक स्कूल में टीचर थे। नौकरी करने के दौरान एक बार उन्हें किसी काम से शिक्षा विभाग जाना पड़ा। वहां पर कार्यरत क्लर्क ने उनसे पैसे मांग लिये। बाबूलाल मरांडी ने इसका विरोध किया, लेकिन सरकारी बाबू अपनी जिद में अड़ा हुआ था। इसके बाद वह घर आए और नौकरी से इस्तीफा दे दिया। बाबूलाल मरांडी कुछ सालों तक विश्व हिंदू परिषद के सचिव भी रहे। साल 1991 में वे पहली बार भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़े, लेकिन हार गये। उस वक्त संताल में शिबू सोरेन का प्रभाव इतना था कि कोई भी आम नेता उन्हें चुनौती नहीं दे सकता था। साल 1998 उनकी जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। 1998 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें पार्टी की कमान सौंपी और उसी साल उन्होंने शिबू सोरेन को हरा दिया जिसके बाद उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी के कैबिनेट में मंत्री बनाया गया। झारखंड गठन के बाद वो यहां के पहले मुख्यमंत्री बने थे। 1990 में बाबूलाल मरांडी बीजेपी के संथाल परगना के संगठन मंत्री बने। बाबूलाल मरांडी दुमका में शिबू सोरेन के विजय रथ को रोका। वहां से सांसद बने। साल 2000 में झारखंड गठन के बाद वो राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने। साल 2003 में उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया। बाबूलाल मरांडी ने 2006 में अपनी पार्टी झारखंड विकास मोर्चा का गठन किया। तीन चुनाव लड़े। साल 2020 में उन्होंने पार्टी का विलय बीजेपी में कर दिया।

टीवी और फिल्मों के दिग्गज अभिनेता 70 साल के टीकू तलसानिया को आया हार्ट अटैक…

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टीवी और बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता टीकू तलसानिया की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, उनकी हालत गंभीर है और हार्ट अटैक की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल डॉक्टर उनकी सेहत की स्थिति पर लगातार निगरानी रख रहे हैं और तबीयत खराब होने के सटीक कारणों का पता लगाने में जुटे हैं।

70 वर्षीय टीकू तलसानिया इंडस्ट्री के वरिष्ठ और प्रिय कलाकारों में से एक हैं। उनके परिवार से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन अभी तक उनकी ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

कॉमेडी का बेमिसाल सफर
1954 में जन्मे टीकू तलसानिया ने 1984 में टीवी शो ‘ये जो है जिंदगी’ से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की। 1986 में फिल्म ‘प्यार के दो पल’ से उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा। अपनी चार दशक लंबी यात्रा में उन्होंने दर्शकों का दिल जीतने वाले कई किरदार निभाए।

टीकू तलसानिया खास तौर पर अपने शानदार कॉमिक रोल्स के लिए जाने जाते हैं। उनकी कॉमेडी की टाइमिंग और डायलॉग डिलीवरी दर्शकों को हमेशा गुदगुदाती रही है। उन्होंने ‘एक से बढ़कर एक’, ‘हुकूम मेरे आका’, ‘गोलमाल है भाई सब गोलमाल है’, ‘सजन रे झूठ मत बोलो’ जैसे लोकप्रिय टीवी शोज़ में काम किया।

हिट फिल्मों की लंबी लिस्ट
टीकू तलसानिया को ‘दिल है कि मानता नहीं’, ‘अंदाज अपना अपना’, ‘इश्क’, ‘देवदास’, ‘पार्टनर’, ‘धमाल’, ‘स्पेशल 26’ जैसी फिल्मों में उनके यादगार अभिनय के लिए भी सराहा गया है।

दर्शक और इंडस्ट्री के साथी कलाकार उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। उनके चाहने वालों को उम्मीद है कि वे इस मुश्किल समय से जल्द उबरकर फिर से अपने प्रशंसकों के बीच नजर आएंगे।

शेयर बाजार में जारी गिरावट के बीच निवेशकों को बड़ा झटका…2025 में मार्केट का बुराहाल!

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शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी है और इस बीच निवेशकों के लिए एक और झटके वाली खबर सामने आई है। ब्रोकरेज फर्म HSBC ने भारतीय शेयर बाजार की रेटिंग को “ओवरवेट” से घटाकर “न्यूट्रल” कर दिया है। साथ ही, 2025 के लिए सेंसेक्स का टारगेट भी 5,000 अंक घटा दिया है। पहले HSBC का अनुमान था कि सेंसेक्स 90,520 तक पहुंच सकता है, लेकिन अब उसने इसे घटाकर 85,990 कर दिया है। हालांकि, यह नया लक्ष्य भी सेंसेक्स के वर्तमान स्तर से 10% ऊपर है।

HSBC ने कहा कि भारतीय बाजारों में पिछले कुछ सालों में 25% की सालाना ग्रोथ देखने को मिली थी, लेकिन अब मुनाफे में कमी आई है और वैल्यूएशन 23 गुना पर पहुंच चुका है, जो कि बहुत ऊंचा है। हालांकि, ब्रोकरेज ने भारतीय बाजारों की मीडियम और लॉन्ग टर्म ग्रोथ स्टोरी को मजबूत बताया, लेकिन बढ़ती लागत और धीमी विकास दर के कारण शॉर्ट-टर्म में सीमित बढ़त की संभावना जताई है। इसी कारण से HSBC ने अपनी रेटिंग को घटाने का फैसला किया।

सिटीग्रुप के बाद HSBC की रिपोर्ट ने भी भारतीय निवेशकों के बीच चिंता पैदा कर दी है। HSBC ने निफ्टी 50 के ग्रोथ अनुमानों में भी कमी की है। पहले यह अनुमान 15% था, जिसे अब घटाकर 5% कर दिया गया है। ब्रोकरेज ने कहा कि निवेशकों को अपनी पोजीशन का फिर से आकलन करना चाहिए, क्योंकि इस साल मार्केट रिटर्न सीमित रह सकता है।

इस बीच भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का दौर जारी है, और निफ्टी ने 23,500 के महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल को तोड़ दिया। आईटी सेक्टर को छोड़कर अन्य सभी सेक्टरों में बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है।

J&K : लोगों के लिए अहम खबर, कई दिन बंद रहेगा यह National Highway

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जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए अहम खबर है। जानकारी के अनुसार खराब मौसम व सड़क की मुरम्मत के चलते श्रीनगर-कारगिल राष्ट्रीय राजमार्ग 3 दिन बंद रहेगा। घर से निकलने से पहले एक बार ट्रैफिक विभाग की वैबसाइट पर जाकर जानकारी हासिल कर लें।

जानकारी के अनुसार 11 से 13 जनवरी तक श्रीनगर-कारगिल राष्ट्रीय राजमार्ग यातायात के लिए बंद रहेगा। विभाग ने पर्यटकों/यात्रियों/ट्रांसपोर्टरों को प्रशासन और यातायात विभाग की एडवाइजरी का पालन करने की सलाह दी है। वहीं, जम्मू कश्मीर में ठंड और बढ़ गई है। पहाड़ी और मैदानी इलाकों में शीतलहर का प्रकोप है। आने वाले दिनों में भी ठंड और बढ़ने की संभावना है।

झारखंड को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में हेमंत सरकार

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झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य को तकनीकी और डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य सरकार की महत्वपूर्ण पहल के तहत नामकुम, रांची में स्थित आईटी टावर झारखण्ड को डिजिटल युग की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार है।

यह अत्याधुनिक आईटी टावर न केवल झारखण्ड की तकनीकी प्रगति को प्रदर्शित करता है, बल्कि राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा। मुख्यमंत्री ने इस परियोजना की प्रशंसा करते हुए कहा आईटी टावर झारखंड के युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार का एक नया द्वार खोलेगा। यह राज्य को तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्र में अग्रणी बनने में मदद करेगा। इस आईटी टावर को झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण की देखरेख में विकसित किया गया है, जो तकनीकी और डिजिटल व्यवसायों के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में कार्य करेगा। इसकी संरचना त्र + 5 फ्लोर की है और क्षेत्रफल लगभग 40,000 वर्ग फीट है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण, रांची क्षेत्रीय कार्यालय ने नामकुम औद्योगिक क्षेत्र में स्थित अत्याधुनिक आईटी टावर के दीर्घकालिक पट्टे (30 वर्षों के लिए) के लिए प्रतिष्ठित संगठनों और योग्य आईटीआईटीईएस क्षेत्र की संस्थाओं से आवेदन आमंत्रित किए हैं, जिसकी अंतिम तिथि 15 फरवरी 2025 है। इस परियोजना के माध्यम से झारखण्ड सरकार राज्य को डिजिटल रूप से सशक्त और तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। आईटी टावर ना केवल रांची, बल्कि पूरे राज्य के औद्योगिक और आर्थिक विकास में एक मील का पत्थर साबित होगा।

आज मिलेगा Jalandhar को नया Mayor, यहां जानें पूरा Schedule

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पटियाला नगर निगम के बाद जालंधर में आम आदमी पार्टी का मेयर बनने जा रहा है जिसके लिए 11 जनवरी आज दोपहर 3 बजे स्थानीय रैडक्रॉस भवन में पार्षद हाउस की बैठक बुलाई जा चुकी है। इस बैठक में मौजूद पार्षदों द्वारा हाउस में ही मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव किया जाएगा परंतु पता चला है कि आम आदमी पार्टी के नेतृत्व ने हाऊस की बैठक से कुछ घंटे पहले जालंधर के एक फाइव स्टार होटल में आम आदमी पार्टी की ओर से जीते तथा बाद में पार्टी में शामिल हुए नवनिर्वाचित पार्षदों की एक बैठक बुला ली है जहां सभी पार्षदों को इकट्ठा करके हाऊस की बैठक में ले जाया जाएगा।

इस बैठक में जहां पार्षद मौजूद रहेंगे, वहीं आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रधान, जालंधर निगम चुनाव हेतु प्रभारी तथा हलका इंचार्ज भी उपस्थित रहेंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक दौरान जहां सभी ‘आप’ पार्षदों को एक दूसरे से इंट्रोड्यूस करवाया जाएगा, वहीं मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव हेतु रणनीति भी तय की जाएगी। पता चला है कि इसी बैठक में जालंधर के नए मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के नाम को सार्वजनिक कर दिया जाएगा तथा यह भी तय किया जाएगा कि हाउस में कौन सा पार्षद प्रोटेम स्पीकर बनेगा और हाऊस की कार्रवाई को संचालित करेगा। कौन पार्षद नए मेयर के नाम का प्रस्ताव रखेगा और कौन सा पार्षद उसे नाम को सैकेंड करेगा। ऐसी ही प्रक्रिया सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव हेतु भी अपनाई जा रही है। सूत्र बताते हैं कि होटल में होने वाली इस बैठक का एक मकसद यह भी है कि हाउस की बैठक से पहले ही सत्तापक्ष के सभी पार्षदों को इकट्ठा कर लिया जाए ताकि गैरहाजिरी जैसी कोई गुंजायस ही न रहे ।

शुक्रवार रात तक नामों पर हुआ मंथन
21 दिसंबर 
को संपन्न हुए जालंधर नगर निगम के चुनाव के तुरंत बाद ही आम आदमी पार्टी के नेतृत्व ने मेयर ,सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के नाम पर चर्चा का क्रम शुरू कर दिया था जो अभी तक जारी है। पता चला है कि पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा जालंधर के मेयर के नाम पर तो सहमति पहले से ही जताई जा चुकी है परंतु जालंधर में सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर कौन बनेगा, इसे लेकर शुक्रवार रात तक बैठकों का दौर जारी रहा। तीन पदों के लिए 6 नामों के पैनल पर विचार चर्चा हुई थी, जिस दौरान तीन नामों को फाइनल तो कर लिया गया परंतु इन बारे शनिवार दोपहर होटल में होने जा रही बैठक दौरान ही सभी को बताया जाएगा। पता चला है कि सीनियर डिप्टी मेयर पद के लिए दो महिला पार्षदों के बीच जबरदस्त मुकाबला चल रहा था परंतु उनमें से एक नाम पर मोहर लगा दी गई है । पार्टी सूत्रों की माने तो जालंधर का मेयर वैस्ट हल्के से, सीनियर डिप्टी मेयर सेंट्रल तथा डिप्टी मेयर कैंट विधानसभा क्षेत्र से बनाया जा रहा है। फिलहाल सारी स्थिति शनिवार दोपहर ही साफ होगी।

यूपी के इस जिले में बढ़ीं छुट्टियां, भीषण ठंड को देखते हुए डीएम का आदेश

यूपी की राजधानी लखनऊ में भीषण ठंड को देखते हुए जिलाधिकारी द्वारा विद्यालयों में छुट्टियों को बढ़ा दिया गया है। लखनऊ डीएम सूर्यपाल गंगवार ने निर्देश जारी करते हुए कक्षा 1 से 8 तक के सभी विद्यालयों में 14 जनवरी तक अवकाश घोषित किया है। वहीं कक्षा 9 से 12 तक के विद्यालयों को सुबह 10 बजे से 3 बजे तक संचालित करने के निर्देश दिए हैं।

दिल्ली चुनाव में मुफ्त योजनाओं पर भाजपा, कांग्रेस और आप की नजरें

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दिल्ली विधानसभा चुनाव अब मुफ्त योजनाओं के मुद्दे पर गहराई से प्रभावित हो गया है। आम आदमी पार्टी (आप) द्वारा शुरू की गई मुफ्त योजनाओं को पहले “मुफ्त की रेवड़ी” और “मुफ्तखोरी” के रूप में आलोचना का सामना करना पड़ा था, लेकिन अब यह तरीका भाजपा और कांग्रेस जैसी अन्य पार्टियों द्वारा भी अपनाया जा रहा है। कुल मिलाकर दिल्ली के चुनावी दंगल में तीनों प्रमुख राजनीतिक दलों की उम्मीदें मुफ्त योजनाओं पर ही टिकी हुई हैं।

दिल्ली में मुफ्त बिजली और पानी देने के वादे ने आम आदमी पार्टी को सत्ता में बैठाया था, लेकिन अब इन मुफ्त योजनाओं का राज्य पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। दिल्ली सरकार का बजट लगभग 76,000 करोड़ रुपये का है, जिसमें से 15-20% हिस्सा मुफ्त योजनाओं के लिए आवंटित किया जाता है। दिल्ली सरकार हर साल 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने के लिए लगभग 3,250 करोड़ रुपये खर्च करती है। इसके अलावा, मुफ्त पानी और अन्य सब्सिडी के कारण राज्य के खजाने पर भारी दबाव पड़ रहा है। यदि अरविंद केजरीवाल द्वारा महिला सम्मान योजना लागू की जाती है, तो इससे दिल्ली सरकार पर 4,560 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च हो सकता है।

इसके अलावा, भाजपा और कांग्रेस ने भी चुनावी वादों के तहत कई मुफ्त योजनाओं की घोषणा की है। भाजपा ने वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के लिए भी बिजली सब्सिडी देने का वादा किया है, जबकि कांग्रेस ने 400 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की योजना बनाई है। कांग्रेस ने इसके अतिरिक्त, प्रत्येक निवासी के लिए 25 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा और महिलाओं को 2,500 रुपये मासिक सहायता देने का वादा किया है। इन घोषणाओं के चलते दिल्ली सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि मुफ्त योजनाओं पर भारी खर्च किया जा रहा है। दिल्ली सरकार के वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य को अगले कुछ वर्षों में भारी घाटे का सामना करना पड़ सकता है। अगर इन योजनाओं को पूरे राज्य में लागू किया गया, तो सरकार को इसके लिए और अधिक संसाधन जुटाने की आवश्यकता पड़ेगी।

दिल्ली के अलावा, अन्य राज्यों में भी मुफ्त योजनाओं के बोझ का सामना किया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर, महाराष्ट्र में भाजपा सरकार द्वारा लाड़की बहिन योजना को लेकर वित्तीय संकट का सामना किया जा रहा है। चुनाव से पहले इस योजना के तहत राज्य सरकार ने गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली महिलाओं को 1,500 रुपये प्रति माह देने का वादा किया था। बाद में, इस राशि को बढ़ाकर 2,100 रुपये करने का भी वादा किया गया। इसके लिए सरकार को हर साल लगभग 63,000 करोड़ रुपये चाहिए। पिछले साल के बजट में महाराष्ट्र सरकार ने इस योजना के लिए 46,000 करोड़ रुपये आवंटित किए थे, लेकिन अब राज्य सरकार को इस भारी बोझ को उठाने में कठिनाई हो रही है। राज्य के कृषि मंत्री ने हाल ही में कहा कि लाड़की बहिन योजना के कारण कृषि ऋण माफी योजना को लागू करने में दिक्कत आ रही है।

हिमाचल प्रदेश में भी सुक्खू सरकार ने मुफ्त योजनाओं का वादा किया था। राज्य सरकार ने महिलाओं को 1,500 रुपये और 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का वादा किया था। जब इन योजनाओं को लागू किया गया, तो राज्य की आर्थिक स्थिति बहुत बिगड़ गई। यहां तक कि 1 सितंबर 2024 को राज्य के 2.5 लाख सरकारी कर्मचारियों और 1.5 लाख पेंशनर्स के खातों में न तो सैलरी आई, न ही पेंशन। सरकार ने जरूरी योजनाओं पर खर्च करने में कठिनाई महसूस की और बाद में बिजली सब्सिडी छोड़ने की अपील की। अनुमान है कि 2024-25 में हिमाचल का वित्तीय घाटा 10,784 करोड़ रुपये तक जा सकता है।

झारखंड में भी हेमंत सोरेन सरकार ने मुफ्त योजनाओं के जरिए सत्ता हासिल की थी। यहां मइया सम्मान योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे की महिलाओं को 1,000 रुपये प्रति माह दिए जा रहे थे, जिसे बाद में बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दिया गया। इसके अलावा, राज्य सरकार ने मुफ्त बिजली देने की योजना भी लागू की है। लेकिन इन योजनाओं का बोझ राज्य के खजाने पर बढ़ रहा है। जनवरी 2025 में इस योजना के तहत महिलाओं के खातों में राशि ट्रांसफर करते समय राज्य खजाने पर एक महीने के लिए 1,415 करोड़ रुपये का बोझ पड़ा। यदि यह योजना जारी रहती है, तो राज्य सरकार को सालाना 16,980 करोड़ रुपये का खर्च उठाना पड़ सकता है। इसके अलावा, राज्य सरकार ने केंद्र से 1.36 लाख करोड़ रुपये का फंड मांगा है, जो राज्य को मिलनी वाली कोयला रॉयल्टी का हिस्सा है।

इसका साफ मतलब है कि मुफ्त योजनाओं का बोझ सरकारों के लिए भारी पड़ सकता है। हालांकि, अगर इन योजनाओं को रणनीतिक रूप से लागू किया जाए तो ये नकारात्मक नहीं हो सकती हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि महिलाओं को पेशेवर प्रशिक्षण देने के लिए वित्तीय सहायता दी जाए, तो यह एक सकारात्मक कदम हो सकता है। इसी तरह, बेरोजगारी भत्ते के बजाय मेधावी छात्रों को स्कॉलरशिप देने से समाज में नई प्रतिभा का विकास हो सकता है।

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