Sunday, November 1, 2026
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NATIONAL : सीईसी मामले में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने जताई चिंता: पूछा- नियुक्ति सरकार करेगी तो कैसे रहेगी निष्पक्षता?

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जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन ने निर्वाचन आयोग के कामकाज और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल में 90 लाख मतदाताओं के अधिकार से वंचित होने का भी जिक्र किया। उन्होंने पूछा- जब नियुक्ति सरकार के हाथ में है तो आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता कैसे बचेगी?

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन ने भारत के चुनाव आयोग के कामकाज पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने यह चिंता मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के वोट के अधिकार से वंचित होने के मामले को लेकर जताई।

उन्होंने उन रिपोर्ट्स का भी जिक्र किया, जिनमें कहा गया था कि कई महत्वपूर्ण फैसले मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने लिए। इन फैसलों में बाकी दो निर्वाचन आयुक्तों की आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया।
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जस्टिस नरीमन ने कहा, आप ऐसा निर्वाचन आयोग नहीं रख सकते जो इस तरह काम करे या गलत तरीके से काम करे। उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि पश्चिम बंगाल में 90 लाख मतदाताओं के वोट के अधिकार से वंचित किए जाने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाया।

सरकार के हाथ में नियुक्ति तो स्वतंत्रता कैसे बचेगी?
जस्टिस नरीमन ने निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति की पूरी जिम्मेदारी उस समय की सरकार के हाथ में होने को ‘लाल झंडी’ बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे वोट देने का अधिकार बहुत बड़े खतरे में पड़ गया है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि सुप्रीम कोर्ट को मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम (सीईसी एक्ट) की वैधता पर जल्द से जल्द फैसला करना चाहिए। जस्टिस नरीमन ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच के बंटे हुए फैसले पर भी निराशा जताई।

उन्होंने कहा कि इस वजह से सरकार ऐसी प्रक्रिया के तहत नियुक्तियां जारी रख सकी, जिसमें कार्यपालिका का काफी प्रभाव है। जस्टिस नरीमन राजकोट के राजकुमार कॉलेज में ‘संविधान और आम आदमी’ विषय पर बोल रहे थे।

उन्होंने 2023 के अनूप बरनवाल मामले को याद किया। उन्होंने कहा कि उस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अस्थायी व्यवस्था के तौर पर आदेश दिया था कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति एक समिति करे। इस समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता या सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल किया गया था।

फिर बदली नियुक्ति की व्यवस्था क्यों?
लेकिन इसके तुरंत बाद सरकार ने 2023 में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम बनाया। इस कानून ने मुख्य न्यायाधीश को समिति से हटा दिया। उनकी जगह प्रधानमंत्री की ओर से नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को समिति में शामिल कर दिया गया।

जस्टिस नरीमन ने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त को सिर्फ सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के जज को हटाने के तरीके से ही हटाया जा सकता है। इससे उनका कार्यकाल सुरक्षित रहता है। उन्होंने कहा कि यह उनकी स्वतंत्रता की रक्षा के लिए किया गया उपाय था।

इसके बाद उन्होंने कहा, अगर निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति उस समय की सरकार के हाथ में है, तो उन्हें हटाने की प्रक्रिया उनकी स्वतंत्रता और निष्पक्षता में बहुत ज्यादा योगदान नहीं देती।

दो जजों की राय अलग तो नियुक्तियां कैसे जारी रहीं?
जस्टिस नरीमन ने कहा, अब दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि यह पूरा मामला हाल ही में कोर्ट के सामने आया। दो विद्वान जजों की राय अलग-अलग थी। अब अंतिम स्थिति यह है कि मामला एक बेंच के सामने चला गया है, संभवतः पांच जजों की बेंच के सामने, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह कानून सही है या सही कानून नहीं है। लेकिन इस बीच ये नियुक्तियां अभी भी सिर्फ उस समय की सरकार के हाथ में हैं।

एसआईआर क्यों नहीं रुका?
उन्होंने कहा, अब हमने हाल ही में ऐसा होने का खतरा देखा है। आप सभी ने देखा है कि पश्चिम बंगाल के चुनावों में 90 लाख मतदाताओं को वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिया गया। यह एक हैरान कर देने वाला आंकड़ा है। 90 लाख मतदाताओं का वोट देने का अधिकार छिन जाना भी किसी तरह सुप्रीम कोर्ट को इतना प्रभावित नहीं कर सका कि वह इसे रोक दे।

22 लाख ने अपील की, 93% फैसले पक्ष में क्यों?
उन्होंने कहा, जिन लोगों को वोट देने के अधिकार से वंचित किया गया, उनमें से करीब 22 लाख मतदाताओं ने वास्तव में अपील की। बाकी लोग ऐसे होने चाहिए जिनके पास साधन या न्याय तक पहुंच नहीं है और इन 22 लाख मतदाताओं में से करीब 1 लाख मतदाताओं की अपील पर फैसला हुआ। इनमें 93 प्रतिशत फैसले मतदाताओं के पक्ष में गए।

‘तो आप कल्पना कर सकते हैं कि यह पूरी तरह गैरकानूनी था। आम आदमी, भारत के नागरिक को इस तरह बाहर कर दिया गया, ताकि एक सरकार वह हासिल कर सके जो वह चाहती है’ और पश्चिम बंगाल में हमने देखा कि इसने उस समय की सरकार को हटा दिया और केंद्र की सरकार को लेकर आया। अब, ये बहुत-बहुत परेशान करने वाली चीजें हैं जो आज हमारे देश में हो रही हैं’।

दो आयुक्तों ने आपत्ति की तो अधिकार क्यों नहीं इस्तेमाल किया?
जस्टिस नरीमन ने आगे इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का भी जिक्र किया। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि दो निर्वाचन आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त की ओर से लिए गए कुछ फैसलों पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने सवाल किया कि अगर दोनों सदस्यों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त के फैसले पर आपत्ति थी, तो उन्होंने 2023 के कानून की धारा 18 के तहत अपने अधिकार का इस्तेमाल क्यों नहीं किया। इस धारा के तहत निर्वाचन आयोग में दो-तिहाई बहुमत से लिया गया फैसला लागू हो सकता है।

जस्टिस नरीमन ने कहा, उन्होंने ऐसा नहीं किया, क्योंकि वे भी मौजूदा सरकार द्वारा नियुक्त किए गए थे। तो आज हमारे पास क्या है? आज का अखबार हमें बताता है कि इन तीनों सज्जनों के बीच कुछ समझौता हो गया है। यह देश के लिए बहुत बड़ा नुकसान है। वे एक साझा बयान लेकर सामने आए हैं। इसमें कहा गया है कि हां, आप लोगों ने जो कुछ आपत्तियां उठाई थीं, वे सही लगती हैं। हम पुराने फॉर्म 6 पर वापस जाएंगे, वगैरह-वगैरह..। इसलिए आज हमारे संविधान के तहत आम आदमी और अगर मैं ऐसा कह सकता हूं, संविधान का दिल और लोकतंत्र का दिल, जो वोट देने का अधिकार है, बहुत बड़े खतरे में है।

अब सुप्रीम कोर्ट से क्या उम्मीद?
जस्टिस नरीमन ने कहा कि उन्हें उम्मीद और भरोसा है कि सुप्रीम कोर्ट इस स्थिति के मुताबिक कदम उठाएगा। उन्होंने कहा, मुझे उम्मीद है कि शीर्ष अदालत और वह संस्था तुरंत कदम उठाएगी और इन चीजों को ठीक करेगी, जिसका मैं कभी हिस्सा था। आप ऐसा निर्वाचन आयोग नहीं रख सकते जो इस तरह काम करे या गलत तरीके से काम करे। इसलिए संविधान और आम आदमी के संबंध में पहला अहम रेड फ्लैग निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया है।

NATIONAL : एसआईआर पर उठे सवाल: कांग्रेस बोली- ज्ञानेश कुमार को पद पर रहने का हक नहीं; जज की टिप्पणी का दिया हवाला

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कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर हमला बोला है। पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के जज उज्ज्वल भुइयां की मतदान के अधिकार पर कथित टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार ने पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार खो दिया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा की, जिसमें जस्टिस भुइयां की टिप्पणी का जिक्र था। रमेश ने दावा किया कि यह टिप्पणी दिखाती है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने संविधान की भावना और उसके प्रावधानों का उल्लंघन किया है।

वोटिंग के अधिकार पर जस्टिस भुइयां ने क्या कहा?

जयराम रमेश ने जिस मीडिया रिपोर्ट का हवाला दिया, उसके मुताबिक जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कहा कि अगर किसी प्रक्रिया से लाखों भारतीय नागरिकों का मतदान का अधिकार छिन जाता है और उन्हें अपने ही देश में दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया जाता है, तो ऐसी प्रक्रिया अपने आप में मनमानी है। कांग्रेस नेता ने कहा कि जस्टिस भुइयां ने मजबूती से अपनी राय रखी है कि वोट देने का अधिकार संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा है।

कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार पर क्या आरोप लगाए?

जयराम रमेश ने कहा कि जस्टिस भुइयां की टिप्पणी से यह साबित होता है कि सांविधानिक पद पर बैठे मुख्य चुनाव आयुक्त ने संविधान के प्रावधानों और उसकी भावना, दोनों का उल्लंघन किया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जस्टिस भुइयां की टिप्पणी ने ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

एसआईआर को लेकर पहले से क्यों उठ रहे हैं सवाल?

हाल ही में द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का दावा किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार एसआईआर से जुड़े फैसलों और आदेशों पर आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने इन फैसलों और आदेशों को अपनी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए जाने पर सवाल उठाए थे।

चुनाव आयोग ने इन आपत्तियों पर क्या जवाब दिया?

दो चुनाव आयुक्तों की ओर से कथित तौर पर आपत्तियां उठाए जाने की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने अपना पक्ष रखा। आयोग ने कहा कि किसी भी संस्थान में विचारों और टिप्पणियों में मतभेद होना चर्चा और विचार-विमर्श का हिस्सा है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके सभी आदेशों को पूरा कानूनी समर्थन हासिल है और उन्हें स्थापित वैधानिक प्रक्रियाओं के तहत जारी किया जाता है।

NATIONAL : जस्‍ट‍िस उज्‍जल भुइयां कौन हैं, उन्‍होंने लोगों को वोट‍िंग के अधि‍कार से वंच‍ित करने पर क्‍या कहा

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सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्जल भुइयां ने रविवार को एसआईआर प्रक्रिया पर विवाद की ओर इशारा करते हुए कहा कि वोटिंग अधिकार को कोई छीन नहीं सकता. ऊपर दी गई तस्वीर अक्तूबर 2025 की है जब जस्टिस भुइयां ऑल असम जजेज़ एसोसिएशन के एक कार्यक्रम में बोल रहे थे. (फ़ाइल फ़ोटो) इमेज

इमेज कैप्शन,सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां ने रविवार को एसआईआर प्रक्रिया पर विवाद की ओर इशारा करते हुए कहा कि वोटिंग अधिकार को कोई छीन नहीं सकता. ऊपर दी गई तस्वीर अक्तूबर 2025 की है जब जस्टिस भुइयां ऑल असम जजेज़ एसोसिएशन के एक कार्यक्रम में बोल रहे थे.

वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण ( एसआईआर) को लेकर चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट के जज उज्जल भुइयां ने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत मिले वोटिंग के अधिकार से कोई भी छेड़छाड़ नहीं कर सकता.

जस्टिस भुइयां रविवार को हैदराबाद की नालसर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में आयोजित जस्टिस बोध राज साहनी मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता के समापन समारोह में बोल रहे थे.

इस दौरान उन्होंने कहा कि ऐसी कोई भी प्रक्रिया जो ‘बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित कर दे और वे बगैर वोट देने के अधिकार वाले नागरिक बन जाएं, संविधान का उल्लंघन होगी.’

उन्होंने कहा कि इसे सही ठहराने के लिए दूसरे मामलों का हवाला देना भी उचित नहीं ठहराया जा सकता.

जस्टिस भुइयां ने कहा कि किसी भारतीय नागरिक को उसके मतदान के अधिकार से वंचित करना ‘शरीर से आत्मा निकालने’ जैसा होगा.

उनकी ये टिप्पणी ऐसे समय आई है जब देश भर के कई राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई हैं. विपक्ष का आरोप है कि एसआईआर सही ढंग से नहीं हो रहा है और इसके ज़रिये करोड़ों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं.

पिछले सप्ताह अग्रेज़ी अख़बार ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खोजी रिपोर्ट में कहा गया था कि एसआईआर को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद रहे हैं.

क़ानूनी ख़बरों और विश्लेषण की वेबसाइट बार एंड बेंच के मुताबिक़ हैदराबाद के कार्यक्रम में जस्टिस भुइयां ने कहा, ”अगर किसी प्रक्रिया के कारण लाखों-करोड़ों भारतीय नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित कर दिया जाता है और अपने ही देश में उन्हें दूसरे दर्जे का नागरिक बना दिया जाता है, यानी ऐसा नागरिक जिसके पास वोट देने का अधिकार नहीं है, तो ऐसी प्रक्रिया अपने आप में मनमानी है. दूसरे मामलों का हवाला देकर इसे किसी भी तरह सही नहीं ठहराया जा सकता.”

उन्होंने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 325 कहता है कि लोकसभा या किसी राज्य की विधानसभा के चुनाव के लिए हर क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्र की एक सामान्य मतदाता सूची होगी. किसी व्यक्ति को केवल धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या इनमें से किसी एक के आधार पर उस सूची में शामिल होने से अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता.

उन्होंने कहा, ”संविधान के अनुच्छेद 326 के मुताबिक, लोकसभा और हर राज्य की विधानसभा के चुनाव वयस्क मताधिकार के आधार पर होंगे. यानी भारत का हर नागरिक, जिसकी उम्र 18 साल या उससे अधिक है (28 मार्च 1989 से पहले यह उम्र 21 साल थी) और जो संविधान या संबंधित कानून के तहत गैर-निवास, मानसिक अस्वस्थता, अपराध या भ्रष्ट अथवा अवैध आचरण के आधार पर अयोग्य नहीं ठहराया गया हो, ऐसे चुनाव में मतदाता के रूप में रजिस्टर्ड होने का हकदार होगा.”

डॉ. बीआर आंबेडकर का हवाला देते हुए जस्टिस भुइयां ने कहा, “सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार को सही ठहराते हुए डॉ. आंबेडकर ने कहा था कि चूंकि हमने एक ऐसा अहम फ़ैसला लिया है, जो अतीत को लगभग पूरी तरह बदल देता है, इसलिए संविधान में स्पष्ट रूप से यह बताया जाना बेहतर है कि यही वह आधार है जिसके कारण ड्राफ़्ट संविधान में अनुच्छेद 289ए और 289बी शामिल किए गए, जो अब संविधान के अनुच्छेद 325 और 326 हैं.”

NATIONAL : CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई, SIT जांच और SIR रद्द करने की मांग

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सुप्रीम कोर्ट में आज मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज और SIR को लेकर दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई होगी। याचिकाकर्ताओं ने CEC के खिलाफ जांच, कथित तौर पर बिना सामूहिक सहमति लिए लिए गए फैसलों पर कार्रवाई और देशव्यापी SIR को अवैध घोषित करने की मांग की है।

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच कथित मतभेदों का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट CEC ज्ञानेश कुमार के कामकाज पर सवाल उठाने वाली दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। इन याचिकाओं में उनके और अन्य लोगों के खिलाफ स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) से जांच कराने और मतदाता सूची के स्पेशल इंसेंटिव रिवीजन यानि SIR को गैरकानूनी और असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन जजों की स्पेशल बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी।

10 महीनों में 14 आपत्तियों के खुलासे के बाद मामला कोर्ट पहुंचा
ये याचिकाएं अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट सामने आने के बाद दायर की गईं, जिसमें खुलासा हुआ था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में मतदाता सूची के SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं।

राकेश कुमार सिंह की याचिका में क्या कहा गया है?
पटना के रहने वाले राकेश कुमार सिंह की याचिका में संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग की शक्तियों का मुद्दा उठाया गया है। इसमें तर्क दिया गया है कि चुनाव को नियंत्रित करने का अधिकार किसी एक व्यक्ति के बजाय एक संस्था के तौर पर आयोग के पास होता है। अनुच्छेद 324(2) और 324(3) का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया है कि आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त शामिल होते हैं और CEC इसके अध्यक्ष के तौर पर काम करते हैं।

याचिकाकर्ता का कहना है कि अध्यक्ष का पद संभालना और आयोग की सामूहिक निर्णय लेने की शक्ति का एकतरफा इस्तेमाल करना, दोनों अलग-अलग बातें हैं। याचिका में कहा गया है कि शिकायत सिर्फ इस बात की नहीं है कि CEC ने अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया, बल्कि यह है कि उन्होंने सामूहिक निर्णय लेने की शक्ति को अपने अधिकार के रूप में इस्तेमाल किया, जो याचिकाकर्ता के अनुसार आयोग की है।

SIR को अमान्य घोषित करने की मांग
राकेश कुमार सिंह की याचिका में देश भर में चल रही SIR प्रक्रिया और इसके तहत लिए गए सभी फैसलों, निर्देशों, गाइडलाइंस और कार्रवाइयों को शुरू से ही अमान्य घोषित करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि SIR प्रक्रिया के लिए कोई संवैधानिक या कानूनी आदेश नहीं था और इसे कानून के अनुसार नहीं चलाया गया था।

याचिका में CEC को सस्पेंड करने की भी मांग की गई है। इसके अलावा, याचिकाकर्ता का तर्क है कि CEC को काम करने से रोका जाना चाहिए ताकि अंतिम फैसला आने तक कमीशन का मल्टी मेंबर स्वरूप बना रहे।

SIT जांच की मांग
दिल्ली के वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने एक अलग याचिका दायर की है। इसमें या तो एक स्वतंत्र उच्चस्तरीय न्यायिक जांच आयोग या सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाली स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाने की मांग की गई है।

याचिका में चुनाव आयोग के अंदर कथित आंतरिक मतभेद और अनियमितताओं को एक गंभीर संवैधानिक मुद्दा बताया गया है। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य अधिकारियों के खिलाफ कथित कानूनी उल्लंघनों के लिए जांच और आपराधिक कार्रवाई की भी मांग की गई है। इसके अलावा, याचिका में तर्क दिया गया है कि संबंधित कार्य आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के लिए दी गई छूट के दायरे में नहीं आते हैं और इसमें शामिल व्यक्तियों को व्यक्तिगत रूप से आपराधिक रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

NATIONAL : शिवाजी पार्क प्रदर्शन: सीजेपी आयोजकों समेत 400-500 अज्ञात लोगों पर एफआईआर, आदित्य ठाकरे बोले- लोकतंत्र की आवाज

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मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क में 2 अक्तूबर को हुए कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन को लेकर आयोजकों और 400-500 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के मुताबिक, मामला अवैध रूप से भीड़ जुटाने, सरकारी अधिकारी के वैध आदेश की जानबूझकर अवहेलना करने समेत अन्य धाराओं में दर्ज किया गया है। शिवाजी पार्क थाने के एक अधिकारी ने बताया कि इलाके के एक निवासी की शिकायत के आधार पर यह मामला दर्ज किया गया। मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है और जांच जारी है।

अभिजीत दीपके के नेतृत्व में हुआ था प्रदर्शन
सीजेपी ने अपने संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में शुक्रवार को शिवाजी पार्क में बड़ा प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी। संगठन ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया है। इस प्रदर्शन को शिवसेना (यूबीटी) का भी समर्थन मिला था।

मुंबई पुलिस समेत इन्हें मिला एनएचआरसी का नोटिस
इस प्रदर्शन में नाबालिगों को कथित तौर पर शामिल करने, उन्हें पुलिस कार्रवाई से बचाव के लिए इस्तेमाल करने और उनकी तस्वीरें-वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने की शिकायतों पर एनएचआरसी ने संज्ञान लिया है। आयोग ने मुंबई पुलिस, एमईआईटीवाई, एक्स और महाराष्ट्र के महिला एवं बाल विकास विभाग को नोटिस देकर एक सप्ताह में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।

आदित्य ठाकरे ने प्रदर्शन का किया समर्थन
इस बीच शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने प्रदर्शन का समर्थन करते हुए इसे देश में जागरूकता की शुरुआत बताया। सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र को बचाने के लिए शुरू हुए आंदोलन की शुरुआत है। आदित्य ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 10 वर्षों में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठे हैं और विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग पर सवाल उठाए जाने के बीच भाजपा ही इस मुद्दे पर असहज नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि देशभर में विरोध और सवाल उठाने की आवाजें जारी रहेंगी। वहीं, पुलिस ने प्रदर्शन के संबंध में मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

NATIONAL : ‘गणेश विसर्जन खत्म, अब ज्ञानेश कुमार का विसर्जन बाकी’: प्रकाश राज ने एसआईआर पर उठाए सवाल; भाजपा ने क्या कहा?

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प्रकाश राज ने एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए और सीईसी ज्ञानेश कुमार पर टिप्पणी की। उन्होंने मतदाता सूची से हटाए गए नामों और 38 लाख लंबित अपीलों का भी जिक्र किया। उनके बयान पर भाजपा ने आपत्ति जताई। किसने क्या कहा, पढ़िए इस रिपोर्ट में।

अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज ने शनिवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गणेश चतुर्थी के दौरान होने वाला गणेश मूर्तियों का विसर्जन खत्म हो गया है। अब मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार का ‘विसर्जन’ बाकी है।

प्रकाश राज ने पश्चिम बंगाल से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स का जिक्र किया। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि मतदाता सूची से हटाए गए लोगों ने नाम वापस जोड़ने के लिए 38 लाख अपील की हैं। ये अपीलें ट्रिब्यूनल के सामने लंबित हैं। इन्हें तय करने में 10 से 12 साल लग सकते हैं।प्रकाश राज ने सवाल किया कि इतनी बड़ी संख्या में लोग क्या 10 से 12 साल तक इंतजार करेंगे? उन्होंने पत्रकारों से कहा, कर्नाटक, आंध्र और पूरे भारत में गणेश विसर्जन खत्म हो गया है। अब ज्ञानेश कुमार का विसर्जन बाकी है।

प्रकाश राज ने कहा कि एसआईआर शुरू होने के समय इसे मतदाता सूची की सफाई की प्रक्रिया बताया गया था। लेकिन अब उनके अनुसार यह नाम जोड़ने की प्रक्रिया नहीं रह गई है। यह नाम हटाने की प्रक्रिया बन गई है। उन्होंने कहा कि चुनाव सिर्फ आंकड़ों का नाम नहीं है। चुनाव इस देश के उन नागरिकों से जुड़े हैं, जो जिंदा हैं।

प्रकाश राज ने बताया कि उन्होंने 10 दिन तक अलग-अलग जिलों का दौरा किया। उन्होंने वहां लोगों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि लोगों ने उन्हें बताया कि उनके नाम मतदाता सूची से ‘हटा दिए गए’। इसकी वजह यह थी कि जब बूथ लेवल अधिकारी यानी बीएलओ उनके घर पहुंचे, तब वे घर पर नहीं थे।

उन्होंने आरोप लगाया कि काम के लिए दूसरी जगह गए दिहाड़ी मजदूरों के नाम भी मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ‘मन की बात’ करते हैं। क्या उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया के बारे में लोगों को पहले से बताया था? प्रकाश राज ने कहा, हमारी मांग है कि एसआईआर को रोका जाए और इसे पूरी तरह खत्म किया जाए।

प्रकाश राज की टिप्पणी पर भाजपा ने क्या कहा?
इस बीच, तेलंगाना भाजपा के मुख्य प्रवक्ता एनवी सुभाष ने प्रकाश राज के बयान की आलोचना की। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ की गई टिप्पणी को ‘अपमानजनक’ बताया। उन्होंने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त एक सांविधानिक संस्था के प्रमुख हैं।

सुभाष ने एक बयान में कहा कि प्रकाश राज को निर्वाचन आयोग की आलोचना करने का अधिकार हो सकता है। लेकिन सीईसी की तुलना मूर्ति विसर्जन से करना राजनीतिक आलोचना की सीमा पार करता है। उनके अनुसार, यह एक सांविधानिक संस्था के प्रति अनादर है।

सुभाष ने कहा कि लोकतंत्र में बहस होनी चाहिए। किसी का मजाक नहीं उड़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर प्रकाश राज को एसआईआर प्रक्रिया पर आपत्ति है, तो वह उचित मंच के सामने तथ्य और सबूत रख सकते हैं। इसके बजाय ‘भड़काऊ सड़कछाप बयानबाजी’ का सहारा नहीं लेना चाहिए।

सीईसी के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन
इस बीच, शनिवार को तेलंगाना पीपुल्स फ्रंट, कॉकरोच जनता पार्टी और दूसरे संगठनों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन हैदराबाद में आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारियों ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया को खत्म करने की मांग भी की। इसके साथ ही उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम 2023 को रद्द करने की मांग की।

प्रदर्शनकारियों ने कई पोस्टर भी दिखाए। इन पोस्टरों पर लिखा था- ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो (ज्ञानेश, अब काम खत्म है भाई!)!एक पोस्टर पर लिखा था- ‘ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना चाहिए’। इसके अलावा पोस्टरों पर ‘लोकतंत्र बचाओ’ जैसे संदेश भी लिखे थे।

NATIONAL : CJP के 2 अक्टूबर आंदोलन के बाद मुंबई में एक और मोर्चा, ठाकरे बंधुओं ने किया ऐलान

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महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP ने 2 अक्टूबर से आंदोलन का ऐलान किया है. सीजेपी के इस आंदोलन के बीच शिवसेना (उद्धव बाला साहेब ठाकरे) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) चीफ राज ठाकरे ने बड़ी घोषणा की है. दोनों नेताओं की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस राज ठाकरे के मुंबई स्थित निवास ‘शिवतीर्थ’ पर हुई, जिसमें चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों और 4 अक्टूबर को प्रस्तावित आंदोलन की जानकारी दी गई.

दोनों ने चार अक्टूबर को एक और मोर्चे का ऐलान किया है. दोनों की साझा प्रेस वार्ता में कहा गया कि 4 अक्टूबर को सुबह 10 बजे भायखला से मोर्चा शुरू होगा और बीएमसी के सामने पहुंचेगा.

उद्धव ठाकरे ने कहा कि 2 अक्टूबर को सीजेपी की ओर से होने वाले आंदोलन को उनका पूरा समर्थन है. उन्होंने कहा कि इससे पहले जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन को भी उन्होंने समर्थन दिया था. उद्धव ठाकरे ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर इंडिया गठबंधन की बैठक 30 सितंबर को होगी, जिसमें इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी.

राज ठाकरे ने कहा कि यह अब तक हुए अपमान का विषय है. उनके मुताबिक मतदाताओं के मत का अपमान हुआ है और इसी मुद्दे को लेकर आंदोलन किया जा रहा है.

इससे पहले शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कहा कि एसआईआर के खिलाफ होने वाले आंदोलन में सभी पार्टियों को शामिल होने का निमंत्रण दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि भ्रष्ट चुनाव अधिकारी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पहला यलगार मुंबई से होगा और पहला मोर्चा राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में निकलेगा.

राउत ने बताया मोर्चे का प्लान
संजय राउत ने बताया कि 4 अक्टूबर को सुबह 10 बजे भायखला से मोर्चा शुरू होगा और बीएमसी के सामने पहुंचेगा. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग और ईवीएम को लेकर पहले भी कई बार बात हो चुकी है, लेकिन 4 अक्टूबर को इस मुद्दे पर विस्तार से बात की जाएगी. मोर्चे के बाद आगे की भूमिका तय की जाएगी. उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को फोन कर मोर्चे में शामिल होने का निमंत्रण दिया जाएगा और सत्ता पक्ष के लोग भी चाहें तो इसमें शामिल हो सकते हैं.

राउत ने कहा कि इस मोर्चे में किसी राजनीतिक पार्टी का झंडा नहीं होगा, बल्कि सभी के हाथ में सिर्फ तिरंगा होगा. यह किसी राजनीतिक पार्टी का मोर्चा नहीं, बल्कि देश के संविधान को बचाने के लिए निकाला जा रहा मोर्चा है. उन्होंने कहा कि इसमें कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है और सभी अपने-अपने स्तर पर विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं. चुनाव आयोग के खिलाफ बोलने पर बीजेपी को आपत्ति क्यों हो रही है, इस सवाल पर राउत ने कहा, ‘चोर की दाढ़ी में तिनका.’

राहुल सांकृत्यायन, abp live में बतौर डिप्टी न्यूज़ एडिटर कार्यरत हैं और स्टेट्स टीम का नेतृत्व कर रहे हैं. राहुल राजनीति, शासन-प्रशासन और समकालीन विषयों की खबरों की कवरेज और खबरों एवं घटनाक्रमों के संपादकीय समन्वय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.

पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव रखने वाले राहुल ने अपने करियर की शुरुआत में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और फीचर डेस्क पर भी काम किया है. उनकी विशेष रुचि राजनीतिक खबरों, अपराध से जुड़े मामलों और राज्यों की समकालीन राजनीतिक गतिविधियों की कवरेज में रही है.

राहुल इससे पहले न्यूज़18 हिन्दी, वनइंडिया हिन्दी और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज और स्टेट्स कवरेज में महत्वपूर्ण अनुभव हासिल किया.

NATIONAL : सड़क नहीं मिली तो बीमार बच्चे को कपड़े की पोटली में बांधा, 3 KM पैदल चले परिजन, रीवा के जवा का वीडियो वायरल

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रीवा जिले के जवा में बारिश के कारण सड़क खराब हो गई थी। बीमार बच्चे को अस्पताल ले जाने के लिए परिजन 3 किलोमीटर पैदल चले। खराब रास्ते के कारण वाहन गांव तक नहीं पहुंच सका था। परिजनों ने बच्चे को कपड़े की पोटली में बांधकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया। वहां से बच्चे को मोटरसाइकिल से अस्पताल ले जाया गया।

रीवा: मध्य प्रदेश के रीवा जिले में बारिश के बीच ग्रामीण इलाकों की बदहाल सड़क और संपर्क व्यवस्था की तस्वीर सामने आई है। जवा जनपद पंचायत क्षेत्र की ग्राम पंचायत कोनीकलां के पौखरी टोला में एक बीमार बच्चे को अस्पताल पहुंचाने के लिए परिजनों को करीब 2 से 3 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा। रास्ता खराब होने के कारण वाहन गांव तक नहीं पहुंच सका। मजबूर परिजनों ने बच्चे को कपड़े की पोटली में बांधा और कंधे पर उठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचे। इसके बाद बच्चे को बाइक से अस्पताल ले जाया गया।

बारिश के बाद सड़क का हिस्सा नहर में समाया
बताया जा रहा है कि लगातार बारिश के बाद मिनी बाणसागर नहर का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर सड़क में समा गया। इससे कोनीकलां पंचायत के पौखरी टोला समेत आसपास के इलाकों में आवागमन प्रभावित हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि रास्ते पर पानी और कीचड़ के कारण चार पहिया वाहन तो दूर, कई जगह दोपहिया वाहन से निकलना भी मुश्किल हो गया है।

बीमार बच्चे को पोटली में बांधकर ले गए परिजन
पौखरी टोला निवासी मिथलेश केवट के करीब 10 से 12 वर्षीय भाई की तबीयत बिगड़ने के बाद परिजन उसे अस्पताल ले जाने के लिए निकले। लेकिन गांव तक वाहन पहुंचने का रास्ता नहीं था। ऐसे में परिजनों ने बच्चे को कपड़े में बांधा और कंधे पर उठाकर करीब 2 से 3 किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचे। वहां से मोटरसाइकिल के जरिए बच्चे को अस्पताल ले जाया गया।

इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। वीडियो में परिजन बारिश और खराब रास्ते के बीच बच्चे को लेकर पैदल जाते दिखाई दे रहे हैं।

6-7 हजार की आबादी, बारिश में कट जाता है संपर्क
ग्रामीणों के मुताबिक, कोनीकलां ग्राम पंचायत की आबादी करीब 6 से 7 हजार है। बारिश के मौसम में पंचायत के कई टोले जलभराव और खराब रास्तों के कारण मुख्य मार्ग से कट जाते हैं। इसका सबसे ज्यादा असर मरीजों, बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ता है। ग्रामीणों ने वीडियो के जरिए प्रशासन का ध्यान इस समस्या की ओर खींचते हुए गांव तक सुरक्षित सड़क और आवागमन की स्थायी व्यवस्था कराने की मांग की है।

NATIONAL : शुभेंदु अधिकारी ने दिखाया ममता बनर्जी के इलाज वाला पर्चा, फर्जी दावे का आरोप, अब तो जांच होगीपश्चिम बंगाल की नंदीग्राम सीट पर उपचुनाव से पहले

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पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम सीट पर 6 अक्तूबर को उपचुनाव होने वाले हैं. लेकिन इससे पहले आरोप-प्रत्यारोप की सियासत जारी है. उपचुनाव से पहले बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी पर निशाना साधा है. उन्होंने दावा किया है कि पांच साल पहले बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान पूर्वी मेदिनीपुर के नंदीग्राम में ममता बनर्जी ने पैर में चोट लगने का झूठा प्रचार किया था. इसके लिए सीएम शुभेंदु ने अस्पताल के कागजात भी सबूत के तौर पर पेश किया.

सीएम शुभेंदु ने कहा कि राज्य सरकार ममता के इस ‘झूठे प्रचार’ की जांच शुरू करेगी. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उपचुनाव खत्म होने के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई के बारे में बताया जाएगा.

अधिकारी ने सबसे पहले शुक्रवार को नंदीग्राम में चुनाव प्रचार के दौरान इस बारे में बात की. इसके अगले दिन अधिकारी ने नबन्ना में राज्य सचिवालय में एक ऑफिशियल प्रेस कॉन्फ्रेंस की. जब वह SSKM अस्पताल की 11 मार्च 2021 की रिपोर्ट का हवाला दे रहे थे, तो मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने 2020 के चुनाव के वक्त चोट लगने को लेकर झूठ बोला था.

‘फ्रैक्चर के कोई सबूत नहीं’
सीएम शुभेंदु ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बांगुर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेस का एक डॉक्यूमेंट सामने रखा. उन्होंने कहा, “इस घटना से नंदीग्राम के लोगों का अपमान हुआ है. इस डॉक्यूमेंट पर एक नज़र डालें. ‘फ्रैक्चर या डिसलोकेशन का कोई सबूत नहीं.”

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मुख्यमंत्री ने पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी के खिलाफ CID की जांच का भी संकेत दिया है. उन्होंने कहा, “चुनाव आचार संहिता खत्म होने के बाद, CID जांच जारी रहेगी. अगर कोई घटना होती है, तो पुलिस या CID जांच कर सकती है. लेकिन अगर कोई फेक कैंपेन चलाता है, नंदीग्राम के लोगों का अपमान करता है, मीडिया ट्रायल करता है और बंगाल के लोगों को गुमराह करता है तो उनके खिलाफ BNS के तहत कार्रवाई की जाएगी.”

2021 में क्या हुआ था?
2021 के विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी के पैर में अचानक फ्रैक्चर हो गया था. इससे उन्हें चुनाव के आखिर तक व्हीलचेयर पर रहना पड़ा था. माना जाता है कि उनके फ्रैक्चर ने उनकी पार्टी को राज्य भर के वोटरों से भारी सहानुभूति दिलाने में मदद की थी. जब BJP ने TMC के खिलाफ अपनी पूरी ताकत लगा दी थी, फिर भी नंदीग्राम चुनाव में ममता बनर्जी ने भारी बहुमत से बंगाल जीता था.

NATIONAL : ‘आरोपी पायलट ने पहले नमाज पढ़ी, फिर पीछे से कर दिया वार’, फ्लाईदुबई के हीरो स्मित मच्छर ने घटना का किया खुलासा

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फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मच्छर, जिन्होंने इजरायल जा रही उड़ान में कॉकपिट पर कब्जा करने की कथित कोशिश को नाकाम किया, स्मित मच्छर ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को घटना का विस्तार से ब्योरा दिया है।

गंभीर रूप से घायल मच्छर ने बताया कि उड़ान शुरू में सामान्य थी। को-पायलट नमाज पढ़ने लगे, जो स्थानीय लोगों में आम बात है। सम्मान में वे आगे देख रहे थे।करीब चार-पांच मिनट बाद अचानक सिर के पीछे जोरदार वार हुआ। मच्छर ने नेतन्याहू को बताया कि मेरा पहला ख्याल था कि विमान को कोई बड़ी क्षति पहुंची है। लेकिन वार लगातार होते रहे। तब समझ आया कि यह विमान नहीं, बल्कि कॉकपिट में मौजूद दूसरा व्यक्ति है।

उन्होंने याद करते हुए कहा कि मेरी याददाश्त टुकड़ों में है। मैंने एक बार दरवाजा खोला, लेकिन उन्होंने फिर बंद कर दिया। मैं कॉकपिट के फर्श पर लेटा था। विमान की आवाज और लोगों की चीखें सुनाई दे रही थीं। उसी पल उन्हें लगा कि यह आखिरी मौका है।

आगे बोले कि मेरे अंदर आखिरी लड़ाई बाकी थी। चाहे व्यक्तिगत हो या यात्रियों के लिए, मैंने सब कुछ झोंक दिया और दरवाजा खोला। बाहर लोग तैयार थे, जिन्होंने कंट्रोल संभाला।

बुधवार को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई फ्लाइट एफजेड1073 ने इमरजेंसी सिग्नल भेजे और 17,000 फीट से ज्यादा तेजी से नीचे गिरी। विमान में 174 यात्री थे, जिनमें 27 बच्चे शामिल। इसे सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर उतारा गया। सोशल मीडिया पर खून से लथपथ मच्छर का वीडियो वायरल हुआ।

यूएई जांच एजेंसियों ने इसे आतंकी कृत्य बताया है। को-पायलट हमाम अल-हम्मामी (ओमानी नागरिक) पर क्रैश कुल्हाड़ी से हमला करने और विमान का नियंत्रण लेने की कोशिश का आरोप है। रिपोर्ट्स में कहा गया कि उन्हें पहले कट्टर विचारों के कारण ओमान में उड़ान से प्रतिबंधित किया जा चुका था।मुंबई के घाटकोपर मूल के मच्छर के पास 13 साल से ज्यादा अनुभव और 9,500 से अधिक उड़ान घंटे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें फोन कर बहादुरी की सराहना की। मच्छर वर्तमान में अस्पताल में रिकवर कर रहे हैं। उनकी हिम्मत ने सभी 174 यात्रियों की जान बचाई।

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