Monday, November 2, 2026
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ENTERTAINMENT : दीपिका पादुकोण-रणवीर सिंह के घर आई लक्ष्मी, दूसरी बार पेरेंट्स बना कपल

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दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह ने फैंस को गुड न्यूज दी है. कपल फिर से पेरेंट्स बन गया है. दीपिका ने बेटी को जन्म दिया है. कपल ने खुद इस खुशखबरी को सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करके फैंस को दी है.

दीपिका पादुकोण अपनी प्रेग्नेंसी को लेकर चर्चा में थीं. वो दूसरी मां बनने वाली थीं. ऐसे में अब एक्ट्रेस और रणवीर सिंह ने खुद फैंस को गुड न्यूज दी है. उनके घर पर एक बार फिर से किलकारी गूंज उठी है. दीपिका ने नन्ही परी को जन्म दिया है. बेटी दुआ के बाद कपल के घर फिर से लक्ष्मी आई है, जिसके बाद सोशल मीडिया पर बधाइयों का तांता लग गया है.

दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह ने खुद दूसरी बार पेरेंट्स बनने की खबर को कंफर्म किया है. उन्होंने इंस्टाग्राम पर पोस्ट शेयर की है, जिसमें बेटी के पैर का निशान छपा है. इसे साझा करने के साथ ही कपल ने जानकारी दी है कि उनके घर पर नन्ही परी आई है, जिसके बाद सोशल मीडिया पर लोग उन्हें खूब बधाइयां दे रहे हैं.

आपको बता दें कि इसके एक दिन पहले ही दीपिका और रणवीर सिंह को सिद्धिविनायक मंदिर में स्पॉट किया गया था. कपल गणपति बप्पा का आशीर्वाद लेने के लिए पहुंचा था और इस दौरान दोनों अपने लुक को लेकर काफी चर्चा में थे. दीपिका को लेकर रणवीर काफी केयरी दिखे थे. अब बप्पा के आशीर्वाद के बाद ही रणवीर सिंह और दीपिका ने बेटी का घर में वेलकम किया है.

आपको बता दें कि दीपिका और रणवीर सिंह ने अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी की अनाउंसमेंट 19 अप्रैल, 2026 को किया था. उन्होंने इंस्टाग्राम पर पोस्ट शेयर करके दूसरी प्रेग्नेंसी का ऐलान किया था. दीपिका और रणवीर सिंह ने हाल ही में बेटी दुआ का जन्मदिन भी सेलिब्रेट किया था और उनका चेहरा भी रिवील किया था. दीपिका और रणवीर ने 14-15 नवंबर, 2018 को शादी की थी और इसके बाद उन्होंने 8 सितंबर 2024 को बेटी दुआ का वेलकम किया था. अब 19 सितंबर को कपल ने दूसरी बेटी का वेलकम किया है.

दीपिका पादुकोण-रणवीर सिंह का प्रोफेशनल फ्रंट

बहरहाल, अगर दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह के प्रोफेशनल फ्रंट के बारे में बात की जाए तो एक्ट्रेस अपकमिंग फिल्म ‘किंग’ में नजर आने वाली हैं. इसमें वो शाहरुख खान के साथ स्क्रीन शेयर करते हुए नजर आएंगीं. फिल्म को क्रिसमस 2026 के मौके पर रिलीज किया जाएगा. वहीं, रणवीर सिंह को आखिरी बार फिल्म ‘धुरंधर 2’ में देखा गया था. इसने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ 1800 करोड़ से ज्यादा वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था.

NATIONAL : DUSU चुनाव में ABVP का दबदबा, सेंट्रल पैनल के 3 पद जीते, निर्दलीय दीपांशु शोकीन बने उपाध्यक्ष

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RSS से जुड़ी ABVP ने दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (DUSU) के हाई-प्रोफाइल चुनाव में सेंट्रल पैनल के चार में से तीन पद जीते, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शोकीन – जिन्हें NSUI का टिकट नहीं मिला था उन्होंने ने उपाध्यक्ष के पद पर शानदार जीत…

नई दिल्ली: RSS से जुड़ी ABVP ने दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (DUSU) के हाई-प्रोफाइल चुनाव में सेंट्रल पैनल के चार में से तीन पद जीते, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शोकीन – जिन्हें NSUI का टिकट नहीं मिला था उन्होंने ने उपाध्यक्ष के पद पर शानदार जीत दर्ज की है। कांग्रेस की नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ़ इंडिया (NSUI) को कोई सीट नहीं मिली, हालांकि उसके उम्मीदवार अध्यक्ष और संयुक्त सचिव के पद बहुत कम अंतर से हारे। NSUI के प्रदर्शन पर उसके बागी उम्मीदवार दीपांशु शोकीन का भी असर पड़ा, जिन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और 13,700 से ज़्यादा वोटों के बड़े अंतर से उपाध्यक्ष का पद हासिल किया। NSUI सेंट्रल पैनल के चार में से कोई भी पद नहीं जीत पाई, जबकि ABVP ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पद जीते।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने शानदार जीत दर्ज की और उसके उम्मीदवार यश डबास ने अध्यक्ष का पद हासिल किया। यह जीत ऐसे समय में मिली जब हाल के महीनों में जंतर-मंतर पर Gen Z के विरोध-प्रदर्शन और सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना (जिसमें DU के पांच छात्रों की मौत हो गई थी) को लेकर युवाओं में काफी हलचल थी। अध्यक्ष पद की दौड़ में डबास को 24,576 वोट मिले और उन्होंने NSUI के विजय शंकर मीणा को 2,053 वोटों के अंतर से हराया।

आप को बता दें कि अ NSUI का टिकट न मिलने के बाद भी वे विजयी रहे। संयुक्त सचिव पद के लिए, ABVP के उम्मीदवार को 16,615 वोट मिले, जबकि समाजवादी छात्र सभा के उम्मीदवार को 15,778 वोट मिले। सचिव पद की दौड़ में, ABVP उम्मीदवार को 21,650 वोट मिले, जबकि NSUI उम्मीदवार को 14,869 वोट मिले। ABVP ने प्रेसिडेंट, सेक्रेटरी और जॉइंट सेक्रेटरी के पद फिर से हासिल कर लिए, जो उसने 2025 में भी जीते थे। NSUI, जिसने पिछले साल वाइस प्रेसिडेंट का पद जीता था, इस बार एक भी पद नहीं जीत पाई।

शौकीन और विशेष यादव समेत निर्दलीय उम्मीदवारों ने ज़बरदस्त टक्कर दी। उन्होंने ABVP और NSUI, दोनों के काफ़ी वोट काटकर नतीजों पर असर डाला। शौकीन ने ABVP के इशू मौर्य और NSUI के वीर छत्रथ, दोनों को बड़े अंतर से हराया, वहीं समाजवादी छात्र सभा (SCS) के यादव को जॉइंट सेक्रेटरी पद के मुक़ाबले में 15,778 वोट मिले। ABVP के लक्ष्य राज सिंह ने 16,615 वोट पाकर जॉइंट सेक्रेटरी का पद जीता, जबकि NSUI उम्मीदवार गोपाल चौधरी को 15,206 वोट मिले और वे मुक़ाबले में तीसरे स्थान पर रहे।

WORLD : 100% टैरिफ वाले बिल पर डोनाल्ड ट्रंप ने किए साइन, रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अब होगा एक्शन!

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ट्रंप ने रूस और ईरान पर नए प्रतिबंध वाले कानून पर दस्तखत किए हैं. रूस से तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ का प्रावधान है, भारत-चीन पर भी असर पड़ सकता है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 पर दस्तखत कर इसे कानून बना दिया है. इस कानून के तहत रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे. साथ ही, रूस से तेल और गैस खरीदने वाले बड़े देशों पर भी भारी टैरिफ यानी आयात शुल्क लगाने का रास्ता साफ किया गया है. इनमें चीन और भारत भी शामिल हैं. अमेरिका फिलहाल भारत पर 18% और चीन पर 34% टैरिफ लगाता है. व्हाइट हाउस के मुताबिक, ट्रंप ने 18 सितंबर 2026 को H.R. 5334, यानी लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 पर दस्तखत किए. यह कानून रूस और ईरान के खिलाफ मौजूदा प्रतिबंधों को आगे बढ़ाता है. इसमें रूस के खिलाफ वैधानिक प्रतिबंध, टैरिफ और दूसरी पाबंदियों का विस्तार किया गया है.

कानून के तहत ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया गया है. यह कानून राष्ट्रपति के दस्तखत के 30 दिन के भीतर प्रभावी होगा. इसके तहत उन देशों से आने वाले सामान पर 100% तक शुल्क लगाया जा सकता है, जो कानून बनने से पहले के 12 महीनों में कुल मात्रा के आधार पर रूस के कच्चे तेल या नेचुरल गैस के टॉप-5 खरीदारों में शामिल रहे हैं. हालांकि, कानून ट्रंप को इसके अमल को लेकर काफी अधिकार देता है. वह तय कर सकते हैं कि किन देशों पर टैरिफ लगाया जाए, टैरिफ की दर कितनी हो और प्रतिबंधों के प्रावधानों में छूट दी जाए या नहीं.

किन 5 देशों पर कार्रवाई का खतरा?
भारत 40% से ज्यादा क्रूड ऑयल रूस से खरीद रहा है. इसलिए उस पर टैरिफ का खतरा है. भारत के अलावा रूस से ज्यादा कच्चा तेल खरीदने वाले 5 देशों की अमेरिकी लिस्ट में चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं. इससे पहले अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने बुधवार को यह कानून पास किया था. प्रस्ताव को 214-211 वोटों के अंतर से मंजूरी मिली थी. कानून में रूस के नेतृत्व और उसके ऊर्जा क्षेत्र को निशाना बनाया गया है. इसके अलावा मॉस्को के रक्षा उद्योग से जुड़े सहयोगियों और रूस की कथित शैडो फ्लीट पर भी कार्रवाई का प्रावधान है.

किस देश को मिलेगी छूट?
रूस से गैस खरीदने वाले किसी देश को शुल्क से छूट मिल सकती है. इसके लिए जरूरी है कि संबंधित अवधि में उस देश का रूसी गैस आयात रूस के कुल गैस निर्यात का 15% से कम हो और उसने रूसी गैस आयात कम करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हों. कानून रूस की शैडो फ्लीट और रूसी ऊर्जा उत्पादन या प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले विदेशी लोगों को भी निशाना बनाता है. इसमें जहाजों के मालिक, ऑपरेटर, मैनेजर, बीमाकर्ता और अन्य संबंधित पक्ष शामिल हैं.

BUSINESS : त्योहारों से पहले वापस लौटेगी चीनी की मिठास, जमाखोरी रोकने और आयात बढ़ाने के लिए सरकार का बड़ा एक्शन

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Sugar Price : सरकार ने देश में चीनी की बढ़ती कीमतों पर लगाम कसने के लिए कई कदम उठाए हैं. इसके लिए कारोबारियों की स्टॉक लिमिट तय की गई है. साथ ही बाहर से चीनी आयात करने का भी प्लान है. इतना ही नहीं, सरकार इस बार पेराई सत्र जल्दी शुरू करने की भी तैयारी कर रही है.

नई दिल्ली. देश के कई शहरों में चीनी के भाव 70 रुपये किलोग्राम तक पहुंच गए हैं. अब चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार ने कई बड़े कदम उठाए हैं. पिछले एक महीने में चीनी के औसत दाम करीब 48.18 से बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो हो गए हैं. सरकार का कहना है कि त्योहारों के सीजन में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को काबू में रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है.

सरकार ने साफ किया है कि चीनी के दाम बढ़ने की वजह एथनॉल के लिए चीनी का इस्तेमाल बढ़ना नहीं है. एथनॉल के लिए चीनी डायवर्ट करने की हिस्सेदारी 2022-23 में करीब 12% से घटकर 2025-26 में 9% रह गई है. सरकार के मुताबिक, इस बार चीनी का उत्पादन अनुमान से कम रहा है. गन्ने की फसल में रेड रॉट और टॉप बोरर बीमारी, ज्यादा बारिश और जलभराव से नुकसान हुआ है. इसके साथ ही त्योहारों से पहले मांग बढ़ी है और कुछ जगहों पर जमाखोरी व सट्टेबाजी ने भी कीमतों पर असर डाला है.

अनुमान से कम रहा उत्पादन
इस सीजन में चीनी का उत्पादन करीब 306 लाख टन (LMT) रहने का अनुमान है, जबकि राज्यों ने शुरुआत में करीब 343 LMT उत्पादन का अनुमान लगाया था. सरकार का कहना है कि देश में इतना चीनी स्टॉक मौजूद है कि अक्टूबर में नया पेराई सीजन शुरू होने तक घरेलू मांग पूरी की जा सकती है. हालांकि, चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. दुनिया में भी चीनी की सप्लाई प्रभावित हुई है. 2026-27 में वैश्विक स्तर पर करीब 33 LMT चीनी की कमी का अनुमान है. इस वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमत 30 जून को 474 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 20 अगस्त को 552 डॉलर प्रति टन हो गई है. इसका मतलब है कि दो महीने में ही कीमत में 16% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है.

सरकार के मुताबिक, भारत में सामान्य तौर पर हर साल 320-340 LMT चीनी का उत्पादन होता है, जबकि घरेलू खपत करीब 280-290 LMT है. ज्यादा उत्पादन होने पर चीनी का स्टॉक बढ़ जाता है और मिलों का पैसा फंस जाता है, जिससे किसानों को गन्ने का भुगतान भी प्रभावित हो सकता है. ऐसे में अतिरिक्त चीनी से एथेनॉल बनाने की नीति से चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है. इसका असर यह है कि 20 अगस्त 2026 तक 2025-26 सीजन के गन्ना बकाये का 97% भुगतान किसानों को किया जा चुका है.

जमाखोरी रोकने के लिए सरकार के बड़े कदम
1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक चीनी कारोबारियों के लिए 400 टन की स्टॉक लिमिट लागू की गई है.
1 सितंबर से बड़े खरीदार 15 दिन की खपत से ज्यादा चीनी स्टॉक नहीं रख सकेंगे.
केंद्र और राज्य सरकार की टीमें चीनी मिलों में जाकर स्टॉक की जांच कर रही हैं.
घरेलू सप्लाई बढ़ाने के लिए 10 LMT कच्ची चीनी के ड्यूटी फ्री आयात की अनुमति दी गई है.
राज्यों और चीनी मिलों से 15 अक्टूबर से गन्ने की पेराई शुरू करने के लिए कहा गया है.
सरकार का अनुमान है कि अक्टूबर में चीनी का उत्पादन सामान्य 3-4 LMT से बढ़कर 10 LMT से ज्यादा हो सकता है.
सरकार उपभोक्ताओं और गन्ना किसानों दोनों के हितों का ध्यान रखेगी और चीनी के दाम, स्टॉक और बाजार की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाएगी.

NATIONAL : 6 साल में साइबर क्राइम की 54 लाख शिकायतें, FIR सिर्फ 2.4 प्रतिशत पर

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दिल्ली। देश में साइबर अपराध की शिकायतें तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन इनके मामलों में एफआईआर दर्ज होने की दर बेहद कम है। 2019 से 2024 के बीच छह साल में नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर करीब 53.93 लाख शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें से सिर्फ 1.30 लाख मामलों में एफआईआर दर्ज हुई। यानी कुल शिकायतों का करीब 2.4% ही एफआईआर में बदला।

राज्यसभा की गृह मामलों से संबंधित स्थायी समिति की रिपोर्ट में साइबर अपराध से जुड़े ये आंकड़े सामने आए हैं। 31 सदस्यीय समिति के अध्यक्ष डॉ. राधामोहन दास अग्रवाल हैं। समिति ने साइबर अपराध की शिकायतों पर कार्रवाई और अपराध के आंकड़ों को दर्ज करने के तरीके को लेकर चिंता जताई है।

छह साल में 78 गुना बढ़ीं शिकायतें

रिपोर्ट के मुताबिक, साइबर अपराध की शिकायतों में छह साल के दौरान करीब 78 गुना बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद शिकायत और एफआईआर के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। समिति ने 1930 साइबर हेल्पलाइन और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस कार्रवाई और फॉलो-अप में देरी का मुद्दा भी उठाया।

FIR नहीं होने से अपराध के आंकड़े प्रभावित

समिति ने कहा कि कई मामलों में पुलिस एफआईआर दर्ज करने के बजाय गैर-संज्ञेय रिपोर्ट तक सीमित रहती है। इससे गंभीर अपराध आधिकारिक आंकड़ों में कम दिखाई दे सकते हैं और पीड़ितों को न्याय मिलने में भी परेशानी होती है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि राज्यों की ओर से NCRB को अपराध के आंकड़े भेजने में डेढ़ से दो साल तक की देरी होती है। इससे पुलिसिंग, सुरक्षा नीति और बजट तैयार करने में पुराने आंकड़ों का इस्तेमाल होने की आशंका रहती है।

एक अपराध के साथ कई मामले दर्ज नहीं होते

समिति ने NCRB के ‘प्रिंसिपल ऑफेंस रूल’ का भी जिक्र किया। इसके तहत किसी घटना में कई अपराध होने पर मुख्य अपराध को ही दर्ज किया जाता है। उदाहरण के तौर पर अपहरण के बाद लूट और वीडियो ऑनलाइन लीक होने की स्थिति में रिकॉर्ड में सिर्फ अपहरण मुख्य अपराध के रूप में दर्ज हो सकता है। इससे साइबर अपराध, लूट या अन्य जुड़े अपराधों का अलग डेटा सामने नहीं आ पाता।

समिति के मुताबिक, ऐसे मामलों में सेकेंडरी अपराधों का डेटा छूटने से देश में साइबर अपराध की वास्तविक तस्वीर पूरी तरह सामने नहीं आती।

NATIONAL : मुंबई में गणेश विसर्जन की तैयारी पूरी:BMC ने 278 लोकेशन पर 383 तालाब बनाए, 25 हजार वॉलेंटियर तैनात

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मुंबई में गणेश उत्सव के दौरान मूर्तियों के इको-फ्रैंडली विसर्जन के लिए BMC ने 278 जगहों पर 383 तालाब बनाए हैं। शहर में विसर्जन की व्यवस्था संभालने के लिए 25 हजार कर्मचारी तैनात किए गए हैं।

ज्यादातर सार्वजनिक गणेश मंडलों की मूर्तियों का विसर्जन आखिरी दिन होगा। घरों में रखी मूर्तियों का विसर्जन उत्सव के दूसरे दिन से शुरू हो गया था।

दरअसल, अलग-अलग परंपराओं के अनुसार, भगवान गणेश की मूर्तियों का विसर्जन स्थापना के डेढ़ दिन और पांच दिन बाद किया जाता है।

12 दिन का गणेश उत्सव 14 सितंबर को शुरू हुआ था और 25 सितंबर को खत्म होगा।

BMC ने 6 फीट से बड़ी मूर्तियों के लिए 67 प्राकृतिक विसर्जन स्थलों पर जरूरी इंतजाम किए हैं। इनमें 44 समुद्र तट और जेटी, जबकि 23 प्राकृतिक झीलें शामिल हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट के 20 अगस्त 2026 के निर्देशों के मुताबिक, 6 फीट तक की मूर्तियों का विसर्जन कृत्रिम तालाबों में करना जरूरी है।

BMC ने नागरिकों से प्राकृतिक जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए कृत्रिम तालाबों का इस्तेमाल करने की अपील की है।

समुद्र तटों पर रेत के ऊपर 1,194 स्टील प्लेटें बिछाई गई हैं। चौपाटियों और समुद्र तटों पर 23 जर्मन राफ्ट्स, 34 क्रेन, 85 एम्बुलेंस और 10 मोटरबोट तैयार रखी गई हैं।

लाइफगार्ड और निगरानी की व्यवस्था

BMC ने 1,132 लाइफगार्ड तैनात किए हैं। पूजा सामग्री के कचरे के लिए 498 निर्माल्य कलश और 326 निर्माल्य डंपर लगाए गए हैं। भीड़ पर नजर रखने के लिए 228 कंट्रोल रूम और 75 ऑब्जर्वेशन टावर बनाए गए हैं।

प्रमुख विसर्जन स्थल स्वराज्यभूमि (गिरगांव चौपाटी) पर BMC ने 12 कृत्रिम तालाब और 20 ऑब्जर्वेशन टावर बनाए हैं। यहां 22 राफ्ट्स, 90 टॉयलेट, 3 एम्बुलेंस और करीब 1,000 कर्मचारी भी तैनात किए गए हैं।

विसर्जन मार्गों पर मरम्मत का काम

विसर्जन मार्गों पर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 281 जगहों पर रास्ते में बाधा बन रहे केबल हटाए गए हैं। 506 सड़कों पर 4,279 गड्ढे और 171 ड्रेनेज कवर ठीक किए गए हैं। 515 जगहों पर पेड़ों की छंटाई भी की गई है।

मुंबई के समुद्र तट पर ब्लू-बटन जेलीफिश और स्टिंगरे मौजूद हैं। इसलिए समुद्र में मूर्ति विसर्जन के लिए उतरते समय खास सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

BMC के आपदा प्रबंधन विभाग ने हर सार्वजनिक गणेश मंडल के कम से कम 8 से 10 स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण दिया है। इन स्वयंसेवकों को भीड़ संभालने, बिजली हादसों, आग और मेडिकल इमरजेंसी से निपटने की ट्रेनिंग दी गई है। उन्हें फर्स्ट एड और CPR का प्रशिक्षण भी दिया गया है।

NATIONAL : ChatGPT से नकल… छात्र की आत्महत्या के बाद IIT बॉम्बे में प्रदर्शन, संस्थान का भी आया बयान

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आईआईटी बॉम्बे में छात्र की आत्महत्या से कैंपस के छात्रों में काफी गुस्सा है. छात्र पर परीक्षा में ChatGPT के इस्तेमाल के आरोप सामने आए हैं, हालांकि प्रशासन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई से इनकार किया.

IIT बॉम्बे के एनर्जी साइंस और इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के सेकंड इयर के स्टूडेंट ने सुसाइड कर लिया. उसके सुसाइड के बाद आईआईटी पवई में कैंपस के छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया. उन सभी के बीच सुसाइड के मामलों को लेकर बहुत आक्रोश है. इस मामले पर DCP दत्तात्रेय नलावड़े ने कहा, ” IIT पवई में एक छात्र ने सुसाइड कर लिया. इसके बाद, कुछ IIT छात्र इकट्ठा हुए और अपनी मांगों को लेकर विरोध-प्रदर्शन करने लगे.”

उन्होंने कहा, “IIT प्रशासन उनसे बातचीत करके कोई अच्छा समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है. कैंपस में सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं और मामले की जांच की जा रही है.”

ChatGPT पर अपलोड किया था क्वेश्चन पेपर
दरअसल, सुसाइड के एक दिन पहले परीक्षा के दौरान छात्र को परीक्षा हॉल में मोबाइल का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था. उसने क्वेश्चन का जवाब पाने के लिए क्वेश्चन पेपर को ChatGPT पर अपलोड किया था. IIT बॉम्बे के मुताबिक, इस मामले की जानकारी होने के बाद छात्र के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई. इंस्ट्रक्टर और डिपार्टमेंट के हेड ने छात्र से इस मामले पर बात भी की थी. उन्होंने उसे समझाया और भरोसा दिलाया कि इस घटना का उसके एकेडमिक करियर पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा.

इसके बाद छात्र अपने हॉस्टल के कमरे में लौट गया. बाद में शाम को वह अपने कमरे में मृत पाया गया. IIT बॉम्बे ने छात्र की मौत पर गहरा दुख जाहिर किया है. संस्थान की ओर से छात्र के दोस्तों, सहपाठियों, शिक्षकों और इस घटना से प्रभावित दूसरे लोगों को जरूरी सहयोग दिया जा रहा है. संस्थान ने कहा है कि छात्र की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की जांच संबंधित सक्षम अधिकारी कर रहे हैं.

कहां का रहने वाला था छात्र?
मुंबई के पवई में IIT बॉम्बे के छात्र की आत्महत्या के मामले में मुंबई पुलिस ने बताया कि पवई पुलिस ने ADR के तहत केस दर्ज किया है और आगे की जांच चल रही है. मृतक छात्र साहिल वाकोडे महाराष्ट्र के यवतमाल का रहने वाला था. उसका परिवार मुंबई पहुंच चुका है. पुलिस IIT बॉम्बे के छात्रों के बयान भी दर्ज कर रही है.अभी तक पोस्टमार्टम नहीं हुआ है.

छात्रों ने क्या लगाया आरोप?
छात्रों का आरोप है कि जिस छात्र पर नकल करने का आरोप था, उसे एक साल के लिए सस्पेंड करने की धमकी दी गई थी. उन्होंने कहा कि अगर सस्पेंड किया जाता, तो छात्र को हॉस्टल खाली करना पड़ता और कैंपस के बाहर रहना पड़ता. छात्रों के अनुसार, ऐसी कार्रवाई से छात्र का इंजीनियरिंग कोर्स चार साल से बढ़कर पांच साल या उससे ज्यादा का भी हो सकता था.

DUSU Election Result 2026: कौन बनेगा दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ का अध्यक्ष? ABVP-NSUI के बीच फाइट; विजय जुलूस पर रोक

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दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव 2026 की मतगणना शुरू हो गई है. जानिए कौन जीतेगा अध्यक्ष पद और क्या हैं ताजा अपडेट. विजय जुलूस पर लगी रोक.
दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव (DUSU Election 2026) के लिए वोटों की गिनती शनिवार को शुरू हो गई है. नॉर्थ कैंपस स्थित यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स स्टेडियम के मल्टीपर्पज हॉल में मतगणना चल रही है. अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के चार केंद्रीय पदों के नतीजे आज घोषित किए जाने की उम्मीद है.

दिल्ली यूनिवर्सिटी में शुक्रवार को मतदान हुआ था. चुनाव में 40.46 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक है. 2025 में मतदान प्रतिशत 39.5 रहा था. इस बार मतदान दिल्ली यूनिवर्सिटी के 52 केंद्रों पर दो चरणों में कराया गया.

20 उम्मीदवार मैदान में
DUSU के चार केंद्रीय पदों के लिए कुल 20 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे. अध्यक्ष पद के लिए 7, उपाध्यक्ष के लिए 5, जबकि सचिव और संयुक्त सचिव पद के लिए 4-4 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा. प्रमुख छात्र संगठनों में ABVP, NSUI और AISA-SFI गठबंधन शामिल हैं.

अध्यक्ष पद पर ABVP ने यश डबास और NSUI ने विजय शंकर मीणा को उम्मीदवार बनाया था. उपाध्यक्ष पद के लिए ABVP की ओर से इशू मौर्य, जबकि NSUI की ओर से वीर छत्रथ मैदान में थे.

ABVP ने 4-0 से जीत का किया दावा
ABVP की DUSU वाइस प्रेसिडेंट पद की उम्मीदवार इशू मौर्य ने न्यूज एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में कहा, “हमें दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों पर भरोसा है. हमें पूरा यकीन है कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) 4-0 से जीत हासिल करेगी. अगर तुलना करें, तो इस बार वोटिंग पिछले साल के मुकाबले ज्यादा हुई है… उन्हें ABVP के हर उम्मीदवार और खुद संगठन पर भरोसा है. इसीलिए मुझे पूरा यकीन है कि इस बार ABVP निर्णायक बहुमत से जीतेगी.”

1,000 EVM की हुई थी व्यवस्था
चुनाव के लिए कुल 1,000 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की व्यवस्था की गई थी. इनमें से 960 मशीनों का इस्तेमाल मतदान के लिए किया गया, जबकि 40 को रिजर्व में रखा गया था.

पहले चरण में सुबह 8:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक मतदान हुआ. शाम के छात्रों के लिए दूसरे चरण में दोपहर 3 बजे से शाम 7:30 बजे तक वोट डाले गए.

कॉलेज चुनावों में ABVP के जीत के दावे
केंद्रीय नतीजों से पहले ABVP ने कई कॉलेजों में अपने उम्मीदवारों की जीत का दावा किया है. संगठन के मुताबिक, अदिति महाविद्यालय, श्री अरबिंदो कॉलेज (मॉर्निंग), डॉ बीआर आंबेडकर कॉलेज, भारती कॉलेज और शिवाजी कॉलेज में उसके उम्मीदवारों ने प्रमुख पदों पर जीत दर्ज की है.

ABVP के अनुसार, श्री अरबिंदो कॉलेज (मॉर्निंग) में उसके पैनल ने 6-0 से जीत दर्ज की। भारती कॉलेज में सभी आठ और शिवाजी कॉलेज में सभी छह पदों पर उसके उम्मीदवार विजयी रहे. हालांकि, ये दावे संगठन की ओर से जारी जानकारी पर आधारित हैं.

दिल्ली हाईकोर्ट ने विजय जुलूस पर लगाई रोक
DUSU चुनाव के नतीजों से पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने जीत के बाद किसी भी तरह के विजय जुलूस पर रोक लगा दी थी. यह रोक सड़कों के साथ-साथ यूनिवर्सिटी कैंपस और हॉस्टल में भी लागू होगी.

कोर्ट ने सभी छात्र संगठनों और चुनाव लड़ रहे 140 उम्मीदवारों को नोटिस जारी कर चुनाव आचार नियमों के कथित उल्लंघन पर जवाब भी मांगा है. अदालत ने दिल्ली पुलिस और दिल्ली यूनिवर्सिटी को Lyngdoh Committee की सिफारिशों और पहले के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया है.

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में ‘एक्सप्लेनर’ लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा
अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी ‘हिंदुस्थान समाचार’ से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह ‘प्रभात खबर डॉट कॉम’ से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग
खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक ‘सक्सेस स्टोरीज’ लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)
UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के ‘जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग’ से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

Tamil Nadu: विधानसभा से चुनाव पहले गरमाया भाषा विवाद, उदयनिधि स्टालिन बोले- तमिलनाडु में हिंदी की कोई जगह नहीं

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तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर हिंदी बनाम तमिल भाषा विवाद गरमाने लगा है। दरअसल, डिप्टी सीएम उदयनिधि स्टालिन ने हिंदी भाषा को लेकर सख्त रुख अपनाया है और कहा कि तमिल को किसी के सहारे की जरूरत नहीं है।

तमिलनाडु के डिप्टी मुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने हिंदी भाषा को लेकर फिर साफ और सख्त रुख दोहराया है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में हिंदी थोपने का विरोध कोई नया मुद्दा नहीं है, बल्कि यह लंबे इतिहास और आंदोलन से जुड़ा हुआ है।

‘1937 के आंदोलन से आज तक वही रुख’
उदयनिधि स्टालिन ने बताया कि सबसे पहला हिंदी विरोध आंदोलन 1937-38 में समाज सुधारक पेरियार ने शुरू किया था, जब स्कूलों में हिंदी को अनिवार्य बनाने का फैसला लिया गया था। उन्होंने कहा कि उस समय पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि (कलाईनार) भी 14 साल की उम्र में तिरुवरूर में हुए प्रदर्शन में शामिल हुए थे। स्टालिन ने याद दिलाया कि 21 फरवरी 1940 को सरकार को यह फैसला वापस लेना पड़ा और हिंदी की अनिवार्यता खत्म कर दी गई।

‘तमिल को किसी सहारे की जरूरत नहीं’
उन्होंने कहा कि कई लोग सवाल उठाते हैं कि जब देश के दूसरे राज्यों में हिंदी स्वीकार कर ली गई है, तो तमिलनाडु ही इसका विरोध क्यों करता है। इस पर उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि तमिल भाषा इतनी मजबूत और समृद्ध है कि उसे किसी दूसरी भाषा पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। डिप्टी सीएम ने द्रविड़ आंदोलन की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि डीएमके ही वह पार्टी है जिसने राज्य में दो-भाषा नीति को लागू रखा और साफ कहा कि यहां हिंदी के लिए कोई जगह नहीं होगी।

‘तमिल को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिलाने में डीएमके की अहम भूमिका’
उन्होंने यह भी दावा किया कि डीएमके ने ही राज्य का नाम बदलकर तमिलनाडु रखा और तमिल भाषा को ‘शास्त्रीय भाषा’ का दर्जा दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उदयनिधि स्टालिन के इस बयान को तमिलनाडु की भाषा राजनीति और केंद्र-राज्य संबंधों के संदर्भ में अहम माना जा रहा है, क्योंकि राज्य में लंबे समय से हिंदी विरोध और क्षेत्रीय पहचान का मुद्दा काफी संवेदनशील रहा है।

NATIONAL : बेंगलुरु से आई सबसे बड़ी खुशखबरी, वायुसेना को मिलेंगे नए तेजस और एचटीटी 40 फाइटर ट्रेनर, पवन हंस को ध्रुव एनजी

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हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी एचएएल 18 सितंबर 2026 को बेंगलुरु में भारतीय वायुसेना को नए लड़ाकू विमान सौंपने जा रहा है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नागरिक उड्डयन मंत्री के राममोहन नायडू की मौजूदगी में एलसीए तेजस ट्विन सीटर ट्रेनर और एचटीटी 40 विमान एयरफोर्स को मिलेंगे. इसके साथ ही पवन हंस लिमिटेड को आधुनिक ध्रुव नेक्स्ट जनरेशन हेलीकॉप्टर भी सौंपे जाएंगे.

नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना की ताकत में तगड़ा इजाफा होने जा रहा है. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड 18 सितंबर 2026 को बेंगलुरु में वायुसेना को एलसीए तेजस एफओसी ट्विन सीटर ट्रेनर और एचटीटी 40 बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट सौंपेगा. इस खास कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नागरिक उड्डयन मंत्री के राममोहन नायडू मौजूद रहेंगे. इसके साथ ही पवन हंस लिमिटेड को ध्रुव नेक्स्ट जनरेशन हेलीकॉप्टर भी दिए जाएंगे. तेजस के नए ट्रेनर एयरक्राफ्ट से भारतीय पायलटों को आधुनिक फाइटर जेट उड़ाने की बेहतरीन ट्रेनिंग मिलेगी. वहीं ध्रुव हेलीकॉप्टर देश के सिविल एविएशन सेक्टर को और मजबूत करेगा. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक यह स्वदेशी तकनीक की दिशा में ऐतिहासिक कदम है.

  1. एलसीए तेजस ट्रेनर विमान में क्या है खास?
    एलसीए तेजस का एफओसी ट्विन सीटर एक एडवांस्ड फाइटर ट्रेनर विमान है. यह दो सीटों वाला सुपरसोनिक जेट है जिसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने तैयार किया है. इसका मुख्य काम भारतीय वायुसेना के नए पायलटों को फाइटर जेट उड़ाने की ट्रेनिंग देना है. यह सिर्फ ट्रेनिंग के लिए ही नहीं बना है. जरूरत पड़ने पर यह जेट असली फाइटर प्लेन की तरह दुश्मनों पर हमला भी कर सकता है. इसमें आधुनिक ग्लास कॉकपिट और रडार सिस्टम मौजूद हैं. यह सटीक हथियारों और हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को दागने में पूरी तरह सक्षम है.

एचटीटी-40 पूरी तरह से भारत में डिजाइन और विकसित किया गया टर्बोप्रॉप ट्रेनर विमान है. इसका उपयोग वायुसेना के नए कैडेट्स को पहली स्टेज की बेसिक उड़ान सिखाने के लिए किया जाएगा. जब युवा पायलट पहली बार विमान उड़ाना सीखते हैं तो उनकी शुरुआत इसी विमान से होगी. इसमें आधुनिक डिजिटल स्क्रीन और एडवांस्ड सुरक्षा उपकरण दिए गए हैं.

आपात स्थिति में पायलट को बचाने के लिए इसमें जीरो-जीरो इजेक्शन सीट मौजूद है. यह कम रफ्तार पर भी बेहतरीन संतुलन बनाए रखता है जिससे उड़ान की ट्रेनिंग काफी सुरक्षित हो जाती है.

  1. पवन हंस को मिलने वाला ध्रुव एनजी हेलीकॉप्टर कितना दमदार है?
    ध्रुव नेक्स्ट जनरेशन हेलीकॉप्टर देश के नागरिक उड्डयन सेक्टर के लिए बहुत बड़ा कदम है. यह एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर का आधुनिक सिविल वर्जन है. पवन हंस इसका इस्तेमाल वीआईपी मूवमेंट और दूरदराज के इलाकों में संपर्क बढ़ाने के लिए करेगा. इसके अलावा इसका उपयोग समुद्र में तेल निकालने वाले प्लेटफॉर्म्स तक राहत सामग्री और लोग पहुंचाने में किया जाएगा. इसमें दो ताकतवर इंजन लगे हैं जो खराब मौसम में भी सुरक्षित उड़ान तय करते हैं. इसका नया केबिन ज्यादा आरामदायक है और इसमें आधुनिक नेविगेशन उपकरण लगे हैं.
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