Monday, November 2, 2026
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NATIONAL : FCRA संशोधन विधेयक 2026 संयुक्त संसदीय समिति को क्यों भेजा गया? जानिए संसद की इस प्रक्रिया का पूरा कानूनी मतलब

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विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लोकसभा ने बहुमत से संसद की संयुक्त समिति को भेज दिया है। इसका उद्देश्य विधेयक की धाराओं की विस्तृत जांच, संबंधित पक्षों की राय और संभावित बदलावों पर विचार करना है, जिसके बाद समिति अपनी रिपोर्ट देगी।

इन दिनों काफी चर्चा में रहे विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर संसद में चल रही बहस के बीच लोकसभा ने इसे संसद की संयुक्त समिति (Joint Committee of Parliament) को भेजने का फैसला किया है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने गृह मंत्री अमित शाह की ओर से विधेयक को समिति को भेजने का प्रस्ताव रखा, जिसे लोकसभा ने मंजूर कर लिया। प्रस्तावित समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य होंगे। इस कदम का मतलब यह नहीं है कि विधेयक खारिज हो गया या कानून बनना रुक गया। संयुक्त समिति अब विधेयक की धाराओं की विस्तार से जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट लोकसभा को देगी।

दरअसल, FCRA संशोधन विधेयक 2026 को संयुक्त समिति के पास भेजने का मुख्य औपचारिक उद्देश्य इसकी बड़े स्तर पर संसदीय जांच करना है। प्रस्तावित विधेयक विदेशी अंशदान लेने वाले संगठनों के पंजीकरण और विदेशी धन से बनाई गई संपत्तियों के प्रबंधन से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव होने की बात है। विपक्ष समेत कई पक्षों ने विधेयक के भारतीय समाज पर संभावित असर को लेकर सवाल उठाए हैं। खास तौर पर विदेशी धन से बनी संपत्तियों पर सरकार के प्रस्तावित अधिकार को लेकर चर्चा हुई है। ऐसे में दोनों सदनों के सदस्यों वाली समिति को प्रावधानों की बारीकी से जांच का अवसर मिलेगा।

संयुक्त संसदीय समिति क्या होती है ?
सरल भाषा में संसद की संयुक्त समिति Joint Parliamentary Committee , JPC दोनों सदनों, लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों से मिलकर बनने वाली विशेष समिति होती है। यह एक अस्थायी (तदर्थ) समिति है।

किसी विधेयक को ऐसी समिति को भेजने के लिए संबंधित सदन प्रस्ताव पारित करता है और दूसरे सदन से भी सदस्यों को शामिल किया जाता है।
ऐसी समितियां किसी खास विधेयक की गहराई से जांच करने के लिए बनाई जाती हैं। राज्यसभा की आधिकारिक जानकारी के अनुसार विधेयक पर बनी संयुक्त समितियां विशेष काम पूरा होने तक कार्य करती हैं और काम पूरा होने के बाद उनका कार्य समाप्त हो जाता है।

पहले भी वक्फ संशोधन विधेयक समेत कई महत्वपूर्ण विधेयकों को 21 लोकसभा और 10 राज्यसभा सदस्यों वाली संयुक्त समिति को भेजा जा चुका है।
समिति का काम विधेयक को अपने स्तर पर कानून बनाना नहीं, बल्कि सदनों के सामने विचार के लिए रिपोर्ट और सुझाव रखना होता है।
इसके बाद विधेयक की अंतिम मंजूरी संसद के दोनों सदनों की प्रक्रिया से ही होती है।

संयुक्त समिति की रिपोर्ट और उसकी सिफारिशें सरकार पर कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होतीं। इसका मतलब है कि समिति किसी धारा को बदलने, हटाने या नई व्यवस्था जोड़ने की सलाह दे सकती है, लेकिन सरकार हर सिफारिश को स्वीकार करने के लिए कानूनी तौर पर मजबूर नहीं है। फिर भी ऐसी समिति की रिपोर्ट का संसदीय और राजनीतिक महत्व काफी होता है।

संसदीय समिति की सिफारिशें सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं
संयुक्त समिति के अधिकार क्या होते हैं
एक बात साफ है कि समिति खुद विधेयक को कानून में नहीं बदल सकती। अंतिम निर्णय संसद के दोनों सदनों को ही लेना होता है। लेकिन संयुक्त समिति विधेयक की धाराओं और उनसे पैदा होने वाले कानूनी प्रभावों की जांच कर सकती है। वह संबंधित मंत्रालय और सरकारी अधिकारियों से जानकारी मांग सकती है। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों के विचार भी लिए जा सकते हैं। समिति विधेयक की भाषा में बदलाव की जरूरत पर विचार कर सकती है और अपनी रिपोर्ट में संशोधन सुझा सकती है। उसका पूरा अधिकार उस प्रस्ताव से तय होता है, जिसके जरिए समिति गठित की जाती है।

NATIONAL : 17 वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म, दिल्ली-NCR में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे ये 5 गंभीर सवाल

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पुलिस को दिए पीड़िता के बयान के अनुसार, बस चलने के कुछ ही देर बाद कंडक्टर ने उससे छेड़छाड़ शुरू कर दी. पीड़िता का आरोप है कि दोनों ने उसके साथ दुष्कर्म किया और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी.

दिल्ली-NCR में एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली शर्मनाक घटना सामने आई है. यह घटना 4 अगस्त 2026 की रात की है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की रहने वाली एक 17 वर्षीय किशोरी अपने कजिन (भाई) से मिलने नोएडा जा रही थी.

तेज़ बारिश और अंधेरे के कारण वह गलती से ग्रेटर नोएडा के परी चौक पर उतर गई. उसी दौरान वहां से एक खाली स्लीपर बस गुजरी. किशोरी के इशारा करने पर बस रुकी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप ने उसे नोएडा के सेक्टर-63 ले जाने की बात कहकर बस में बिठा लिया और उसके साथ दुष्कर्म किया.

पुलिस को दिए पीड़िता के बयान के अनुसार, बस चलने के कुछ ही देर बाद कंडक्टर ने उससे छेड़छाड़ शुरू कर दी. पीड़िता का आरोप है कि दोनों ने उसके साथ दुष्कर्म किया और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी. उस समय बस में कोई अन्य यात्री मौजूद नहीं था.

यह बस परी चौक (ग्रेटर नोएडा) से दिल्ली के कश्मीरी गेट की ओर लगभग 47 किलोमीटर तक दौड़ती रही. बस की स्लीपर बर्थ के चारों ओर पर्दे लगे थे. पुलिस जांच कर रही है कि क्या इन पर्दों की आड़ में वारदात को अंजाम दिया गया. आखिरकार आरोपियों ने पीड़िता को कश्मीरी गेट बस टर्मिनल के पास रिंग रोड पर छोड़ दिया और फरार हो गए. इसके बाद पीड़िता ने कश्मीरी गेट थाना पुलिस से संपर्क कर घटना की जानकारी दी.

पुलिस की कार्रवाई

शिकायत मिलने के तुरंत बाद कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस ने आरोपी ड्राइवर और कंडक्टर को तिमारपुर बस पार्किंग इलाके से गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल स्लीपर बस को जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है.

जांच में सामने आया कि बस में पहले कुछ खराबी आ गई थी, जिसके चलते उसे मरम्मत के लिए सूरजपुर (ग्रेटर नोएडा) के वर्कशॉप में ले जाया गया था. मरम्मत के बाद दोनों आरोपी खाली बस को तिमारपुर ले जा रहे थे, तभी रास्ते में परी चौक पर उन्हें किशोरी मिली.

कानूनी प्रावधान

पीड़िता के नाबालिग (16 वर्ष से अधिक, 18 वर्ष से कम) होने के कारण इस मामले में सामान्य आपराधिक कानून के साथ-साथ ‘बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम, 2012’ (POCSO Act) के कड़े प्रावधान लागू होते हैं.

भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 70: यह धारा सामूहिक दुष्कर्म (Gang Rape) से संबंधित है. यदि पीड़िता 18 वर्ष से कम आयु की है और आरोपी दोषी साबित होते हैं, तो धारा 70(2) के तहत न्यूनतम आजीवन कारावास या मृत्युदंड और जुर्माने की सजा का प्रावधान है.

POCSO Act: यह कानून 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को यौन अपराधों से विशेष सुरक्षा प्रदान करता है. इसके तहत गंभीर यौन हमले के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों (Special Courts) की व्यवस्था है.

जांच और प्रशासनिक चूक पर 5 बड़े सवाल
पिकेट चेकिंग पर सवाल: नोएडा से दिल्ली के बीच 47 किलोमीटर के सफर के दौरान चिल्ला बॉर्डर और मयूर विहार जैसे कई प्रमुख पुलिस चेकिंग पॉइंट आते हैं. पुलिस बल और ट्रैफिक पिकेट की मौजूदगी के बावजूद इस कमर्शियल बस की एक बार भी चेकिंग क्यों नहीं हुई?

चालान के बावजूद परिचालन की छूट क्यों?: जिस वाहन पर 11 ट्रैफिक चालान लंबित थे और परमिट नियमों का लगातार उल्लंघन हो रहा था, उसे सड़कों पर बेरोकटोक चलने की अनुमति ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा कैसे दी गई?

सुरक्षा मानकों में लापरवाही क्यों?: निर्भया कांड के बाद सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के तहत व्यावसायिक वाहनों में अनिवार्य सुरक्षा मानकों (पारदर्शी कांच, फंक्शनल सीसीटीवी, जीपीएस और पैनिक बटन) की नियमित जांच करने में परिवहन विभाग क्यों विफल रहा?

इमरजेंसी सिस्टम की विफलता: बस में ट्रैकिंग सिस्टम और पैनिक बटन की वर्तमान स्थिति क्या थी? इतने लंबे रूट पर वारदात के दौरान किसी भी आपातकालीन निगरानी प्रणाली (Emergency Response Mechanism) से ऑटोमैटिक अलर्ट क्यों जारी नहीं हुआ?

ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों पर नरमी क्यों?: सुरक्षा मानकों की अनदेखी और नियमों का बार-बार उल्लंघन करने वाली प्राइवेट बस ऑपरेटर कंपनियों के खिलाफ नियमित ऑडिट और सख्त प्रशासनिक कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है?

अधिकार क्षेत्र को लेकर पुलिस में खींचतान

घटना के बाद दिल्ली और ग्रेटर नोएडा पुलिस के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर विवाद सामने आया है. ग्रेटर नोएडा पुलिस का कहना है कि दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तारी की जानकारी सार्वजनिक करने से पहले उन्हें सूचित नहीं किया था. गौतम बुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट के अनुसार, कथित घटना उनके अधिकार क्षेत्र में शुरू हुई थी.

दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस के जॉइंट कमिश्नर (नॉर्दर्न रेंज) मधुर वर्मा ने कहा, “हमने पूरी तरह से पेशेवर तरीके से काम किया है. BNS के नए कानूनी प्रावधानों के तहत महिलाओं के खिलाफ अपराधों की ज़ीरो FIR या शिकायत कहीं भी दर्ज की जा सकती है और जांच शुरू की जा सकती है.”

निर्भया कांड से 2026 तक: क्या वाकई कुछ बदला?

यह मामला 2012 के चर्चित निर्भया कांड की याद दिलाता है. उस घटना के बाद देशभर में हुए विरोध-प्रदर्शनों और जस्टिस जे.एस. वर्मा समिति की सिफारिशों के आधार पर क्रिमिनल लॉ (अमेंडमेंट) एक्ट, 2013 लागू किया गया था, जिसमें स्टॉकिंग, वॉयरिज्म और यौन उत्पीड़न के खिलाफ कड़े कानून बनाए गए. इसके बाद 2018 में और कड़े संशोधन किए गए तथा ‘निर्भया फंड’ का गठन हुआ.

इसके बावजूद जमीनी हकीकत चिंताजनक है. NCRB 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, देश में महिलाओं के खिलाफ 4,41,534 अपराध और दुष्कर्म के 29,536 मामले दर्ज किए गए. आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि दर्ज दुष्कर्म के मामलों में 96.8% आरोपी पीड़िता के परिचित थे.

यह घटना दर्शाती है कि केवल कानून सख्त बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि सड़कों पर पुलिस पेट्रोलिंग, ट्रांसपोर्ट सेफ्टी और प्रशासनिक निगरानी की सक्रियता ही ऐसे अपराधों को रोकने में निर्णायक साबित हो सकती है.

NATIONAL : आत्मनिर्भर भारत की आसमानी ताकत! राजनाथ सिंह ने IAF को सौंपे तेजस-HTT-40 ट्रेनर, पवन हंस को मिले ध्रुव NG हेलीकॉप्टर

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने बेंगलुरू में HAL द्वारा निर्मित स्वदेशी विमानों और हेलीकॉप्टरों के हस्तांतरण समारोह में शिरकत की। इस कार्यक्रम के तहत भारतीय वायुसेना को एलसीए तेजस FOC ट्रेनर विमान और HTT-40 बेसिक ट्रेनर विमान सौंपे गए।

भारत की रक्षा और एयरोस्पेस विनिर्माण क्षमता के लिए शुक्रवार का दिन बेहद ऐतिहासिक साबित हुआ। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू में आयोजित एक विशेष पूजा समारोह के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा निर्मित स्वदेशी विमानों और हेलीकॉप्टरों की नई खेप भारतीय वायुसेना (IAF) और पवन हंस लिमिटेड को सौंपी।

इस महत्वपूर्ण हस्तांतरण कार्यक्रम के तहत HAL ने भारतीय वायुसेना को दो एलसीए तेजस FOC (फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस) ट्विन-सीटर ट्रेनर विमान और HTT-40 बेसिक ट्रेनर विमान सौंपे। इसके साथ ही, नागरिक उड्डयन क्षेत्र के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए चार ‘ध्रुव नेक्स्ट जनरेशन’ (Dhruv NG) हेलीकॉप्टर पवन हंस लिमिटेड (PHL) को प्रदान किए गए। HAL के अधिकारियों के अनुसार, दो तेजस FOC ट्रेनर विमान मिलने के बाद 2010 के अनुबंध के तहत सभी चार ट्विन-सीटर विमानों की डिलीवरी अब पूरी हो चुकी है।

यह 4.5 जनरेशन का हल्का, हर मौसम में उड़ान भरने वाला बहुउद्देश्यीय विमान है, जिसे विशेष रूप से वायुसेना के पायलटों को आधुनिक लड़ाकू ट्रेनिंग देने के लिए डिजाइन किया गया है। इसके साथ ही 70 एचटीटी-40 (HTT-40) बेसिक ट्रेनर विमानों के अनुबंध के तहत भी पहली डिलीवरी की शुरुआत हो गई है, जिससे भारत के नए पायलटों की शुरुआती ट्रेनिंग और मजबूत होगी।

एक बार में 14 यात्रियों को ले जाने में सक्षम
दूसरी ओर, नागरिक उड्डयन क्षेत्र के लिए ‘ध्रुव एनजी’ का शामिल होना एक बड़ी उपलब्धि है। यह भारत में निर्मित पहला नागरिक प्रमाणित 5.5 टन का लाइट ट्विन-इंजन हेलीकॉप्टर है। यह एक बार में 14 यात्रियों को ले जाने में सक्षम है और इसकी अधिकतम रफ्तार 285 किलोमीटर प्रति घंटा है। इसका उपयोग वीआईपी यात्रा, एयर एम्बुलेंस, आपदा राहत और ऑफशोर ऑपरेशन्स में किया जाएगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह हैंडओवर भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को मजबूती देता है। अब भारत न केवल सैन्य उड्डयन में आत्मनिर्भर बन रहा है, बल्कि नागरिक और वाणिज्यिक विमानन के क्षेत्र में भी दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रहा है।

RAJASTHAN : ‘मैं पोस्ट छोड़ना चाहता हूं पर पद मुझे नहीं छोड़ रहा’ राजस्थान चुनाव से पहले सीएम गहलोत ने क्यों कहा ऐसा

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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर कहा है कि वह ‘पद छोड़ना चाहते हैं लेकिन पद उन्हें नहीं छोड़ रहा है।’ जोधपुर में सोमवार शाम एक कार्यक्रम में सीएम गहलोत ने ये बात कही। वह जोधपुर के पॉलिटेक्निक कॉलेज परिसर में बने मारवाड़ इंटरनेशनल सेंटर का उद्घाटन करने के लिए वहां गए थे। इस मौके पर उन्होंने चुनावी बॉन्ड को लेकर भी बीजेपी को घेरा। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर कोई बीजेपी के अलावा किसी अन्य पार्टी को पैसा देता है तो उसे ईडी और इनकम टैक्स का डर होता है।

बीजेपी पर भड़के गहलोत
अशोक गहलोत ने आगे कहा कि बीजेपी के लोग अवैध काम कर रहे हैं। एकतरफा बॉन्‍ड बीजेपी के पास जा रहा है। अगर कोई कांग्रेस को पैसा देता है तो ईडी और इनकम टैक्स उसके पीछे लग जाते हैं। इसलिए किसी अन्य पार्टी को पैसा नहीं मिल रहा है। सीएम ने कहा कि बीजेपी हमेशा धर्म के नाम पर राजनीति करती है। हिटलर भी धर्म के नाम पर इसी तरह संबोधित करता था, उसका क्या हुआ? भारत के लोगों की बुद्धि और विवेक दुनिया के किसी भी दूसरे देश से बेहतर है।

सीएम बोले- जब महिला देने लगी आशीर्वाद
सीएम गहलोत ने कहा कि 50 साल की राजनीति में जोधपुर की जनता ने मुझे बहुत कुछ दिया है। कार्यक्रम में उन्होंने जोधपुर में अब तक किए गए काम गिनाए। सीएम गहलोत ने इस दौरान एक किस्सा सुनाया। उन्होंने कहा कि एक कार्यक्रम के दौरान मेरी मुलाकात एक महिला से हुई। उन्होंने मुझे बताया कि दिल का ऑपरेशन हुआ है और एक रुपया भी खर्च नहीं हुआ। वह आशीर्वाद देने लगीं। मैंने मजाक में कहा कि मैं अब यह पद छोड़ना चाहता हूं, लेकिन यह पद मेरा पीछा नहीं छोड़ रहा है।

NATIONAL : नंदीग्राम में मिलन प्रधान की गिरफ्तारी पर भड़के राहुल गांधी, आधी रात को बंगाल पहुंचे कांग्रेस प्रभारी

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नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को पुलिस ने अरेस्ट कर लिया है. इस गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस आलाकमान पूरी तरह से एक्टिव हो गया है. राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने इसे लोकतंत्र की हत्या बताया है. बंगाल कांग्रेस प्रभारी प्रकाश जोशी को तुरंत वापस कोलकाता भेजा गया है. ममता बनर्जी के समर्थन के बाद यह मामला अब बड़ा सियासी मुद्दा बन गया है.

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में उपचुनाव से पहले पुलिस ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को एक पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया है. यह गिरफ्तारी ऐसे वक्त हुई है जब ममता बनर्जी ने कांग्रेस को अपना समर्थन दिया था. इस घटना के बाद कांग्रेस आलाकमान तुरंत एक्शन में आ गया है. पार्टी के बड़े नेता बीजेपी और चुनाव आयोग को घेरने की तैयारी कर रहे हैं. दिल्ली से बंगाल कांग्रेस प्रभारी प्रकाश जोशी को तुरंत वापस कोलकाता भेजा गया है. वह रात डेढ़ बजे कोलकाता पहुंच रहे हैं. राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस मामले पर सख्त रुख अपनाया है. दोनों नेताओं ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है. कांग्रेस अब सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग को बड़ा मुद्दा बनाने जा रही है.

आखिर राहुल गांधी ने इस गिरफ्तारी को लोकतंत्र की हत्या क्यों कहा?
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस गिरफ्तारी को राजनीतिक बदला बताया है. राहुल गांधी ने कहा, ‘नंदीग्राम उपचुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी कोई संयोग नहीं है.’ उन्होंने इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया है. राहुल का आरोप है कि बीजेपी का निष्पक्ष चुनाव में कोई भरोसा नहीं है. वह हमेशा वोट और सरकार चोरी करके सत्ता बचाना चाहती है. राहुल गांधी ने कहा, ‘वे चुनाव नहीं लड़ना चाहते बल्कि चुनावी मुकाबला ही खत्म कर देना चाहते हैं.’ उन्होंने साफ किया कि कांग्रेस इस दबाव के आगे न डरेगी और न ही झुकेगी.

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस मुद्दे पर बीजेपी को घेरा है. मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, ‘नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी वोट चोरी की एक बेशर्म कोशिश है.’ उन्होंने दावा किया कि बीजेपी उपचुनाव में भी जांच एजेंसियों का गलत इस्तेमाल कर रही है. खरगे ने कहा, ‘पीएम भारत को मदर ऑफ डेमोक्रेसी बताते हैं.’ लेकिन बंगाल में जो हो रहा है वह सीधे तौर पर लोकतंत्र की हत्या है. इंडिया गठबंधन इस पूरी कार्रवाई का मिलकर कड़ा विरोध करेगा.

ममता बनर्जी के समर्थन के बाद नंदीग्राम का सियासी समीकरण कैसे बदला?

नंदीग्राम उपचुनाव में टीएमसी उम्मीदवार ने अपना नामांकन वापस ले लिया था. इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को अपना समर्थन देने का ऐलान किया. इस समर्थन से नंदीग्राम का सियासी समीकरण पूरी तरह से बदल गया था. इसी बीच पुलिस ने 2007 के एक पुराने मामले में मिलन प्रधान को गिरफ्तार कर लिया. बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने इसे एक बड़ी राजनीतिक साजिश बताया है. उन्होंने कहा कि बीजेपी बंगाल में एक पार्टी का राज कायम करना चाहती है. हालांकि बीजेपी ने कांग्रेस के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है.

NATIONAL : नंदीग्राम के कांग्रेस प्रत्याशी गिरफ्तार, कुछ घंटे पहले ही ममता बनर्जी ने किया था समर्थन का एलान

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पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव से पहले शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। कांग्रेस के उम्मीदवार मिलन प्रधान को एक पुराने कथित हत्या मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। खास बात यह है कि गिरफ्तारी से कुछ घंटे पहले ही ममता बनर्जी ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन देने का एलान किया था। ममता बनर्जी ने कहा कि उनका गुट कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करेगा और इस फैसले का उद्देश्य विपक्षी गठबंधन को मजबूत करना है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब नंदीग्राम में छह अक्तूबर को उपचुनाव होना है।

मिलन प्रधान की गिरफ्तारी किस मामले में हुई?
कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को पश्चिम बंगाल में एक पुराने कथित हत्या मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी की खबर ममता बनर्जी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के कुछ घंटे बाद सामने आई। ममता ने शुक्रवार को अपने कालीघाट स्थित आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नंदीग्राम में कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन देने की घोषणा की थी। इस तरह एक ही दिन में नंदीग्राम चुनाव को लेकर दो बड़े घटनाक्रम सामने आए। एक तरफ कांग्रेस को ममता के गुट का समर्थन मिला, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस प्रत्याशी की गिरफ्तारी हो गई।

ममता बनर्जी ने कांग्रेस को समर्थन क्यों दिया?
ममता बनर्जी के गुट ने पहले नंदीग्राम से संचिता प्रधान डे को अपना उम्मीदवार बनाया था। लेकिन उन्होंने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का फैसला किया। ममता ने कांग्रेस को ‘सिस्टर पार्टी’ बताते हुए कहा कि यह फैसला विपक्षी गठबंधन को मजबूत करने के लिए किया गया है। उन्होंने कहा कि उनके गुट ने पहले ही नंदीग्राम में कांग्रेस का समर्थन करने का फैसला किया था और बंगाल से विपक्षी एकजुटता का संदेश जाना चाहिए।

संचिता प्रधान डे के नामांकन वापस लेने से क्या बदला?
संचिता प्रधान डे के चुनाव मैदान से हटने के बाद ममता बनर्जी के गुट के सामने नंदीग्राम में अपना उम्मीदवार नहीं रहा। इसके बाद कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने का रास्ता साफ हुआ। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक संचिता ने अपनी उम्मीदवारी वापस लेने से पहले पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी। इसके बाद उनके नामांकन वापस लेने की खबर सामने आई। इस घटनाक्रम के बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस के साथ खड़े होने का फैसला सार्वजनिक किया। हालांकि, संचिता के नामांकन वापस लेने के कारणों को लेकर दी गई जानकारी में अलग-अलग दावे सामने आए हैं।

अब नंदीग्राम उपचुनाव में क्या बदलेगा?
मिलन प्रधान की गिरफ्तारी ने नंदीग्राम उपचुनाव को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है। कुछ घंटे पहले तक ममता बनर्जी के समर्थन से कांग्रेस उम्मीदवार को विपक्षी एकजुटता का संदेश मिला था, लेकिन गिरफ्तारी के बाद चुनावी घटनाक्रम का एक नया पहलू सामने आ गया है। छह अक्तूबर को होने वाले इस उपचुनाव में अब कांग्रेस प्रत्याशी के सामने पुराने कथित हत्या मामले से जुड़ी गिरफ्तारी भी एक अहम मुद्दा बन सकती है। ममता बनर्जी का समर्थन कांग्रेस के पक्ष में विपक्षी एकजुटता दिखाने की कोशिश के तौर पर सामने आया है। ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस और ममता बनर्जी का गुट इस घटनाक्रम को किस तरह उठाते हैं और नंदीग्राम का चुनावी मुकाबला आगे किस दिशा में जाता है।

NATIONAL : चुनाव आयोग के TMC सिंबल फ्रीज करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची ममता बनर्जी, 21 को सुनवाई संभव

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TMC Symbol Row in Supreme Court: ममता बनर्जी ने 28 साल पुरानी पार्टी के नाम और उसके चुनाव चिन्ह को इलेक्शन कमीशन द्वारा फ्रीज किए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। केंद्रीय चुनाव आयोग ने गुरुवार को पार्टी के असली नाम और चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सिंबल को ECI द्वारा फ्रीज करने को ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल विधानसभा की दो सीटों के उपचुनाव के बीच टीएमसी और उसके बागी गुट को सुनने के बाद तृणमूल कांग्रेस और इसके चुनाव चिन्ह को अंतिम फैसले तक फ्रीज कर दिया है। इसके बाद ममता बनर्जी ने ममता तृणमूल कांग्रेस और ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाली बागी गुट ने डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस बनाई है। आयोग ने दोनों को क्रमश: फुटबॉल प्लेयर और लिफाफा सिंबल आवंटित किया है।

केंद्रीय चुनाव आयोग ने गुरुवार को टीएमसी के के असली नाम और चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। ममता बनर्जी ने इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इस मामले पर जल्द सुनवाई के लिए सोमवार (21 सितंबर) को सीजेआई सूर्यकांत की बेंच के सामने याचिका का जिक्र किए जाने की संभावना है।

चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी विवाद और पार्टी पर वर्चस्व को लेकर ममता बनर्जी गुट और ऋतब्रत बनर्जी गुट के बीच उत्पन्न मतभेदों के आधार पर यह फैसला लिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि पार्टी के भीतर दो प्रतिद्वंद्वी गुट मौजूद हैं और दोनों ही असली टीएमसी होने का दावा कर रहे हैं। आयोग ने यह निर्णय पश्चिम बंगाल में होने वाले नंदीग्राम और रेजीनगर के उपचुनाव को ध्यान में रखते हुए लिया है। चुनाव आयोग ने इलेक्शन सिंबल्स ऑर्डर, 1968 के पैरा 15 के तहत यह अंतरिम कदम उठाया। आयोग के अनुसार चुनाव से पहले दोनों पक्षों के दावों पर पूरी तरह से फैसला करना संभव नहीं था, इसलिए निष्पक्षता बनाए रखने के लिए टीएमसी का नाम और ‘फूल-घास’ चुनाव चिह्न फ्रीज कर दिया गया।

पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग द्वारा तृणमूल कांग्रेस का नाम और पारंपरिक ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिह्न फ्रीज किए जाने, और नंदीग्राम उपचुनाव से उनकी उम्मीदवार संचिता प्रधान डे के हटने के बाद, ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस और अपने बयानों के जरिए केंद्र सरकार, भाजपा और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। चुनाव आयोग द्वारा उनके गुट को नया नाम ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और चुनाव चिह्न ‘फुटबॉल प्लेयर’ दिए जाने पर उन्होंने स्पष्ट किया कि वैकल्पिक नाम-चिह्न देना सिर्फ उपचुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए था, इसे आयोग के फैसले की स्वीकार्यता न माना जाए। वे अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखेंगी।

लोकतंत्र के इतिहास का ‘काला दिन’:
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के इस फैसले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि हम संवैधानिक कुर्सी का अनादर नहीं करते, लेकिन आज का दिन हमारे लोकतांत्रिक इतिहास में एक ‘काला दिन’ है।

पहले से तय थी पूरी साजिश:
ममता बने कहा कि उनकी पार्टी से नाम और सिंबल छीनने की यह कोशिश अचानक नहीं हुई, बल्कि इसे बहुत पहले से और एडवांस में प्लान किया गया था।
‘न नाम रहने दूंगा, न निशान’:
केंद्र की सत्ता पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि विरोधियों ने पहले ही कह दिया था कि ‘नाम भी रखने दूंगा, निशान भी नहीं रखने दूंगा’। उन्होंने चेतावनी दी कि जो आज सत्ता में हैं, वो कल नहीं भी हो सकते हैं, उन्हें अपनी सीमाएं समझनी चाहिए।
पार्टियों को तोड़ने का खेल:
ममता ने केंद्र सरकार पर विपक्षी दलों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी को तोड़ा गया और अब वही फॉर्मूला टीएमसी पर आजमाया जा रहा है।
नंदीग्राम में ‘खेला’:
नंदीग्राम उपचुनाव में उनकी उम्मीदवार संचिता प्रधान डे द्वारा अचानक नाम वापस लेने और सीएम शुभेंन्दु अधिकारी से मिलने को लेकर उन्होंने नाराजगी जताई और इसे एक बड़ी राजनीतिक साजिश का हिस्सा बताया।
कांग्रेस उम्मीदवार को खुला समर्थन:
अपनी उम्मीदवार के हटने के तुरंत बाद ममता बनर्जी ने बड़ा सियासी दांव चलते हुए नंदीग्राम सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को बिना शर्त खुला समर्थन देने का एलान कर दिया, ताकि बीजेपी के खिलाफ ‘इंडिया’ गठबंधन मजबूत रहे।
सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया:
चुनाव आयोग के इस अंतरिम फैसले को उन्होंने पूरी तरह गैर-कानूनी बताया और इसके खिलाफ तुरंत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।

NATIONAL : कांग्रेस-लेफ्ट ने ममता को अकेला छोड़ा, बंगाल में बदलाव के साथ ‘बदला’

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ममता बनर्जी की बीजेपी के खिलाफ एकजुट होने की अपील बंगाल के विपक्षी दलों ने सीधे सीधे ठुकरा दी है. ममता बनर्जी के प्रस्ताव पर कांग्रेस और लेफ्ट की बिल्कुल एक जैसी ही प्रतिक्रिया आई है. कांग्रेस का तो कहना है कि ममता बनर्जी ने जैसा किया, वैसा ही पा रही हैं.

ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल चुनाव में ‘एकला चलो रे’ का रास्ता अख्तियार किया था, लेकिन अब यह मजबूरी बन गई है. भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा को छोड़कर ममता बनर्जी किसी भी अन्य राजनीतिक दल के साथ गठबंधन के लिए तैयार नहीं हुईं. ममता बनर्जी का लेफ्ट दलों से दूरी बनाना तो स्वाभाविक था, लेकिन कांग्रेस से भी वैसी ही दूरी बना ली थीं. 2024 के लोकसभा चुनाव में भी पहले ममता बनर्जी कांग्रेस को दो सीटें देने को तैयार लग रही थीं, लेकिन बाद में उससे भी मुकर गईं.

ममता बनर्जी के व्यवहार से खफा कांग्रेस नेतृत्व ने बंगाल कांग्रेस यूनिट को अपने स्तर पर सारे फैसले लेने की छूट दे दी. चुनाव कैंपेन में राहुल गांधी ने हिस्सा जरूर लिया, लेकिन रस्मअदायगी जैसा ही. बंगाल में राहुल गांधी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा ही बताया, और सवाल उठाया कि ममता बनर्जी के खिलाफ बीजेपी वैसा एक्शन क्यों नहीं लेती, जैसा कांग्रेस नेता के साथ होता है.

अब जबकि ममता बनर्जी सबका साथ चाहती हैं, कोई भी हाथ मिलाने को तैयार नहीं है. बंगाल चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को मिली बुरी शिकस्त के बाद ममता बनर्जी ने बीजेपी के खिलाफ सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होकर मोर्चा बनाने की अपील की थी – लेकिन, कांग्रेस और लेफ्ट दोनों ने ऐसी किसी भी कवायद में शामिल होने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है.

ममता बनर्जी के खिलाफ जब तृणमूल कांग्रेस के भीतर से ही आवाज उठने लगी है, तो बाहर से मदद की क्या उम्मीद होनी चाहिए. तृणमूल कांग्रेस नेताओं को गुस्सा खास तौर पर ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी से है. एक तो उनका व्यवहार टीएमसी नेताओं को बर्दाश्त नहीं हो रहा है, और दूसरा चुनाव कैंपेन के लिए I-PAC को हायर किया जाना.

ममता बनर्जी ने जैसे-तैसे सीनियर, समझदार, अनुभवी और भरोसेमंद नेताओं को मोर्चे पर तैनात कर टीएमसी को बदले हालात में प्रासंगिक बनाए रखने की कोशिश भी की है. चौतरफा चुनौतियों से जूझ रहीं ममता बनर्जी के लिए उनकी सरकार में मंत्री रहे सुजीत बोस की गिरफ्तारी नया झटका है. सुजीत बोस को प्रवर्तन निदेशालय ने नगर निगम भर्ती घोटाले में गिरफ्तार किया है. सुजीत बोस पर बिहार के नेता लालू यादव जैसा ही ही आरोप लगा है, नौकरी के बदले पैसे और फ्लैट लेने का आरोप है. सुजीत बोस को बंगाल में पंडाल किंग के रूप में भी जाना जाता है. कोलकाता के लेक टाउन में श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब की दुर्गा पूजा के सुजीत बोस मुख्य आयोजक हैं.

शुभेंदु अधिकारी के पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद ममता बनर्जी ने एक वीडियो संदेश जारी किया था. 9 मई को वीडियो मैसेज में तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी ने कहा, राज्य में हर जगह चुनाव के बाद हिंसा की गूंज सुनाई दे रही है. मैं सभी BJP विरोधी ताकतों, सभी छात्र और युवा संगठनों, और सभी गैर-सरकारी संगठनों से एकजुट होने का आह्वान करती हूं. हम बीजेपी के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चा बनाना चाहते हैं.

लगे हाथ ममता बनर्जी ने अपनी तरफ से यह भी साफ कर दिया है कि बीजेपी के खिलाफ प्रस्तावित संयुक्त मोर्चा में उनकी कभी कट्टर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रही CPI(M) के नेतृत्व वाला लेफ्ट फ्रंट भी स्वागत योग्य है.

ममता बनर्जी के वीडियो मैसेज पर अपनी प्रतिक्रिया में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा, वह राजनीति में अप्रासंगिक हो चुकी हैं.

भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ साझा मंच खड़ा करने की ममता बनर्जी के प्रस्ताव को कांग्रेस, वाम मोर्चा और सीपीआई-एमएल (लिबरेशन) ने सीधे तौर पर ठुकरा दिया है. साथ ही, सभी राजनीतिक दलों ने ममता बनर्जी पर वे सभी आरोप लगाए हैं, जो बीजेपी के इल्जामात हैं.

ममता बनर्जी के प्रस्ताव पर सीपीआई(एम) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम कहते हैं, ‘बिल्कुल नहीं. हम किसी ऐसे व्यक्ति को स्वीकार नहीं करेंगे जिसकी पहचान अपराधी, उगाही करने वाले, भ्रष्ट और सांप्रदायिक ताकत के रूप में हो… हम लोगों के साथ खड़े रहेंगे, हाशिए पर रहने वाली आबादी के साथ.’

ममता बनर्जी के प्रस्ताव पर सीपीआई के राज्य सचिव स्वपन बनर्जी की प्रतिक्रिया है, ममता बनर्जी के साथ हाथ मिलाने का सवाल ही नहीं उठता… उनके शासन के दौरान लोकतंत्र खतरे में था.

कांग्रेस भी ममता पर हमलावर

बंगाल कांग्रेस प्रवक्ता सौम्या आइच रॉय का कहना है, हमें अपने कानों पर यकीन नहीं हो रहा… आपने (ममता बनर्जी) राष्ट्रीय पार्टियों को आमंत्रित किया, कांग्रेस, वामपंथी और अति-वामपंथी दलों की ओर इशारा किया… अति-वामपंथी से आपका क्या मतलब है? क्या आपका मतलब माओवादियों से है, जिन्होंने 25 मई, 2013 को छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के 18 नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्या की थी?

सौम्या आइच रॉय कहती हैं, राष्ट्रीय पार्टियों के साथ-साथ मैं वामपंथियों और अति-वामपंथियों से भी अपील करती हूं कि वे बंगाल और दिल्ली में एकजुट हों. अगर कोई राजनीतिक पार्टी मुझसे बात करना चाहती है, तो मैं उपलब्ध हूं. यह याद रखना चाहिए कि हमारा पहला दुश्मन बीजेपी है.

ममता बनर्जी के प्रस्ताव पर कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी हमला बोला है, बहुत जल्दी समझ आया उन्हें… बंगाल में बीजेपी तो थी ही नहीं… उन्हें कोलकाता ले जाने का काम आपने किया… आप ही ने कहा था कि ये हमारे नैसर्गिक मित्र हैं… जब सब कुछ हाथ से चला गया, तब आप जाग रही हैं.

ममता बनर्जी के कट्टर विरोधी कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी तो जैसे ऐसे मौके का इंतजार ही कर रहे थे. अधीर रंजन चौधरी का कहना है, ममता बनर्जी के जमाने में बंगाल पर जितने अत्याचार हुए उसका नतीजा उन्हें भुगतना ही पड़ेगा… सोच समझ कर कांग्रेस को बंगाल में तबाह करने की सबसे ज्यादा कोशिश ममता बनर्जी ने की… अब वो खुद सजा भुगत रही हैं… सबको बुलाने की कोशिश कर रही हैं… सहारा मांग रही हैं.

हालांकि, अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी को मुसीबत से उबरने की सशर्त सलाह भी दी है. कहते हैं, अगर बचना है तो राहुल गांधी को INDIA गठबंधन का नेता मानते हुए दरख्वास्त करें, उसके बाद सोचा जाएगा.

ममता बनर्जी ने 15 साल पहले लेफ्ट फ्रंट को तो सत्ता से बेदखल किया ही था. लेकिन, लंबी लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर साथ देने वाली कांग्रेस को भी धीरे धीरे बंगाल में खत्म कर दिया. लेफ्ट पार्टियों के बाद देखा जाए तो पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की राजनीति से सबसे ज्यादा नुकसान तो कांग्रेस का ही हुआ है. अधीर रंजन को बोलने का हक तो बनता है, क्योंकि बंगाल में ममता बनर्जी के खिलाफ अकेले मोर्चे पर डटे रहे.

चुनाव से पहले ‘एकला चलो रे’ की नीति अपनाना, और चुनाव हार जाने के बाद ‘हम साथ साथ हैं’ का नारा देना – ममता बनर्जी की यह फितरत भला किसी को भी कैसे बर्दाश्त हो.

NATIONAL : भस्मासुर है कांग्रेस: पार्टी तोड़ने के आरोपों को लेकर रिजिजू ने राहुल गांधी पर किया पलटवार

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भाजपा नेता किरेन रिजिजू ने शुक्रवार को कांग्रेस के पार्टी तोड़ने वाले आरोपों पर पलटवार किया और कांग्रेस भस्मासुर करार दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के संपर्क में आने वाली हर पार्टी खत्म हो जाती है।

भाजपा नेता किरेन रिजिजू ने शुक्रवार को कांग्रेस के पार्टी तोड़ने वाले आरोपों पर पलटवार किया और कांग्रेस भस्मासुर करार दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के संपर्क में आने वाली हर पार्टी खत्म हो जाती है।

दरअसल, राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर राजनीतिक दलों को तोड़ने तथा उनके चुनाव चिह्न छीनने का काम कर रहे हैं। राहुल गांधी की यह प्रतिक्रिया चुनाव आयोग के उस फैसले के बाद आई थी जिसमें आयोग ने तृणमूल के नाम और चुनाव चिह्न को फ्रीज कर दिया था।

राहुल गांधी पर बरसे रिजिजू
रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस को भाजपा पर आरोप लगाने के बजाय अपने बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी वो भस्मासुर है, जो उनके संपर्क में आता है, भस्म हो जाता है। उन्होंने आगे कहा कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) भी कांग्रेस से ही निकली है।

‘भाजपा नहीं करती गंदी राजनीति’
केंद्रीय मंत्री ने कहा, ”कांग्रेस ही दूसरी पार्टियों को तोड़ती और उन्हें खत्म करती है।” उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस का इतिहास सभी को पता है कि वह कैसे पार्टियों को तोड़ती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनी है, लेकिन ऐसा किसी दूसरी पार्टी को तोड़कर नहीं हुआ। रिजिजू ने दावा किया कि भाजपा कांग्रेस की तरह ‘गंदी राजनीति’ नहीं करती।

‘EC-BJP मिलकर तोड़ रही पार्टियां’
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा था कि पहले शिवसेना, फिर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और अब तृणमूल कांग्रेस। हर बार एक ही पैटर्न – भाजपा और निर्वाचन आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं। फिर उसका चुनाव चिह्न छीन लिया जाता है। उन्होंने कहा था कि जब पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है, तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं।

Rozgar Mela : पीएम मोदी देंगे 51,000 से ज्यादा नौकरियां, 20वें रोजगार मेले में मिलेंगे नियुक्ति-पत्र

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रोजगार मेला भारत सरकार और विभिन्न प्राइवेट संस्थाओं द्वारा आयोजित किया जाने वाला एक विशेष कार्यक्रम है। इसमें युवाओं को सरकारी और निजी क्षेत्रों में नौकरियां दी जाती हैं, और नियुक्ति पत्र बांटे जाते हैं। इसी रोजगार मेले के 20 वें संस्करण में कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 51 हजार से ज्यादा नियुक्ति पत्र बांटेंगे।

45 जगहों पर होगा रोजगार मेला
19 सितंबर को देश के युवाओं को 51 हजार से ज्यादा सरकारी नौकरियों के नियुक्ति पत्र देंगे। यह कार्यक्रम दोपहर 12:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगा। इस दौरान पीएम मोदी नए नियुक्त युवाओं को संबोधित भी करेंगे। 20वां रोजगार मेला देशभर में 45 अलग-अलग जगहों पर आयोजित किया जाएगा। इस दौरान चुने गए युवाओं को भारत सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों में नियुक्ति मिलेगी। इनमें राजस्व विभाग, रेल मंत्रालय, गृह मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, वित्तीय सेवा विभाग और रक्षा मंत्रालय समेत कई विभाग शामिल हैं।

20वें मेले से आंकड़ा पहुंचेगा 12.75 लाख
सरकार के मुताबिक, रोजगार मेले का उद्देश्य युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना और उन्हें देश के विकास में ज्यादा भागीदारी का मौका देना है। 20वें रोजगार मेले के बाद अलग-अलग सरकारी विभागों और संगठनों में करीब 12.75 लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जा चुके होंगे।

अक्टूबर 2022 में शुरू हुआ था रोजगार मेला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 अक्टूबर 2022 को रोजगार मेले का पहला चरण शुरू किया था। उस समय उन्होंने कहा था कि सरकार का लक्ष्य 2023 के अंत तक देश के युवाओं को 10 लाख सरकारी नौकरियां देना है। लेकिन यह आंकड़ा नहीं छुआ जा सका और नवंबर 2023 तक 11 रोजगार मेलों में 7 लाख से ज्यादा युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जा चुके थे।

2025 में पूरा हुआ था 11 लाख का आंकड़ा
रोजगार मेले के जरिए 11 लाख नियुक्ति पत्र देने का आंकड़ा 2025 में पूरा हुआ था। इसके बाद लोकसभा चुनाव से पहले 12 फरवरी 2024 को 12वां रोजगार मेला आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में सबसे ज्यादा 1 लाख नियुक्ति पत्र बांटे गए थे।

अलग-अलग सरकारी विभागों में मिलेगी नौकरी
20वें रोजगार मेले में चुने गए युवा केंद्र सरकार के अलग-अलग विभागों और संगठनों में काम शुरू करेंगे। सरकार का कहना है कि रोजगार मेले के जरिए युवाओं को सरकारी सेवाओं से जोड़ने और देश के विकास में उनकी भागीदारी बढ़ाने पर लगातार ध्यान दिया जा रहा है।

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