Saturday, June 27, 2026
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NATIONAL : बंगाल चुनाव में पहली बार किसी भी बूथ पर नहीं होगा री-पोल, तमिलनाडु में भी कमाल

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बंगाल के चुनावी इतिहास में हिंसा, मारपीट, हमला, बूथ कैंप्चरिंग, बमबाजी जैसी घटनाओं का एक लंबा फेहरिस्त रहा है. लेकिन इस बार का चुनाव बहुत हद तक शांतिपूर्ण बीता है. मुर्शिदाबाद, दक्षिण दिनाजपुर और आसनसोल में कुछ जगहों से झड़प की खबरें सामने आई, लेकिन कुल मिलाकर बंगाल में पहले चरण का मतदान शांतिपूर्ण ही बीता. इस शांतिपूर्ण चुनाव का यह असर है कि बंगाल में पहली बार किसी भी बूथ पर दोबारा वोटिंग नहीं होगी. 

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 – पहला चरण

  • कुल मतदाता – 3,60,77,171 (3.61 करोड़)
  • वोटिंग % – 92.88 %
  • कुल मतदान करने वाले लोग – 3,35,08,476 (3.35 करोड़)

पहले चरण में 152 सीटों की 44376 बूथों पर वोटिंग

बंगाल चुनाव के पहले चरण में 152 विधानसभा की 44376 बूथों पर मतदान हुआ है. बंपर वोटिंग ने तो नया रिकॉर्ड बनाया ही, साथ ही बंगाल में ऐसा पहली बार हुआ जब चुनाव आयोग को किसी सीट पर फिर से वोटिंग करवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. 

फॉर्म 17ए की जांच के बाद रि-पोल की सिफारिश नहीं

भारतीय निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल के पहले चरण और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव सही ढंग से संपन्न कराए हैं. आयोग ने शनिवार को जानकारी दी कि फॉर्म 17ए और अन्य दस्तावेजों की जांच के बाद किसी भी मतदान केंद्र पर पुनर्मतदान की सिफारिश नहीं की गई.

फॉर्म 17ए की जांच की प्रक्रिया पूरी
निर्वाचन आयोग ने बताया कि पश्चिम बंगाल में हुए चुनावों के प्रथम चरण और तमिलनाडु में सभी सीटों पर हुए मतदान के बाद फॉर्म 17ए सहित मतदान से जुड़े दस्तावेजों की जांच पूरी कर ली है. यह प्रक्रिया शुक्रवार को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई.

NATIONAL : रेल में कंफर्म मिलेगा टिकट, गर्मियों में चलेंगी 18 हजार 262 समर स्पेशल ट्रेन

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भारतीय रेलवे ने गर्मियों में बढ़ती भीड़ को देखते हुए बड़ा फैसला लिया है और 15 अप्रैल से 15 जुलाई 2026 के बीच 18,262 समर स्पेशल ट्रेन ट्रिप्स चलाने का ऐलान किया है.

अप्रैल खत्म होने को है और मई में बच्चों के स्कूलों की छुट्टियां शुरू हो जाती है और इसी बीच काफी लोग घूमने या फिर अपने घर जाने की सोचते हैं, जिसके चलते ट्रेन में जमकर भीड़ हो जाती है और सफर मुश्किलों से भर जाता है, लेकिन अब भारतीय रेलवे ने गर्मियों की छुट्टियों में बढ़ती भीड़ को देखते हुए यात्रियों के लिए बड़ा फैसला लिया है. भारतीय रेलवे के मुताबिक, 15 अप्रैल से 15 जुलाई 2026 के बीच कुल 18 हजार 262 समर स्पेशल ट्रेन ट्रिप्स चलाने की घोषणा की है. इससे यात्रियों को कंफर्म टिकट मिलने में आसानी होगी और साथ ही ट्रेनों में भीड़ कम होगी.

रेलवे के मुताबिक, ये स्पेशल ट्रेनें खास तौर पर पीक सीजन को ध्यान में रखकर चलाई जा रही हैं. अभी की बात करें तो अब तक 11 हजार 878 ट्रिप्स की घोषणा की जा चुकी है और साथ ही बाकी ट्रेनों की जानकारी भी जल्द जारी की जाएगी. Ministry of Railways का कहना है कि इस बार पूरी तैयारी के साथ योजना बनाई गई है, जिसमें कोच की संख्या बढ़ाना, टाइम टेबल को बेहतर करना शामिल है.

किन शहरों को मिलेगा फायदा?

इन स्पेशल ट्रेनों से देश के बड़े और छोटे शहरों के बीच सफर आसान होगा जैसे….

नई दिल्ली
मुंबई
सूरत
अहमदाबाद
बैंगलुरु
स्टेशनों पर खास इंतजाम होंगे

इसके साथ ही यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे ने स्टेशनों पर भी कई सुधार किए हैं. Western Railway ने Udhna Railway Station पर रियल-टाइम क्राउड मैनेजमेंट सिस्टम शुरू किया है, जिससे प्लेटफॉर्म पर भीड़ को नियंत्रित किया जा सके.

इसके अलावा जैसे…

Railway Protection Force (RPF) के जवान यात्रियों को सुरक्षित तरीके से ट्रेन में चढ़ने में मदद कर रहे हैं.
प्लेटफॉर्म पर भीड़ को कंट्रोल किया जा रहा है.
बोर्डिंग और सीटिंग प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाया गया है.
यात्रियों को बेहतर गाइडेंस और सहायता दी जा रही है.

NATIONAL : उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन आज जयपुर के दौरे पर हैं। यहां वह राजस्थान विश्वविद्यालय के 35वें दीक्षांत समारोह में शमिल होंगे।

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उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन राजस्थान विश्वविद्यालय के 35वें दीक्षांत समारोह और अन्य कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए शनिवार को जयपुर का दौरा करेंगे।

“दीक्षांत समारोह में शामिल होने के अलावा, उपराष्ट्रपति जयपुर में भगवान महावीर कैंसर अस्पताल और अनुसंधान केंद्र द्वारा आयोजित 23वें कैंसर सर्वाइवर्स डे में भी भाग लेंगे,” अधिकारी ने एक बयान में कहा।

इससे पहले गुरुवार को, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने उत्तराखंड के एम्स ऋषिकेश के छठे दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता की और उन्हें याद दिलाया कि दीक्षांत समारोह न केवल वर्षों के अनुशासित प्रयास और बलिदान की परिणति का प्रतीक है, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी की शुरुआत भी है।

उन्होंने स्नातकों से आग्रह किया कि वे समर्पण और उद्देश्य की भावना के साथ अपने पेशेवर कर्तव्यों को निभाएं।

उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि स्वास्थ्य सेवा एक सार्वजनिक जिम्मेदारी है और चिकित्सा पेशेवर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने युवा स्नातकों से निवारक देखभाल, ग्रामीण संपर्क, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से योगदान देने और सहानुभूति, ईमानदारी और सेवा के मूल्यों द्वारा निर्देशित रहने का आग्रह किया।

ऋषिकेश के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को एक वैश्विक चिंतन और उपचार केंद्र और हिमालय के प्रवेश द्वार के रूप में रेखांकित करते हुए, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कहा कि ऐसा वातावरण दीक्षांत समारोह की गंभीरता को और भी गहरा अर्थ देता है।

महामारी से उत्पन्न चुनौतियों पर विचार करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने लचीलापन, नवाचार और प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया।

उन्होंने भारत के व्यापक टीकाकरण अभियान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 140 करोड़ से अधिक नागरिकों को मुफ्त टीके लगाए गए, जिससे स्वास्थ्य सेवा तक समान पहुंच सुनिश्चित हुई, खासकर कम सुविधा वाले क्षेत्रों में।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय वैज्ञानिकों ने टीके लाभ कमाने के लिए नहीं, बल्कि मानवता के कल्याण के लिए विकसित किए हैं।

उपराष्ट्रपति ने भारत की ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल के माध्यम से निभाई गई वैश्विक जिम्मेदारी पर भी जोर दिया, जिसके तहत 100 से अधिक देशों को टीके उपलब्ध कराए गए।

उन्होंने कहा कि यह पहल “वसुधैव कुटुंबकम” (विश्व एक परिवार है) की भावना को दर्शाती है और एक दयालु और जिम्मेदार वैश्विक भागीदार के रूप में भारत की भूमिका को मजबूत करती है।

NATIONAL : मणिपुर के उखरुल में फायरिंग से 3 की मौत, मिलिटेंट्स ने कई घर जलाए, नगा-कुकी समुदाय में तनाव

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मणिपुर के उखरुल जिले में शुक्रवार सुबह प्रतिद्वंद्वी जनजातीय समुदायों के सशस्त्र समूहों के बीच गोलीबारी की दो अलग-अलग घटनाओं में तीन लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों के मुताबिक, पहली घटना जिले के मुल्लम गांव के पास हुई, जहां सुरक्षाबलों ने पूर्वाह्न करीब 11.25 बजे दो शव बरामद किए। मृतकों की पहचान एल. सितल्हौ और पी. हाओलाई के रूप में हुई है।

दोनों के शरीर पर गोलियों के निशान पाए गए और वे छलावरण (कैमोफ्लाज) वर्दी में थे। इससे पहले, सुबह करीब 5.30 बजे तांगखुल नगा बहुल क्षेत्र के मुल्लम गांव में सशस्त्र उग्रवादी समूहों के बीच भारी गोलीबारी हुई थी। इस दौरान गांव के बाहरी हिस्से में स्थित कुछ घरों में भी आग लगा दी गई। इस बीच, कुकी ऑर्गेनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट ने मुल्लम और सोंगफल गांवों में दो “ग्राम स्वयंसेवकों” की हत्या और घरों को जलाए जाने की घटना की निंदा की है। संगठन ने इस मामले में तुरंत प्राथमिकी दर्ज करने और समयबद्ध जांच की मांग की है।एक अलग घटना में शुक्रवार तड़के उखरुल जिले के सिनाकेइथेई गांव के पास सशस्त्र उग्रवादियों की ओर से घात लगाकर किए गए हमले में कामजोंग जिले के चत्रिक खुल्लेन निवासी 29 वर्षीय एच जमंग की मौके पर ही मौत हो गई। तांगखुल नागा समुदाय की शीर्ष संस्था तांगखुल नागा लॉन्ग ने जामांग की हत्या पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

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संस्था ने अपने बयान में कहा कि सिराराखोंग और सिनाकेइथेई क्षेत्र में लगातार गतिविधियों तथा बाधाओं के कारण नागा ग्राम रक्षकों को गश्त पर तैनात किया गया था। तांगखुल नागा संगठनों ने इस हमले के लिए कुकी उग्रवादियों को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि कुकी संगठनों ने किसी भी प्रकार की संलिप्तता से इनकार किया है।

NATIONAL : रिलायंस के नतीजे जारी, मुनाफे में गिरावट, ₹6 डिविडेंड देने का ऐलान, हालांकि, मुनाफे में कमी के बावजूद कंपनी के रेवेन्यू में शानदार उछाल आया

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रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं, जिसमें कंपनी का प्रदर्शन मिश्रित रहा. एक तरफ जहां मुनाफे में गिरावट दर्ज की गई, वहीं दूसरी ओर रेवेन्यू में मजबूत बढ़ोतरी देखने को मिली. वैश्विक चुनौतियों के बीच कंपनी ने अपने विविध कारोबार के दम पर संतुलन बनाए रखा.

मुनाफा 13% घटा, 16,971 करोड़ रुपये पर आया

मार्च तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 13% घटकर 16,971 करोड़ रुपये रह गया. पिछले साल इसी तिमाही में यह 19,407 करोड़ रुपये था. वहीं, पिछली तिमाही के मुकाबले भी मुनाफे में करीब 8% की गिरावट दर्ज की गई.

रेवेन्यू में 13% की बढ़त, 2.98 लाख करोड़ तक पहुंचा

हालांकि, कंपनी की कुल आय में मजबूती बनी रही. ऑपरेशंस से रेवेन्यू सालाना आधार पर 13% बढ़कर 2.98 लाख करोड़ रुपये हो गया. यह इशारा करता है कि कंपनी के मुख्य बिजनेस सेगमेंट अब भी मजबूत प्रदर्शन कर रहे हैं.

EBITDA और मार्जिन पर दबाव

ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस की बात करें तो EBITDA में मामूली गिरावट आई और यह 0.3% घटकर 48,588 करोड़ रुपये रह गया. वहीं, EBITDA मार्जिन 200 बेसिस पॉइंट्स गिरकर 14.9% पर आ गया, जो लागत दबाव और बाजार की चुनौतियों को दर्शाता है.

डिविडेंड का ऐलान

कंपनी के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए प्रति शेयर 6 रुपये के डिविडेंड की सिफारिश की है, जिससे निवेशकों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है. 

कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी ने कहा कि पूरे वित्त वर्ष के दौरान भू-राजनीतिक अस्थिरता, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और बदलते वैश्विक व्यापार माहौल का असर कारोबार पर पड़ा. उन्होंने कहा कि कंपनी की विविध बिजनेस मौजूदगी और घरेलू बाजार में मजबूत पकड़ ने इन चुनौतियों से निपटने में मदद की.

मुख्य कारोबार से मिली मजबूती

कंपनी के O2C (ऑयल-टू-केमिकल्स), डिजिटल सेवाएं और रिटेल सेगमेंट ने डबल डिजिट रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की. डिजिटल और रिटेल कारोबार की मजबूती ने ऊर्जा क्षेत्र में आई कमजोरी की भरपाई की.

जियो का प्रदर्शन दमदार, मुनाफा 13% बढ़ा

रिलायंस जियो ने इस तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया. कंपनी का टैक्स के बाद मुनाफा 13% बढ़कर 7,935 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल 7,022 करोड़ रुपये था.

ARPU और यूजर बेस में भी इजाफा

जियो का औसत प्रति यूजर रेवेन्यू (ARPU) 3.8% बढ़कर 214 रुपये हो गया. साथ ही, कंपनी का ग्राहक आधार लगातार मजबूत हो रहा है, जिससे भविष्य में डिजिटल सेवाओं से और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है.

आगे की रणनीति: डिजिटल और AI पर फोकस

जियो के चेयरमैन आकाश अंबानी ने संकेत दिया कि कंपनी अब एडवांस कनेक्टिविटी और कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सेवाओं को देशभर में विस्तार देने की दिशा में काम कर रही है.

रिलायंस इंडस्ट्रीज का चौथी तिमाही का प्रदर्शन यह दिखाता है कि वैश्विक दबावों के बावजूद कंपनी की बुनियादी ताकत बरकरार है. मुनाफे में गिरावट जरूर चिंता का विषय है, लेकिन रेवेन्यू ग्रोथ और डिजिटल बिजनेस की मजबूती भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत दे रही है.

NATIONAL : किसानों के लिए गुड न्यूज, नहीं बढ़ेंगे खाद के दाम; 25 लाख टन यूरिया आयात करने जा रही सरकार

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 नई दिल्ली। खाड़ी संकट के कारण उर्वरकों की वैश्विक कीमतों में आई तेजी के बावजूद किसानों को सस्ती दरों पर खाद उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है।

खरीफ सीजन से पहले केंद्र सरकार एक साथ 25 लाख टन यूरिया आयात करने जा रही है, जो देश के कुल वार्षिक आयात का लगभग एक चौथाई है।

आयात की जिम्मेदारी इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) को दी गई है। खास बात यह है कि यह यूरिया महज दो महीने पहले की तुलना में लगभग दोगुनी कीमत पर खरीदा जा रहा है, मगर इसका बोझ किसानों पर नहीं डाला जाएगा।

ग्लोबल मार्केट से महंगा यूरिया खरीद रही सरकार

खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित है। इससे अमोनिया और यूरिया जैसे उर्वरकों की उपलब्धता घटने के साथ उनकी कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।

यही वजह है कि भारत को इस बार यूरिया 935 से 959 डॉलर प्रति टन की दर पर खरीदना पड़ रहा है, जबकि दो महीने पहले यही करीब पांच सौ डॉलर प्रति टन थी।

सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि अनुदानित दर पर मिलने वाली खाद की कीमतों में कोई बदलाव नहीं होगा। यूरिया का 45 किलो का बैग 266.50 रुपये एवं डीएपी का 50 किलो का बैग 1350 रुपये में ही उपलब्ध रहेगा।अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने के बावजूद किसानों को राहत देने के लिए सरकार अतिरिक्त सब्सिडी का बोझ उठाएगी। इसी क्रम में केंद्रीय कैबिनेट ने इसी महीने खरीफ सीजन के लिए 41,533.81 करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी को मंजूरी दी है, जो पिछले साल से चार हजार करोड़ अधिक है।

हालांकि इसका सीधा असर सरकारी कोष पर पड़ेगा। जब अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ती हैं और घरेलू कीमतें स्थिर रखी जाती हैं तो दोनों के बीच का अंतर सरकार को सब्सिडी के रूप में देना पड़ता है।

देश में अभी यूरिया का संकट नहीं है, लेकिन निरंतरता को बनाए रखने के लिए यह आयात जरूरी है। सरकार ने आयात प्रक्रिया को केंद्रीकृत रखते हुए इंडियन पोटाश लिमिटेड को प्रमुख एजेंसी बनाया है।

बड़े पैमाने पर एकमुश्त खरीद का फायदा यह भी मिला कि टेंडर में जरूरत से ज्यादा आपूर्ति के प्रस्ताव आए और प्रतिस्पर्धा के चलते सप्लायरों ने न्यूनतम दर पर सौदा करने को सहमति दी।

रूस-ओमान से खरीद रहे यूरिया
आपूर्ति में निरंतरता के लिए रूस, मिस्त्र, नाइजीरिया, ओमान, इंडोनेशिया एवं मलेशिया आदि से यूरिया खरीदा जाएगा। पारंपरिक समुद्री मार्गों में बाधा को देखते हुए केप ऑफ गुड होप जैसे वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है, ताकि समय पर खेप पहुंच सके। इतनी बड़ी खरीद का असर वैश्विक बाजार पर पड़ सकता है।

भारत सबसे बड़ा यूरिया आयातक देश है और एक बार में इतनी बड़ी मात्रा खरीदने से अंतरराष्ट्रीय कीमतों में और तेजी आ सकती है। इससे अन्य देशों के लिए उर्वरक हासिल करना महंगा और कठिन हो सकता है।

देश में अभी उर्वरकों का भंडार बेहतर है। पिछले वर्ष मार्च में 138.79 लाख टन का स्टॉक था। इस बार अभी 180.04 लाख टन है, जो 29.72 प्रतिशत अधिक है।

WORLD : US में बोले दत्तात्रेय होसबाले: मुस्लिम हमारे अपने, हिंदू ही थे इनके पूर्वज; RSS के सरकार्यवाह के संकेत क्या?

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने भारतीय मुसलमानों को लेकर बड़ी बात कही है। अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी में जब उनसे मुस्लिम समुदाय के प्रति संघ के दृष्टिकोण पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बहुत ही बेबाकी से अपनी बात रखी। होसबोले ने कहा कि भारत के 99.99 फीसदी मुसलमानों के पूर्वज हिंदू ही थे और वे इसी देश की मिट्टी की संतान हैं।

होसबाले ने क्या-क्या कहा? 
होसबाले ने कहा कि केवल पूजा पद्धति बदल लेने से किसी व्यक्ति की राष्ट्रीयता या उसके पूर्वज नहीं बदल जाते। उन्होंने कहा, ‘भारतीय मुसलमानों के पूर्वज भारतीय ही थे और वे हिंदू थे। इसलिए, भारत के लगभग सभी मुसलमान हिंदू मूल के ही वंशज हैं। हमारा यह मानना है कि वे हमारे समाज का अभिन्न अंग हैं।’ उन्होंने समझाया कि भले ही समय के साथ उनके धर्म या इबादत करने के तरीकों में बदलाव आया हो, लेकिन उनकी सभ्यता की जड़ें और उनकी राष्ट्रीय पहचान आज भी वही है जो सदियों पहले थी। संघ इसी विचार को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है।

‘चालबाजियों से समुदाय के बीच पैदा हुआ तनाव’
उन्होंने कहा कि कुछ विशेष प्रकार की चालबाजियों और राजनीतिक हितों के कारण समय-समय पर समुदायों के बीच तनाव पैदा हुए हैं। होसबाले का मानना है कि इन गलतफहमियों को दूर करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए मुस्लिम नेतृत्व के साथ एक निरंतर और व्यापक संवाद की आवश्यकता है।

आरएसएस के वरिष्ठ नेता ने जानकारी दी कि पिछले कुछ वर्षों से संघ ने इस दिशा में सक्रिय कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा, ‘पिछले कुछ वर्षों में आरएसएस ने मुस्लिम समुदाय के प्रमुखों और बौद्धिक नेतृत्व के साथ संवाद की प्रक्रिया शुरू की है। इसका मुख्य उद्देश्य उन सभी शंकाओं और गलतफहमियों को दूर करना है, जो दशकों से किसी न किसी कारणवश बनी हुई थीं।’ 

होसबाले पर जयराम रमेश ने कसा तंज
अमेरिका के दौरे पर गए आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के एक बयान पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। होसबाले ने वाशिंगटन में कहा था कि आरएसएस कोई अमेरिकी श्वेत वर्चस्ववादी समूह जैसा संगठन नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और सेवा पर आधारित संगठन है। इस पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पलटवार करते हुए कहा कि आरएसएस दिखावे का राष्ट्रवाद करता है और विदेश में स्वीकार्यता पाने के लिए बेताब है। रमेश ने आरोप लगाया कि आरएसएस की विचारधारा यूरोपीय फासीवादी आंदोलनों से प्रेरित है। यह भारत की विविधता और एकता के विचार के खिलाफ है।

NATIONAL : उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के लिए अगले चार दिन बेहद भारी, चलेगी भीषण लू

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भारत के कई राज्यों में तेजी से गरमी बढ़ रही है। बीते कुछ दिनों में लू और गरमी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। दोपहर की धूप अभी से झुलसाने लगी है। इस बीच भारतीय मौसम विभाग ने अलर्ट जारी कर कहा है कि कई राज्यों में अगले चार दिनों तक यही स्थिति बनी रह सकती है।

उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी भागों और मध्य भारत में प्रचंड गर्मी ने कोहराम मचा दिया है। आसमान से बरसती आग और औद्योगिक इकाइयों व वाहनों से फैलते प्रदूषण ने दिल्ली-एनसीआर समेत बड़े शहरों में दुश्वारियां और बढ़ा दी हैं। ज्यादातर इलाकों में लू चल रही है और सुबह 10 बजे के बाद से ही घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। अभी तीन से चार दिन यही स्थित बनी रहने और लू चलने की प्रबल संभावना है। हालांकि, उत्तर-पश्चिम हिमालयी क्षेत्रों और पूर्वोत्तर में गरज-चमक के साथ बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी से मौसम खुशनुमा बना हुआ है।

इन राज्यों में चलेगी लू, नहीं मिलेगी गरमी से राहत
भारतीय मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के गंगा के मैदानी इलाकों में पिछले कई दिनों से लू चल रही है। इससे लू की स्थिति और भी गंभीर हो गई। आईएमडी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, असम, अरुणाचल, मणिपुर, कर्नाटक और महाराष्ट्र में कुछ जगहों पर बारिश और तेज हवाएं चलने से लोगों को गर्मी से राहत भी मिली।

गरमी बढ़ाने वाला अल नीनो इस साल फिर ढाएगा कहर
संयुक्त राष्ट्र ने चेताया है कि पिछली बार दुनिया का तापमान रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने वाली मौसमी घटना अल नीनो के इस साल 2026 के मध्य में फिर से लौटने की उम्मीद है। जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र की मौसम एवं जलवायु एजेंसी विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने कहा कि आगामी मई से जुलाई के बीच अल नीनो के हालात बनने के पूरे आसार हैं और इसके शुरुआती संकेत भी दिखने लगे हैं।

यह मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में सतह के तापमान को बढ़ाती है। इससे हवाओं, दबाव और वर्षा के पैटर्न में परिवर्तन आता है। मौसम की  स्थिति अल नीनो और उसके विपरीत ला नीना और सामान्य स्थिति के बीच बदलती रहती है। पिछले अल नीनो के कारण 2023 अब तक का दूसरा सबसे गर्म साल और 2024 अब तक का सबसे गर्म साल बना।

भीषण गर्मी की चपेट में यूपी
उत्तर प्रदेश में प्रचंड गर्मी अपने पूरे रंग में है। शुक्रवार को प्रदेश के ज्यादातर इलाके भीषण गर्मी के चपेट में रहे। तपिश के प्रकोप से अब जनजीवन और लोगों का कामकाज प्रभावित होने लगा है। प्रयागराज, वाराणसी, हरदोई, आगरा, मेरठ,अलीगढ़ और शाहजहांपुर जैसे शहरों भयानक लू के थपेड़ों का प्रकोप रहा और दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। 45.2 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान के साथ प्रयागराज प्रदेश में सर्वाधिक गर्म रहा। वहीं 44.3 डिग्री, बांदा और हमीरपुर में 44.2 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा।

तेजी से बढ़ रहा समुद्री सतह का तापमान
डब्ल्यूएमओ ने कहा कि उसके नवीनतम मासिक वैश्विक मौसमी जलवायु अपडेट में समुद्र की सतह का तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जो मई-जुलाई की शुरुआत में अल नीनो की स्थिति की संभावित वापसी की तरफ इशारा करता है। पूर्वानुमानों से संकेत मिलता है कि अगले तीन महीनों में दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान रहेगा। 

डब्ल्यूएमओ ने कहा कि हालांकि, जलवायु परिवर्तन से अल नीनो घटनाओं की तीव्रता नहीं बढ़ती है, लेकिन यह इससे जुड़े असर को बढ़ा सकता है, क्योंकि गर्म महासागर और वायुमंडल से लू और भारी वर्षा जैसी चरम मौसम घटनाओं के लिए ऊर्जा और नमी की उपलब्धता बढ़ जाती है।़

NATIONAL : भागवत बोले- भारत विश्वगुरु जरूर बनेगा, कोई संदेह नहीं:राम मंदिर बनने को लेकर भी लोग शक करते थे, वैसे ही यह लक्ष्य भी अब तय है

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राष्ट्रीय स्वयं सेवक प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि भारत निश्चित रूप से विश्वगुरु बनेगा और इस पर किसी को संदेह नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक समय था, जब लोग अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण को लेकर संशय में रहते थे। इसे असंभव मानते थे।

लेकिन आज वह मंदिर सबके सामने साक्षात खड़ा है। ठीक उसी प्रकार, भारत का विश्वगुरु के रूप में पुनरुत्थान भी पूरी तरह निश्चित है और इस यात्रा को रोका नहीं जा सकता। भागवत ने यह बात नागपुर में नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट परिसर में बनने वाले भारत दुर्गा शक्ति स्थल मंदिर के भूमि पूजन कार्यक्रम में कही।

इस मौके पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज, स्वामी मित्रानंदजी महाराज, साध्वी ऋतंभरा और धीरेन्द्र शास्त्री सहित कई धार्मिक नेता भी मौजूद थे।

भारत के भविष्य पर संदेह न करें- भागवत

RSS चीफ ने कहा- देश के भविष्य को लेकर कोई संदेह न रखें और साहस व आत्मनिर्भरता के साथ जीवन जीएं। उनके मुताबिक, अगर लोग अपने संकल्प के अनुसार कदम-दर-कदम आगे बढ़ें, तो भारत मजबूत और नैतिक रूप से सशक्त बनेगा।

उन्होंने कहा कि भारत के विश्वगुरु बनने का सपना निरंतर प्रयासों और सामूहिक अनुशासन के माध्यम से साकार होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस तरह का परिवर्तन वर्तमान पीढ़ी में देखा जा सकता है।

उन्होंने कहा- भारत के भविष्य पर संदेह न करें। साहस और आत्मनिर्भरता के साथ जीएं और इन मूल्यों को अपने दैनिक जीवन में अपनाएं। भारत मजबूत होगा और दुनिया का मार्गदर्शन करेगा। लोगों को संदेह था कि राम मंदिर बनेगा या नहीं, लेकिन यह बन गया। उसी प्रकार भारत का विश्वगुरु बनना निश्चित है।

पश्चिमी चश्मे को उतार फेंकने की जरूरत- भागवत

डॉक्टर भागवत ने कहा कि भारत को यदि वास्तव में समझना है, तो इसे इसकी अपनी सभ्यता और सनातन मूल्यों की दृष्टि से देखना होगा। उन्होंने कहा कि पिछले 150 वर्षों में विकसित हुई पश्चिमी सोच से भारत को नहीं समझा जा सकता। नागरिकों को इस विदेशी विचारधारा की परतों को उतार फेंकना होगा।

यदि हम अपने संकल्प के अनुसार कदम दर कदम आगे बढ़ें, तो भारत मजबूत, सदाचारी और वैश्विक मार्गदर्शक बनेगा। भागवत ने कहा कि भारत को सही मायने में समझने के लिए, लोगों को पहले भारत को गहराई से समझना होगा और फिर उसे अपने दैनिक जीवन में उतारना शुरू करना होगा।

पश्चिमी सोच को त्यागकर भारतीय परंपराओं से जुड़ें- भागवत

आरएसएस प्रमुख ने नागरिकों से पश्चिमी सोच को त्यागने और विचार एवं व्यवहार में भारतीय परंपराओं से दोबार जुड़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन दैनिक जीवन में छोटे, लेकिन सार्थक बदलावों से शुरू होगा, जैसे कि भाषा, पहनावा, खान-पान की आदतें और सांस्कृतिक प्रथाएं।

भारत को जानना, स्वीकार करना और दैनिक जीवन में जीना जरूरी है। इस बात पर जोर देते हुए कि आत्म-साक्षात्कार की ऐसी प्रक्रिया के माध्यम से ही एक मजबूत और आत्मविश्वासी भारत की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है।

NATIONAL : कभी हां, कभी न… अराघची अचानक PAK के लिए रवाना, अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की सुगबुगाहट तेज

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नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट पर कायम गतिरोध और खाड़ी में तीसरे अमेरिकी युद्धपोत के पहुंचने से बढ़ते तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची अचानक शुक्रवार से तीन देशों की यात्रा पर रवाना हुए। उनकी यात्रा का पहला पड़ाव पाकिस्तान है। इसके बाद वह ओमान और रूस भी जाएंगे।

अराघची की यात्रा दोनों पक्षों के बीच शांति वार्ता जल्द शुरू कराने के कूटनीतिक प्रयासों के तहत बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सूत्रों का दावा है कि अराघची के साथ एक छोटा दल भी इस्लामाबाद पहुंचेगा। वहां वे पहले से मौजूद अमेरिकी लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा टीम के साथ बैठक करके शांति वार्ता की रूपरेखा तय करेंगे। इसके बाद उच्चस्तरीय अमेरिकी दल शनिवार रात तक इस्लामाबाद पहुंच सकता है।
अराघची के दौरे को लेकर अमेरिका ने दी प्रतिक्रिया
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने अराघची के दौरे को लेकर कहा कि ईरान के पास समझौता करने का अच्छा मौका है। ईरान को केवल अपना परमाणु हथियार छोड़ना है। इससे पहले गुरुवार को ट्रंप ने भी कहा था कि वह समझौते को लेकर किसी तरह की हड़बड़ी में नहीं हैं। हालांकि, ट्रंप पर ईरान युद्ध जारी रखने के लिए एक मई से पहले संसद की मंजूरी लेने का दबाव बढ़ रहा है। इस मुद्दे पर उनकी अपनी ही पार्टी के कई सांसद विरोध में हैं।अराघटी ने रखी ये मांग
इससे पहले अराघची ने अमेरिका से विभिन्न देशों में फ्रीज ईरान की 11 खरब डॉलर की रकम को डीफ्रीज करने की मांग की। उन्होंने इसके लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया और युद्धविराम खत्म करने की चेतावनी भी दी। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि संपत्ति जारी होने तक होर्मुज पूरी तरह बंद रहेगा। बीते 24 घंटे में केवल पांच मालवाहक जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजर सके हैं।

दौरे से पहले अराघची ने की पाकिस्तान से बात
अमेरिकी सेंटकाम ने कहा है कि ईरान के दो जहाजों को इंटरसेप्ट किया है, जो गुपचुप तरीके से होर्मुज पार करने का प्रयास कर रहे थे। प्रेट्र के अनुसार, तीन देशों के दौरे से पहले अराघची ने पाकिस्तानी समकक्ष इसहाक डार और पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ चर्चा की।

हालांकि ईरानी पक्ष ने बातचीत का विस्तृत ब्योरा साझा नहीं किया, लेकिन पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय घटनाक्रम, युद्धविराम और अमेरिका-ईरान संवाद को आगे बढ़ाने के प्रयासों पर विचार-विमर्श किया।

डार ने इस दौरान लंबित मुद्दों के समाधान के लिए निरंतर संवाद और सहयोग को क्षेत्रीय शांति व स्थिरता के लिए अनिवार्य बताया। डान अखबार के अनुसार, अराघची के साथ एक छोटा वार्ता दल भी शामिल होगा। हालांकि, शांति वार्ता का नेतृत्व करनेवाले ईरानी संसद प्रमुख एमबी गलीबाफ नहीं आएंगे।

अराघची ने चेताया, 48 घंटे में खत्म कर देंगे युद्धविराम
अराघची ने चेतावनी दी है कि होर्मुज तब तक बंद रहेगा, जब तक ईरान की करीब 11 खरब डॉलर की फ्रीज संपत्ति जारी नहीं की जाती। उन्होंने एक्स पर एक वीडियो संदेश में कहा कि अगर अगले 48 घंटों के भीतर कोई ठोस प्रस्ताव नहीं आता है, तो मौजूदा युद्धविराम भी टूट सकता है। इससे पश्चिम एशिया में तनाव तेजी से बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान पर प्रतिबंधों के चलते विभिन्न देशों को ईरानी तेल व गैस निर्यात के बदले मिलनेवाली 50 से 100 अरब डालर की रकम उन्हीं देशों के बैंकों में जब्त पड़ी हुई है। ईरान ने शांति समझौते के लिए इस रकम को जारी करने की भी शर्त रखी है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर उस पर कई सालों से आर्थिक पाबंदियां लगी हैं।

युद्ध मंजूरी के लिए ट्रंप के पास केवल छह दिन शेष
न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के पास ईरान युद्ध को जारी रखने के लिए केवल छह दिन बचे हैं। अमेरिकी संविधान के अनुसार, किसी भी युद्ध को 60 दिन में संसद की मंजूरी लेनी पड़ती है। उन्होंने 28 फरवरी को शुरू युद्ध के बारे में संसद को दो मार्च को सूचित किया, जिसके चलते एक मई को 60 दिनों की अवधि पूरी हो रही है। इससे पहले उन्हें मंजूरी लेनी होगी।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध को लेकर संसद में ट्रंप की स्थिति कमजोर मानी जा रही है। 100 सदस्यों वाली सीनेट में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के 53 सांसद हैं, जबकि विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 47 सदस्य हैं। ट्रंप की पार्टी के ही लगभग 10 सांसद ईरान युद्ध के विरोध में आवाज उठा चुके हैं।

हालांकि, ट्रंप के पास एक और विकल्प है। राष्ट्रपति एक बार के लिए 30 दिन का अतिरिक्त समय ले सकते हैं, लेकिन यह सिर्फ सैनिकों की सुरक्षित वापसी के लिए होता है, न कि युद्ध जारी रखने के लिए।

2003 के बाद खाड़ी में सबसे बड़ा अमेरिकी सैन्य जमावड़ा
रायटर के अनुसार, खाड़ी में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी को और मजबूत करते हुए तीसरा विमानवाहक पोत भी तैनात कर दिया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि 2003 के बाद यह पहला मौका है, जब एक साथ तीन अमेरिकी विमानवाहक पोत इस क्षेत्र में सक्रिय हैं।

हेगसेथ के अनुसार, इस संयुक्त तैनाती में लगभग 200 लड़ाकू विमान, युद्धपोतों का बेड़ा और हजारों नौसैनिक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ई्रान को पता है कि उनके पास अब भी समझौते की खिड़की खुली हुई है। वे चाहें तो वार्ता की मेज पर बुद्धिमानी से चुनाव कर सकते हैं। उन्हें बस इतना करना है कि सार्थक और साबित तरीके से परमाणु हथियार छोड़ दें।

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