गुरुग्राम में लिव-इन पार्टनर ने चरित्र पर शक के चलते बायोटेक छात्रा को बेरहमी से पीटा. पीड़िता त्रिपुरा की रहने वाली है और जीडी गोयनका यूनिवर्सिटी में पढ़ती है. गंभीर हालत में उसे एम्स रेफर किया गया. आरोपी दिल्ली निवासी 19 वर्षीय शिवम को पुलिस ने गिरफ्तार कर जांच शुरू कर दी है.गुरुग्राम से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक लिव-इन पार्टनर ने अपनी गर्लफ्रेंड के साथ बेरहमी से मारपीट की. पीड़िता गुरुग्राम की नामी जीडी गोयनका यूनिवर्सिटी में बायोटेक की छात्रा है और त्रिपुरा की रहने वाली है. गंभीर हालत में उसे इलाज के लिए दिल्ली एम्स में भर्ती कराया गया है.
पुलिस के मुताबिक आरोपी युवक दिल्ली का रहने वाला 19 वर्षीय शिवम है, जिसे गुरुग्राम पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. शुरुआती जानकारी के अनुसार थाना बादशाहपुर क्षेत्र में एक महिला ने फोन पर सूचना दी थी कि उसकी 19 वर्षीय बेटी के साथ उसके लिव-इन पार्टनर ने चरित्र पर शक करते हुए मारपीट की है. सूचना मिलते ही पुलिस सेक्टर 69 स्थित ग्रेट पीजी पहुंची और मौके से ही आरोपी को हिरासत में ले लिया.
डीसीपी साउथ हितेश यादव ने टेलीफोनिक बातचीत में बताया कि पीड़िता को देर रात गंभीर हालत में गुरुग्राम के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. डॉक्टरों ने हालत को देखते हुए उसे दिल्ली एम्स रेफर कर दिया. पुलिस के अनुसार पीड़िता और आरोपी की मुलाकात सितंबर 2025 में हुई थी. दोनों के परिवारों के बीच शादी की बात भी चल रही थी. लेकिन आरोपी युवक अपनी गर्लफ्रेंड पर शक करता था.
बीती रात किसी बात को लेकर दोनों के बीच बहस हुई, जिसके बाद विवाद बढ़ गया और आरोपी ने बेरहमी से मारपीट शुरू कर दी. पीड़िता के शरीर पर गंभीर चोट के निशान पाए गए हैं. पुलिस अब पूरे मामले की तफ्तीश कर रही है.
केरल में एक महिला के पेट से सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट मिला है, जो उनकी 2021 की सर्जरी के दौरान पेट में ही रह गया था. पीड़िता के बेटे ने अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुआवजे की मांग की है. स्वास्थ्य मंत्री ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए दोषियों को निलंबित करने की बात कही है.
केरल में अलाप्पुझा जिले के पुन्नाप्रा से एक हैरान करने देने वाला मामला सामने आया है. इलाके की रहने वाली उषा जोसेफ के पेट के अंदर एक सर्जिकल कैंची (आर्टरी फोरसेप्स) मिली. 5 साल पहले महिला की एक सर्जरी हुई थी और तब से ही ये इंस्ट्रूमेंट उसके पेट में था.
न्यूज एजेंसी के मुताबिक, उषा जोसेफ की मई 2021 में वंदनम स्थित अलाप्पुझा मेडिकल कॉलेज में गर्भाशय फाइब्रॉइड निकालने के लिए सर्जरी हुई थी. उसके बेटे शिबिन ने बताया कि सर्जरी के बाद से ही उषा के पेट दर्द में दर्द था. पीड़िता के बेटे का आरोप है कि उन्होंने कई बार उसी अस्पताल के डॉक्टरों से संपर्क किया, जहां उषा की सर्जरी हुई थी. लेकिन दर्द की वजह पता नहीं चल पाई. जब उषा ने एक डॉक्टर की सलाह पर गुर्दे की पथरी होने के शक में एक्स-रे करवाया, तो उसके पेट में आर्टरी फोरसेप्स होने का पता चला.
एक्स-रे में कथित तौर पर एक आर्टरी फोरसेप्स दिखाई दिया देने पर डॉक्टरों ने अगले हफ्ते इसे निकालने की सलाह दी. ऐसे में उषा जोसेफ को कोच्चि के एक निजी अस्पताल में स्थानांतरित किया गया.शिबिन ने कहा, ‘हम आगे कोई समस्या नहीं चाहते थे और एक निजी अस्पताल में आ गए. यहां के डॉक्टर स्कैन करेंगे और असल स्थिति का पता लगाकर जल्द ही सर्जरी करेंगे. मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने हमसे कहा कि अगर हम चाहें तो शिकायत दर्ज करा सकते हैं. हमने अब अंबालापुझा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करने का फैसला किया है.’
पीड़िता के बेटे का आरोप है कि मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने अपनी इस गलती के लिए मुआवजा देने से इनकार कर दिया है. उन्होंने अलाप्पुझा मेडिकल कॉलेज की रिटायर्ड सर्जन डॉ. ललितांबिका सर्जरी के दौरान गलती करने का आरोप लगाया है. जबकि डॉ. ललितांबिका ने सर्जरी करने के दावे को खारिज किया है.
डॉ. ललितांबिका ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘सर्जरी मेरी रिटायरमेंट से ठीक पहले हुई थी, जब मैं किसी बड़े मामले को नहीं देख रही थी. यूनिट हेड होने के नाते मेरा नाम दर्ज किया गया था. साथ ही, सर्जरी कोविड काल के दौरान हुई थी और मैं उसमें व्यस्त थी.’
सर्जरी से पहले मरीजों से पैसे लेने के आरोपों पर उन्होंने कहा, ‘मैंने किसी भी सर्जरी के लिए मरीजों से कोई पैसा नहीं लिया. आप मेरे देखे गए किसी भी मरीज से पूछ सकते हैं.’सर्जन ने ये भी दावा किया कि उषा के पेट में कैंची नहीं बल्कि बहुत छोटे साइज का ‘मॉस्किटो फोरसेप्स’ था. उनके मुताबिक एक्स-रे में ये बढ़ा हुआ दिखाई देता है. मॉस्किटो एक छोटा सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट है जिसका इस्तेमाल छोटी रक्त वाहिकाओं को दबाने के लिए किया जाता है. हालांकि उन्होंने माना कि ऐसी गलती नहीं होनी चाहिए थी.
सर्जन ने बताया कि पीड़िता की पहले भी सर्जरी हो चुकी थी. इसीलिए ये जांच की जानी चाहिए कि ये इंस्ट्रूमेंट किस सर्जरी में उसके पेट में रह गया. उन्होंने दावा किया कि ये इंस्ट्रूमेंट शरीर में 20 से 30 साल तक रह सकता है.
स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने इस मामले में पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाया है कि जांच के तहत सभी दोषी डॉक्टर और कर्मचारियों को निलंबित किया जाएगा. इस मामले की शुरुआती रिपोर्ट चिकित्सा शिक्षा निदेशक (DME) को रिपोर्ट सौंप दी गई है. जॉर्ज ने बताया कि जांच के तहत कोट्टायम और तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेजों के विशेषज्ञ डॉक्टरों को अलाप्पुझा मेडिकल कॉलेज में प्रतिनियुक्त किया गया है.
उन्होंने कहा कि इस तरह की गलतियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, उन्होंने याद दिलाया कि 2017 में भी ऐसी ही एक घटना सामने आई थी. जॉर्ज ने कहा कि डॉक्टर ये दावा करके इस घटना को कमतर नहीं आंक सकते कि ऐसे इंस्ट्रूमेंट लंबे समय तक शरीर में रह सकते हैं.
दोनों नाबालिग लड़कों पर धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने का प्रकरण दर्ज किया गया है. लड़कों ने बेवजह हरकत को अंजाम दिया. गौसेवकों की शिकायत पर जब मुस्लिम लड़कों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया तो एक लड़के की मां थाने पहुंच गई और माफी मांगने को तैयार हो गई. उन्होंने बताया कि बच्चे अभी पढ़ाई कर रहे है यदि FIR होती है तो करियर खराब हो जाएगा. लेकिन गौसेवक नहीं माने और दोनों के खिलाफ प्रकरण दर्ज करा दिया.
गौसेवकों ने बताया कि गाय हमारी आराध्य है ,जिस प्रकार से गोमाता को इस्लामिक टोपी पहनाकर मजाक बनाया गया वो निंदनीय और घटिया कृत्य है. घटना से जुड़ा वीडियो वायरल किया गया जिससे हमारी धार्मिक भावना को ठेस पहुंची है, इसलिए थाने में जाकर FIR दर्ज कराई है.
पुलिस अधीक्षक अंकित सोनी ने बताया कि वीडियो वायरल किया गया था जिसके आधार पर प्रकरण दर्ज किया गया. किसी भी प्रकार के सांप्रदायिक मामलों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा.बता दें कि भोपाल के कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिए जाने की अनुशंसा की है, लेकिन गुना में मुस्लिम लड़कों ने गाय को इस्लामिक टोपी पहनकर विवाद को बढ़ाने की कोशिश की.
राजपाल यादव अपनी भतीजी की शादी में परिवार के साथ खुशियां मना रहे हैं. यूपी के शाहजहांपुर में आयोजित इस शादी में राजपाल यादव का अलग अंदाज दिखा. वो रोटी बनाते हुए नजर आए. उनका ये वीडियो फैंस के बीच वायरल हो रहा है.मशहूर कॉमेडियन राजपाल यादव के घर में जश्न का माहौल है. वो यूपी अपने होमटाउन शाहजहांपुर में अपनी भतीजी की शादी अटेंड कर रहे हैं. शादी वाले घर की वीडियोज सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं. जेल की कड़वी यादों को भुलाकर एक्टर शादी में मजे कर रहे हैं. बीते दिन उनका डांस करते हुए वीडियो सामने आया था. अब वो शादी में रोटी बनाते दिखे.
सोशल मीडिया पर राजपाल की सिंपल लाइफ की झलक देखने को मिल रही है. वो अपने होमटाउन जाकर वहां देसी अंदाज में रह रहे हैं. शादी के फंक्शन में सभी साथ बैठकर मेहमानों के लिए रोटियां बना रहे हैं. रोटी बनाते हुए राजपाल ने कहा- मैं 1-2 साल बाद रोटी बना रहा हूं. रोटी बेलना एक कला है. रोटी घूमनी चाहिए. राजपाल के साथ बैठे शख्स ने कहा कि आप सालों बाद रोटी बना रहे हो, तब भी भूले नहीं हो. परमात्मा का शुक्र है. एक्टर ने जवाब में कहा- भूलेंगे कैसे?
अपनी भतीजी की शादी में राजपाल हाथ बंटा रहे हैं. यूजर्स ने उन्हें फैमिली मैन बताते हुए उनके संस्कारों की तारीफ की है. इससे पहले वो भतीजी के मेहंदी फंक्शन में डांस करते नजर आए थे. वो पत्नी राधा के साथ नाच रहे थे. राजपाल ने धोती पहनकर तगड़ा डांस दिखाया. शादी के घर की रौनक वीडियो में देखने को मिली. पत्नी संग गणपति पूजा करते हुए भी उनका वीडियो सामने आया. राजपाल का परिवार शादी के फंक्शंस में टेंशन को दूर रखकर एंजॉय कर रहा है. क्योंकि सभी जानते हैं एक्टर को जेल से अभी तक राहत नहीं मिली है. 18 मार्च को चेक बाउंस केस की अगली सुनवाई होगी.
साल 2012 में आई फिल्म ‘अता पता लापता’ को बनाने के लिए राजपाल ने मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ लिए थे. राजपाल का कहना है उन्होंने कर्ज नहीं निवेश के तौर पर पैसे लिए थे. वहीं मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से कहा गया कि उन्होंने कर्ज दिया था. इसे लेकर पूरा विवाद है. जब फिल्म नहीं चली तो राजपाल को भारी नुकसान हुआ. वो कर्ज के पैसे नहीं लौटा पाए. 5 करोड़ की कर्ज की राशि 9 करोड़ हुई. मामला कोर्ट में गया. बार-बार मौका मिलने के बावजूद एक्टर पूरी राशि नहीं चुका पाए. जिसकी वजह से उन्हें तिहाड़ जेल में सरेंडर करना पड़ा था. फिलहाल वो जेल में 12 दिन काटने के बाद बेल पर हैं.
आगरा के ट्रांस यमुना में दहेज के लिए विवाहिता के बेडरूम और किचन में CCTV कैमरे लगाकर उसकी निजता के उल्लंघन का मामला सामने आया है. पीड़िता का आरोप है कि 15 लाख खर्च के बावजूद ससुराल पक्ष कार और नकदी के लिए उसे प्रताड़ित और लज्जित कर रहा है.आगरा के ट्रांस यमुना क्षेत्र से दहेज उत्पीड़न और महिला की निजता के गंभीर उल्लंघन का सनसनीखेज मामला सामने आया है. पीड़िता ने आरोप लगाया है कि अतिरिक्त दहेज की मांग पूरी न होने पर न सिर्फ उसके साथ मारपीट की गई, बल्कि उसके किचन और बेडरूम तक में CCTV कैमरे लगाकर निगरानी कराई गई.
पीड़िता की शादी 12 मार्च 2019 को हिंदू रीति-रिवाज से कपिल देव के साथ हुई थी. मायके पक्ष के अनुसार शादी में करीब 15 लाख रुपये से अधिक खर्च किए गए. इसमें सोने-चांदी के जेवर, फर्नीचर, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक सामान, कपड़े, 5.51 लाख रुपये नकद और एक बुलेट मोटरसाइकिल शामिल थी. इसके बावजूद ससुराल पक्ष संतुष्ट नहीं हुआ.पीड़िता का आरोप है कि शादी के बाद से ही वैगन-आर कार और 2 लाख रुपये नकद की मांग की जाने लगी. मांग पूरी न होने पर उसे लगातार ताने दिए गए, गाली-गलौज हुई और मारपीट की गई. दो बेटों 4 वर्षीय कुनाल और 2 माह के रियांश के जन्म के बाद भी कथित उत्पीड़न नहीं रुका.
मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि देवर द्वारा घर में ऐसे CCTV कैमरे लगवाए गए, जिनकी रिकॉर्डिंग पीड़िता के किचन और बेडरूम तक हो रही थी. पीड़िता का कहना है कि यह सब उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित और लज्जित करने के उद्देश्य से किया गया. जब उसने कैमरों की दिशा बदलने या रिकॉर्डिंग बंद करने को कहा, तो विवाद और बढ़ गया.
पीड़िता के अनुसार, 5 नवंबर 2025 को पति, देवर, सास-ससुर और देवरानी ने एकजुट होकर उसके साथ मारपीट की और धमकी दी कि यदि दहेज नहीं लाई तो उसे घर से निकालकर दूसरी शादी कर लेंगे. शोर सुनकर पड़ोसी मौके पर पहुंचे तो उन्हें भी धमकाया गया.आरोप है कि 12 दिसंबर 2025 को पीड़िता को दोनों मासूम बेटों के साथ घर से बाहर निकाल दिया गया. उस वक्त छोटे बेटे रियांश की हालत गंभीर थी, लेकिन ससुराल पक्ष ने इलाज तक नहीं कराया. मायके वालों ने बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया और पूरा खर्च उठाया.
पीड़िता का कहना है कि शादी में दिया गया पूरा दान-दहेज और स्त्रीधन ससुराल पक्ष के कब्जे में है, जिसे लौटाने से इनकार किया जा रहा है. फिलहाल, पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है और सभी आरोपों की तस्दीक की जा रही है.
सबरीमाला गोल्ड चोरी केस में एसआईटी ने हाईकोर्ट को यह जानकारी दी है कि 36 सैंपल जुटाए गए हैं. इनकी जांच जमशेदपुर की लैब में होगी और वहां से अंतिम जांच रिपोर्ट मिलने के बाद इसे कोर्ट में दाखिल किया जाएगा.केरल के सबरीमाला गोल्ड चोरी के मामले की जांच स्पेशल इंवेस्टिगेटिव टीम यानी एसआईटी कर रही है. एसआईटी ने केरल हाईकोर्ट को यह जानकारी दी है कि इस मामले में कुल 36 सैंपल एकत्रित किए गए हैं. एसआईटी ने जांच के लिए ये सैंपल इंवेस्टिगेशन कमिश्नर और स्पेशल जज (विजिलेंस), कोल्लम के सामने पेश कर दिए हैं.
एसआईटी के मुताबिक ये सैंपल जांच के लिए नेशनल मेटलर्जिकल लैबोरेटरी, जमशेदपुर भेजे जाने हैं. मामले की दशा-दिशा जमशेदपुर की लैबोरेटरी से आई जांच रिपोर्ट पर निर्भरकरेगी. एसआईटी के अनुसार, नेशनल मेटलर्जिकल लैबोरेटरी से जो रिपोर्ट मिलेगी, वही अभियोजन पक्ष के मामले का सेंटर पॉइंट होगी. जांच टीम ने हाईकोर्ट को जल्द रिपोर्ट मिलने की भी जानकारी दी.
एसआईटी की ओर से कोर्ट में यह जानकारी दी गई कि लैब ने जांच रिपोर्ट जल्द से जल्द उपलब्ध करा दिए जाने का भरोसा दिलाया है. जांच टीम की ओर से यह भी कहा गया कि अंतिम रिपोर्ट 31 मार्च तक या उससे पहले संबंधित अदालत में दाखिल की जा सकती है. एसआईटी की ओर से यह भी कहा गया है कि टेक्निकल एविडेंस जुटाने के भी प्रयास किए जा रहे हैं.जांच टीम ने हाईकोर्ट में कहा कि कुछ आरोपियों की ओर से कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन और उनके आपसी संपर्क से जुड़े कॉल डेटा रिकॉर्ड प्राप्त करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं. मोबाइल सेवा प्रदाताओं से यह जानकारी मांगी गई है. गौरतलब है कि केरल के चर्चित सबरीमाला मंदिर में सोने की चोरी का मामला 2019 में सामने आया था.
राजनांदगांव जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने तथा आने वाली पीढिय़ों के लिए सुरक्षित एवं स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जनपद पंचायत डोंगरगांव के ग्राम बाघमार में जल अर्पण दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपाध्यक्ष जनपद पंचायत डोंगरगांव मनीष कुमार साहू, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सुश्री सुरूचि सिंह विशेष रूप से उपस्थित थे। उपाध्यक्ष जनपद पंचायत डोंगरगांव मनीष कुमार साहू ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि जल ही जीवन का आधार है और इसकी प्रत्येक बूंद अमूल्य है। उन्होंने जल संरक्षण के महत्व के संबंध में जानकारी दी। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सुश्री सुरूचि सिंह ने ग्रामीणों से वर्षा जल संचयन करने, जल स्रोतों की देखरेख करने तथा जल का दुरूपयोग नहीं करने का आग्रह किया।
इस अवसर पर जल संरक्षण की सामूहिक शपथ दिलाई गई। सभी ग्रामीणों ने जल की प्रत्येक बूंद को बचाने एवं जल स्रोतों की रक्षा करने का संकल्प लिया। जल बहिनी एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा ग्रामीणों को जल गुणवत्ता, स्वच्छ पेयजल एवं जल प्रबंधन के संबंध में जानकारी दी गई। कार्यक्रम में बताया गया कि जल अर्पण दिवस का उद्देश्य पूर्ण हो चुकी जल आपूर्ति प्रणाली को औपचारिक रूप से ग्राम पंचायत एवं वीडब्ल्यूएससी को सौंपना है। जिससे यह समुदाय के हाथ में आ जाए, ताकि हर ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणाली को समझ सके और इसके संचालन और संरक्षण में अपनी भूमिका पर गर्व महसूस कर सके। यह सुनिश्चित करना कि गांव तकनीकी, वित्तीय और संस्थागत रूप से अपनी जल आपूर्ति प्रणाली को सुचारू रूप से संचालित और बनाए रखने के लिए पूरी तरह से तैयार है। कार्यक्रम में सदस्य जनपद पंचायत डोंगरगांव श्रीमती गेंदा बाई, ग्राम सरपंच श्रीमती उर्वशी धु्रव, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत डोंगरगांव श्रीमती रोशनी भगत, कार्यपालन अभियंता लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग सुश्री पलक कोठारी, सहायक अभियंता लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग विनोद कुमार सिंह सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी जल बहिनी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
भारत की जनगणना-2027 के सफल संचालन के लिए आयोजित राज्य एवं संभाग स्तरीय अधिकारियों के प्रशिक्षण सम्मेलन में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि जनगणना केवल जनसंख्या की गणना नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने प्रदेश के सभी संभागायुक्तों, कलेक्टरों एवं प्रशासनिक अधिकारियों से इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दायित्व को पूरी गंभीरता, सटीकता और संवेदनशीलता के साथ निभाने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2027 की जनगणना स्वतंत्रता के बाद आठवीं जनगणना होगी। जनगणना प्रशासन की विश्वसनीयता और शासन की पारदर्शिता की परीक्षा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आंकड़े अधूरे या त्रुटिपूर्ण होंगे तो विकास योजनाओं का लक्ष्य प्रभावित होगा। एक भी व्यक्ति या परिवार छूटना नहीं चाहिए, क्योंकि इससे विकास की प्रक्रिया अधूरी रह सकती है। उन्होंने बताया कि जनगणना-2027 भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी। मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल के माध्यम से डेटा संकलन किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी होगी। छत्तीसगढ़ में प्रथम चरण अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य 1 मई से 30 मई 2026 तक संचालित किया जाएगा। यह कार्य प्रदेश के 33 जिलों, 252 तहसीलों और 19,978 गाँवों में संपन्न किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व-गणना की सुविधा से जनभागीदारी बढ़ेगी और जनता का विश्वास ही जनगणना की सफलता का आधार है। यह कार्य विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत-2047 की नींव रखने वाला सिद्ध होगा। प्रशिक्षण सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव श्री विकासशील ने कहा कि जनगणना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसमें तथ्यों का व्यवस्थित एवं प्रमाणिक संकलन किया जाता है। उन्होंने अधिकारियों से सभी निर्धारित कार्यों को तय समय-सीमा के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने प्रगणकों के प्रशिक्षण में सपोर्टिव सुपरविजन की तकनीक अपनाने पर विशेष बल देते हुए कहा कि मैदानी स्तर पर कार्य करने वाले कर्मियों को निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग मिलना चाहिए, जिससे त्रुटियों की संभावना न्यूनतम हो। उन्होंने नई भवन अनुज्ञाओं को पूर्व से ही ट्रेस करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि मकान सूचीकरण के दौरान कोई संरचना छूट न जाए। साथ ही सीमावर्ती जिलों के संदर्भ में उन्होंने स्वयं के अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा की अन्य राज्यों में चले गए व्यक्तियों की गणना में दोहराव से बचने के लिए विशेष सावधानी बरती जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि जनगणना की सफलता सूक्ष्म योजना, समन्वय और सटीक क्रियान्वयन पर निर्भर करती है, इसलिए सभी अधिकारी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ इस राष्ट्रीय दायित्व का निर्वहन करे।
इस अवसर पर भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त श्री मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि जनगणना विश्व के सबसे बड़े प्रशासनिक एवं सांख्यिकीय कार्यों में से एक है। यह हमारे लोकतंत्र की आधारशिला है और नीति-निर्माण व विकास योजनाओं की दिशा तय करती है। उन्होंने बताया कि भारत में पहली संगठित जनगणना वर्ष 1872 में प्रारंभ हुई थी और आगामी जनगणना देश की 16वीं तथा स्वतंत्रता के बाद की 8वीं जनगणना होगी। उन्होंने कहा कि 150 वर्षों की परंपरा वाली भारतीय जनगणना गाँव, कस्बा और वार्ड स्तर तक प्राथमिक आँकड़ों का सबसे बड़ा स्रोत है। इसमें मकानों की स्थिति, सुविधाएँ, परिसंपत्तियाँ, जनसांख्यिकीय विवरण, धर्म, अनुसूचित जाति-जनजाति, भाषा, शिक्षा, आर्थिक गतिविधि, प्रव्रजन एवं प्रजनन से संबंधित सूक्ष्म एवं विश्वसनीय आँकड़े संकलित किए जाते हैं।
गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मनोज पिंगुआ ने कलेक्टरों को जनगणना-2027 से संबंधित कार्य के बारे में विस्तार से दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, छत्तीसगढ़ राज्य जनगणना निदेशक कार्तिकेय गोयल ने जनगणना 2027 के संबंध में आधारभूत जानकारी दी। राज्य स्तरीय संभागायुक्त-कलेक्टर सम्मेलन में राज्य शासन के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, सभी संभागायुक्त, कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त एवं अन्य अधिकारी व जनगणना निदेशालय के अधिकारी उपस्थित थे।
बेमेतरा:- स्थानीय श्री राम मंदिर प्रांगण में संत श्री आशारामजी बापू आश्रम एवं श्री योग वेदांत सेवा समिति के तत्वाधान में जिला स्तरीय भव्य मातृ-पितृ पूजन दिवस का गरिमामय आयोजन संपन्न हुआ।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बेमेतरा विधायक दीपेश साहू शामिल हुए। उनके साथ भाजपा ग्रामीण अध्यक्ष छोटूराम साहू, पार्षद विकास तंबोली, पार्षद रोशन दत्ता और युवा सेवा संघ के सोनू साहू भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। दीपेश साहू नें कहाँ मैं परम् पूज्य श्री आशारामजी बापू के प्रति अपना हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने मातृ-पितृ पूजन दिवस की शुरुआत की। श्री योग वेदांत सेवा समिति को इस आयोजन के लिए बधाई। माता-पिता और बच्चों को इस पावन अवसर पर शुभकामनाएं। मैं उम्मीद करता हूं कि यह आयोजन समाज में माता-पिता और गुरु के प्रति सम्मान और श्रद्धा की भावना को बढ़ावा देगा।
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में समिति सें संजय साहू, भगवती साहू, विक्रम साहू, भुवन साहू, अयोध्या यदु, गणेश पटेल, जगत साहू, अवध साहू,ढारेंद्र साहू,कन्हैया साहू, नंदू बघेल,हेमलाल साहू, सोनू साहू, प्रदीप साहू, कुश कश्यप, योगेंद्र साहू, अनूप यादव, डॉ. रेवाराम पाल, सिद्धांत चौहान,सुदर्शन साहू,डॉ.जनक साहू, दिलहरण,ओमप्रकाश साहू, विमल साहू, मनोज साहू, यमन देवांगन, खुमान श्रीवास, तोपेश्वर साहू,मनोज श्रीवास, द्वारिका साहू और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक व मातृ-शक्तियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम के अंत में आयोजन समिति ने अतिथियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
जिले में मानवीय संवेदना और त्वरित सहायता का एक प्रेरक उदाहरण सामने आया जब राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक प्रसूता महिला और उसके 18 दिन के नवजात शिशु को बड़ी दुर्घटना से बचा लिया गया। स्थानीय दुकानदारों, कर्मचारियों, पड़ोसी महिलाओं और स्वास्थ्य अमले की सजगता से समय रहते दोनों की जान सुरक्षित रही।
आज दोपहर लगभग 12:00 बजे राष्ट्रीय राजमार्ग पर तुमडीबोड में एक महिला अपनी मोटरसाइकिल पर अपने 18 दिन के नवजात शिशु के साथ इलाज कराकर राजनांदगांव से अपने ग्राम कोहका लौट रही थीं। महिला की ऑपरेशन से डिलीवरी हुई थी और तीन दिन पहले ऑपरेशन के टांके खुलवाए गए थे। साई बाबा ट्रेडर्स, किसान कांग्रेस अध्यक्ष मदन साहू की किराना दुकान के पास अचानक महिला को चक्कर आ गया और वह चलती गाड़ी से गिरने लगीं। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए दुकान के कर्मचारियों ने दौड़कर नवजात शिशु को सुरक्षित पकड़ लिया जबकि महिला सड़क पर गिर पड़ीं। घटना के तुरंत बाद महिला को दुकान परिसर में सुरक्षित स्थान पर लाया गया। आसपास के लोगों ने सहयोग किया और पड़ोस में रहने वाली महिलाओं ने तेल मालिश कर प्राथमिक सहायता प्रदान की। इस दौरान मदन साहू ने तत्काल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तुमडीबोड से संपर्क किया। सूचना मिलते ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की डॉक्टर धनेश्वरी देवांगन (RMA) तुरंत मौके पर पहुंचीं और अपनी सेवाएं दीं। प्राथमिक जांच के बाद उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के टांकों की स्थिति गंभीर हो सकती है जिन्हें दिखाना आवश्यक है और संभावित रूप से दोबारा ऑपरेशन की भी जरूरत पड़ सकती है। डॉक्टर ने परिजनों को जिला अस्पताल/मेडिकल कॉलेज या किसी बड़े अस्पताल में तत्काल ले जाने की सलाह दी। प्राथमिक उपचार के बाद परिजनों ने तुरंत वाहन की व्यवस्था की और महिला व नवजात को राजनांदगांव जिला अस्पताल के लिए रवाना किया गया जहां आगे का इलाज सुनिश्चित किया गया। इस मानवीय प्रयास में डॉ. धनेश्वरी देवांगन (RMA), श्री हरि बंजारे, सुपरवाइजर हेमंत साहू, रॉयल एंटरप्राइजेज, आसपास के दुकानदारों और स्थानीय महिलाओं का विशेष योगदान रहा। सभी की तत्परता और सहयोग ने एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया। यह घटना बताती है कि समय पर मदद, सामूहिक प्रयास और संवेदनशीलता से किसी भी आपात स्थिति में जीवन बचाया जा सकता है। स्थानीय लोगों और स्वास्थ्य अमले की यह पहल सराहनीय है।